फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   You must go to 20 to 52 km for blood tests

खून की जांच के लिए जाना पड़ता 20 से 52 किमी दूर

Mon, 06 Nov 2017 10:38 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला अस्कोट (पिथौरागढ़)।
ब्यूरो, अमर उजाला अस्कोट (पिथौरागढ़)। Updated Mon, 06 Nov 2017 10:38 PM IST
विज्ञापन
You must go to 20 to 52 km for blood tests
अस्कोट अस्पताल में खाली पड़े बिस्तर। - फोटो : अमर उजाला
 अतीत में कत्यूरी वंशीय पाल राजाओं की राजधानी रही अस्कोट क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। अस्कोट के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा देने की दो मुख्यमंत्रियों की घोषणा पूरी नहीं हुई है। हालात यह हैं कि अस्पताल में पैथोलॉजी लैब तक नहीं है। खून की जांच के लिए 20 किमी दूर डीडीहाट, 52 किमी दूर पिथौरागढ़ जाना पड़ता है।
विज्ञापन


अस्पताल में तीन एलोपैथिक चिकित्सकों के पद सृजित हैं। तैनाती मात्र एक चिकित्सक की है। तीन साल पहले से अस्पताल में एक आयुर्वेदिक चिकित्सक तैनात हैं। अस्पताल में एक्सरे, अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है। आक्सीजन सिलेंडर तक अस्पताल में नहीं है। सुविधाओं के अभाव में 5 बिस्तरों का यह अस्पताल सफेद हाथी साबित हो रहा है। 30000 की आबादी को इस अस्पताल का कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
विज्ञापन


क्षेत्र के लोग कई सालों से इस अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। वर्ष 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक और वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा देने की घोषणा की थी।  यह दोनों घोषणाएं कोरी साबित हुई हैं। अस्पताल की अव्यवस्थाओं से लोगों में रोष है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सुविधा बढ़ाकर लोगों को राहत दे सरकार
अस्कोट विकास संघर्ष समिति के संरक्षक भीम सिंह भंडारी कहते हैं कि दूरस्थ क्षेत्र के अस्पताल में सुविधाएं बढ़ाकर लोगों को राहत देने का काम सरकार को करना चाहिए। छोटी सी बीमारी के इलाज के लिए भी इलाके के लोगों को अन्य जगह जाना पड़ता है। एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, खून की जांच की सुविधा तो सरकार दे।

घोषणा पूरी कराने के लिए जनप्रतिनिधि आगे आएं
देवल निवासी विक्रम सिंह पाल कहते हैं कि अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा देने की घोषणा दो बार मुख्यमंत्री के स्तर से हो चुकी है। घोषणा को पूरा कराने के लिए जनप्रतिनिधियों को भी ध्यान देना चाहिए। अस्पताल का वास्तविक लाभ लोगों को मिले, ऐसे उपाय किए जाने चाहिए।


 क्रासर
डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की घोषणा की होती तो अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा मिल चुका होता। हरीश रावत ने अवश्य घोषणा की थी, जो पूरी नहीं हुई। अस्पताल के उच्चीकरण के लिए प्रयास किया जाएगा।
विशन सिंह चुफाल क्षेत्रीय विधायक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed