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पीड़ितों का दर्द जानने चुपके से उत्तराखंड पहुंचे राहुल
विनोद अग्निहोत्री
Updated Tue, 25 Jun 2013 02:08 AM IST
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भाजपा के सुपर स्टार और पार्टी की चुनाव प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगर हेलीकॉप्टर से उत्तराखंड के आपदाग्रस्त इलाकों का दौरा करके कांग्रेस और यूपीए सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए उन पर तेज हमले किए, वहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी खामोशी से सड़क मार्ग के जरिए उत्तराखंड के आपदाग्रस्त इलाकों में राहत कार्यो का जायजा लेने, राज्य सरकार के प्रशासन तंत्र के कामकाज की हकीकत जानने और पीड़ितों के दुख को साझा करने पहुंच गए हैं।
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राहुल के करीबी सूत्रों के मुताबिक अपनी इस चिरिपरिचित छापामार शैली के जरिए राहुल एक तरफ तो अपने आलोचकों का मुंह बंद करेंगे, दूसरी तरफ बहुगुणा सरकार के खिलाफ मिल रही शिकायतों की हकीकत जांच कर भविष्य में सही समय आने पर उत्तराखंड को लेकर बड़ा राजनीतिक फैसला भी कर सकते हैं।
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यह जानकारी देने वाले सूत्रों के मुताबिक राहुल दिन में दिल्ली से ऋषिकेश पहुंचे और वहां से सीधे कार में बैठकर पहाड़ों को ओर निकल गए। पहले वह पौड़ी पहुंचे और वहां उन्होंने हालात का जायजा लिया। इसके बाद वे सड़क मार्ग से गोचर पहुंच गए।
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राहत कार्यों में सक्रिय कांग्रेस के एक नेता के मुताबिक राहुल की अपनी कार्यशैली है जो आम तौर पर दूसरे नेताओं की परंपरागत कार्यशैली से अलग है।
नोएडा के भट्टा पारसौल में भी वह इसी तरह पहुंचे थे। इस बार भी वह हवाई सर्वेक्षण की जगह हादसे वाली किसी जगह खुद पहुंचकर लोगों से सीधे बात करना चाहते हैं।
राहुल के करीबी सूत्रों के मुताबिक सेना और अर्द्धसैनिक बलों द्वारा किए जा रहे बचाव कार्य की जानकारी तो लोगों को मिल रही है, लेकिन राहत सामग्री के वितरण और राज्य सरकार की मशीनरी के कामकाज को लेकर भी नकारात्मक रिपोर्ट आ रही है।
खबरें आ रही हैं कि कई कारणों से राहत सामग्री ऊपर पहाड़ों में पीडि़तों तक पहुंच नहीं पा रही है। भूख और कपड़ों की कमी से लोगों का बुरा हाल है। ज्यादातर मौतों की वजह भी भूख, जहरीले फल खाने और ठंड न बर्दाश्त कर पाना है।
इन सूचनाओं ने कांग्रेस नेतृत्व को विचलित कर दिया है। इसीलिए कांग्रेस ने अपने मुख्यमंत्रियों अशोक गहलौत, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पृथ्वीराज चह्वाण समेत मोतीलाल वोरा, अंबिका सोनी, महेंद्र जोशी कई वरिष्ठ नेताओं को उत्तराखंड भेजा।