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जल संरक्षण से ही बचेगी जमीन

Tue, 03 Jan 2017 10:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Tue, 03 Jan 2017 10:12 PM IST
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Will preserve the ground water protection
पिथौरागढ़ कालेज में भूगर्भ विज्ञान के सेमिनार में मौजूद विद्वान - फोटो : अमर उजाला

राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में मंगलवार को आयोजित सेमिनार में वक्ताओं ने जमीन को बचाने के लिए पानी का संरक्षण बेहद जरूरी बताया। ‘मरुभूमि, भूमि निम्नीकरण और सूखे से संघर्ष’ विषय पर आयोजित सेमिनार में जिलाधिकारी डा. रंजीत सिन्हा ने कहा कि आज सबसे बड़ी जरूरत पानी के संरक्षण की है। इसके लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएं।

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भूवैज्ञानिक डा. बीएस कोटलिया ने कहा कि 36 हजार वर्ष पहले पिथौरागढ़ में भी झील हुआ करती थी। जमीन की नमी कम होने और भूगर्भीय हलचलों के कारण झील का अस्तित्व समाप्त हो गया है। उत्तराखंड में चार हजार वर्षों में जलवायु परिवर्तन बहुत तेजी से हुआ। इस अवधि में कई नदियां लुप्त हो गई और कई ग्लेशियरों का नामोनिशान मिट गया। भूवैज्ञानिक डा. संतोष कुमार ने कहा कि भूमिगत जल तेजी से कम हो रहा है। इसका असर जमीन की ऊपरी परत पर पड़ रहा है। सूखे की स्थिति गंभीर होने के पीछे भी यही कारण हैं। एनएचपीसी के भूवैज्ञानिक डा. डीसी त्रिपाठी ने जमीन की उर्वरता कम होने पर उसका असर समाज, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि इसका सीधा समाधान यही है कि पानी के संग्रह के उपाय किए जाएं।
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सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डा. डीएस पांगती ने कहा कि अहम विषयों की जानकारी आम लोगों को होनी जरूरी है। कॉलेज में इस तरह की कार्यशालाएं समय-समय पर आयोजित की जाएंगी। आयोजक कॉलेज के भूगर्भ विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डा. आरए सिंह ने कहा कि इस सेमिनार में विद्वानों ने जो बातें रखी हैं, उन पर अमल कराने का प्रयास होगा। इस दौरान डा. बीसी जोशी, डा. जीसी पंत, डा. प्रेमलता पंत, डा. आभा शर्मा, डा. रेखा पांडे, डा. मंजुला चंद, डा. प्रमोद जोशी, डा. हेमचंद्र जोशी, डा. पंकज भट्ट ने भी शोधपत्र पढ़े। सेमिनार में डा. आरडी जोशी, डा. नरोत्तम जोशी, डा. आरएस अधिकारी, डा. जगदीपक जोशी, डा. अभिषेक पंत, डा. पुष्कर बिष्ट, डा. विपिन पाठक आदि उपस्थित थे। संचालन हिंदी विभागाध्यक्ष डा. अजय शुक्ल, डा. सुनीता खोलिया ने किया।

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