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सुप्रीम कोर्ट पर टिका उत्तराखंड के सियासी संकट का भविष्य

Tue, 26 Apr 2016 07:26 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 26 Apr 2016 07:26 PM IST
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political crisis in Uttarakhand
Supreme Court hearing on Saturday - फोटो : Getty Images

उत्तराखंड का सियासी संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। मामले में बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई है।

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विधानसभा की सदस्यता खत्म करने का मामला 28 अप्रैल को उच्च न्यायालय नैनीताल में सुना जाएगा। अगर सर्वोच्च न्यायालय में अनुकूल फैसला नहीं आया तो केंद्र के सामने राष्ट्रपति शासन को संसद के दोनों सदनों से पारित कराना मजबूरी होगा, जो काफी मुश्किल काम है। उधर, भाजपा के भीतर की रायशुमारी भी अब विधानसभा भंग करने की तरफ बढ़ रही है। 

वैसे भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए ही उत्तराखंड में सत्ता की राह बेहद मुश्किल हो गई है, लेकिन केंद्र सरकार इस समय धर्म संकट में है। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली सदन में कह चुके हो कि यह संकट कांग्रेस के अंदरूनी फूट का नतीजा है। हालांकि सूबे का सियासी संकट किसी की भी देन हो, लेकिन दोनों मुख्य राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। अभी तक दोनों सरकार बनाने पर आमादा थे, लेकिन अब भाजपा के भीतर से पीछे हटने का संकेत दे रही है।
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यदि सर्वोच्च न्यायालय कोई निर्णय नहीं लेता तो केंद्र की मजबूरी है कि उत्तराखंड में लागू राष्ट्रपति शासन को संसद के दोनों सदनों से पास कराना होगा। लोकसभा में तो भाजपा का बहुमत है, लेकिन यह प्रस्ताव राज्यसभा में गिरना तय है। यही चिंता केंद्र को सता रही है। यही कारण है कि एक गुट विधानसभा भंग करने की पैरवी भी कर रहा है।
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सूत्रों की माने तो यह तैयारी की जा रही है कि राज्यपाल से एक ऐसी रिपोर्ट मंगवा ली जाए, जिसमें राज्य में किसी भी राजनीतिक दल की सरकार बनने की संभावनाएं क्षीण हो और इसी आधार पर केंद्रीय कैबिनेट विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर दे। इससे केंद्र की इज्जत भी बचेगी, कांग्रेस की सरकार भी नहीं बनेगी और प्रदेश भाजपा को भी बहाना मिल जाएगा।

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