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कोर्ट और शासनादेश को दरकिनार कर दी प्रोन्नति
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
प्रदेश के विभिन्न विभागों में तदर्थ नियुक्ति पाने वाले उर्दू अनुवादकों को प्रोन्नति का लाभ देने के लिए कोर्ट का आदेश और शासनादेश दरकिनार करने का मामला सामने आया है। शासनादेश और कोर्ट के आदेश से इतर आबकारी, पुलिस और ग्राम विकास सहित कई विभागों में तदर्थ उर्दू अनुवादकों को प्रोन्नति कर दी गई है।
बता दें, वर्ष 2016 में नैनीताल हाईकोर्ट ने आदेश किया था कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में तैनात तदर्थ उर्दू अनुवादकों को सिर्फ एश्योर्ड कैरियर प्रोगेशन (एसीपी) स्कीम के तहत वेतनमान का लाभ दिया जाएगा और पद वही रहेगा जिस पर उनकी नियुक्ति हुई हो। 17 अक्तूबर 2018 को पुलिस विभाग महानिरीक्षक, कार्मिक ने अपर सचिव गृह को भेजे गए पत्र में अवगत कराया है कि वर्ष 2016 में कोर्ट के आदेशों के पूर्व ही पुलिस विभाग में नियुक्त उर्दू अनुवादकों को लिपिक के पद पर समायोजित किया जा चुका है। अहम पहलू यह है कि कोर्ट के आदेश आने के बाद भी विभिन्न विभागों में उर्दू अनुवादकों को प्रोन्नति का लाभ बराबर मिल रहा है।
नियम फाइलों में बंद
अक्तूबर 2018 में मांगी गई एक सूचना में शासन ने स्पष्ट किया है कि तदर्थ उर्दू अनुवादकों को सिर्फ एसीपी का लाभ दिया जा सकता है। मुहैया कराए गए शासन के पत्रों में इस तथ्य की पुष्टि की गई है कि आबकारी विभाग सहित अन्य महकमों में उर्दू अनुवादकों को दी गई पदोन्नति कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है। शासन ने आबकारी आयुक्त को लिखे पत्र में कोर्ट के आदेशों के क्रम में कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे। इसके बावजूद कोर्ट से लेकर शासन तक के आदेश ठंडे बस्ते में चले गए।
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मामला 2014-15 का है। फौरी तौर पर इस प्रकरण में कुछ नहीं कहा जा सकता है। यदि कोर्ट के आदेशों के विपरीत पदोन्नतियां की गई हैं तो मामले की पड़ताल करवाई जाएगी। जो भी दोषी होंगे जांच के आधार पर कार्रवाई होगी।
-प्रकाश पंत, आबकारी एवं वित्त मंत्री
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प्रदेश के विभिन्न विभागों में तदर्थ नियुक्ति पाने वाले उर्दू अनुवादकों को प्रोन्नति का लाभ देने के लिए कोर्ट का आदेश और शासनादेश दरकिनार करने का मामला सामने आया है। शासनादेश और कोर्ट के आदेश से इतर आबकारी, पुलिस और ग्राम विकास सहित कई विभागों में तदर्थ उर्दू अनुवादकों को प्रोन्नति कर दी गई है।
बता दें, वर्ष 2016 में नैनीताल हाईकोर्ट ने आदेश किया था कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में तैनात तदर्थ उर्दू अनुवादकों को सिर्फ एश्योर्ड कैरियर प्रोगेशन (एसीपी) स्कीम के तहत वेतनमान का लाभ दिया जाएगा और पद वही रहेगा जिस पर उनकी नियुक्ति हुई हो। 17 अक्तूबर 2018 को पुलिस विभाग महानिरीक्षक, कार्मिक ने अपर सचिव गृह को भेजे गए पत्र में अवगत कराया है कि वर्ष 2016 में कोर्ट के आदेशों के पूर्व ही पुलिस विभाग में नियुक्त उर्दू अनुवादकों को लिपिक के पद पर समायोजित किया जा चुका है। अहम पहलू यह है कि कोर्ट के आदेश आने के बाद भी विभिन्न विभागों में उर्दू अनुवादकों को प्रोन्नति का लाभ बराबर मिल रहा है।
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नियम फाइलों में बंद
अक्तूबर 2018 में मांगी गई एक सूचना में शासन ने स्पष्ट किया है कि तदर्थ उर्दू अनुवादकों को सिर्फ एसीपी का लाभ दिया जा सकता है। मुहैया कराए गए शासन के पत्रों में इस तथ्य की पुष्टि की गई है कि आबकारी विभाग सहित अन्य महकमों में उर्दू अनुवादकों को दी गई पदोन्नति कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है। शासन ने आबकारी आयुक्त को लिखे पत्र में कोर्ट के आदेशों के क्रम में कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे। इसके बावजूद कोर्ट से लेकर शासन तक के आदेश ठंडे बस्ते में चले गए।
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मामला 2014-15 का है। फौरी तौर पर इस प्रकरण में कुछ नहीं कहा जा सकता है। यदि कोर्ट के आदेशों के विपरीत पदोन्नतियां की गई हैं तो मामले की पड़ताल करवाई जाएगी। जो भी दोषी होंगे जांच के आधार पर कार्रवाई होगी।
-प्रकाश पंत, आबकारी एवं वित्त मंत्री