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तेंदुए की तीन खालों के साथ वन्यजीव तस्कर गिरफ्तार
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Thu, 28 Sep 2017 10:35 PM IST
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पिथौरागढ़ में तेंदुए की खालों के साथ पकड़ा गया आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
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एसओजी, जाजरदेवल थाना पुलिस और वन विभाग ने संयुक्त अभियान चलाकर वड्डा मार्ग पर हुड़कना पुल के पास एक व्यक्ति के कब्जे से तेंदुए की तीन खालें बरामद की हैं। पुलिस के अनुसार 59 वर्षीय आरोपी खालों को बेचने के लिए पिथौरागढ़ आ रहा था। पकड़ी गई खालों की अंतरराष्ट्रीय कीमत करीब 16 लाख रुपये बताई जा रही है।
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एसओजी प्रभारी प्रकाश सिंह मेहरा को मिली गोपनीय सूचना के आधार पर जाजरदेवल पुलिस और वन विभाग की टीम ने बृहस्पतिवार सुबह 9.40 बजे वड्डा मार्ग पर हुड़कना पुल के पास जायल (पंथ्यूड़ी) निवासी त्रिलोक सिंह बिष्ट की तलाशी ली। उसके कब्जे से तेंदुए की तीन खालें बरामद हुई। खालों की लंबाई 2.6 मीटर, 2.5 मीटर और 2.3 मीटर है। आरोपी के खिलाफ जाजरदेवल थाने में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार आरोपी ने बताया कि वह इन खालों को बेचने के लिए पिथौरागढ़ ला रहा था।
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इसके अलावा उससे वन्यजीवों को मारने और अंगों की तस्करी के बारे में कई अहम जानकारियां मिली हैं। उसके बाहरी जिलों के संपर्कों को भी खंगाला जा रहा है। तेंदुओं को मारने के मामले में फोरेंसिक एक्सपर्ट की भी राय ली जाएगी। पुलिस अधीक्षक अजय जोशी ने खाल बरामद करने वाली टीम को 2500 रुपये का नकद इनाम देने की घोषणा की है। खाल तस्कर को पकड़ने वाले दल में जाजरदेवल के थानाध्यक्ष दीपक सिंह बिष्ट, वन क्षेत्राधिकारी दिनेश चंद्र जोशी, वन दरोगा जगदीश सिंह बिष्ट आदि शामिल थे।
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फल-फूल रहा खाल और हड्डी तस्करी का धंधा
इस जिले में खाल और हड्डी तस्करी का धंधा खूब फल-फूल रहा है। इसी साल 3 जनवरी को सांभर के 10 किलो मांस के साथ मटेलाबैंड पर एक व्यक्ति पकड़ा गया था। 6 जनवरी को झूलाघाट में वन्यजीवों के दांत के साथ एक व्यक्ति गिरफ्तार हुआ था। 7 जनवरी को मड़मानले तिराहे के पास तेंदुए की 4 खालों के साथ एक गिरफ्तार हुआ था। 28 अप्रैल को डीडीहाट के दूनाकोट मार्ग पर एक खाल पकड़ी गई थी। 19 मई को राईआअगर-चौड़मन्या सड़क पर तस्करों के कब्जे से तेंदुए की दो खाल पकड़ी गई थी। इससे पहले के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2016 में तेंदुए की चार खालें और 6.9 किलो हड्डियां बरामद हुई थीं। वर्ष 2015 में एक तेंदुए की खाल और 5 किलो हड्डी बरामद हुई थी। वर्ष 2014 में तीन मामलों में 3 तेंदुए की खाल, 10.5 किलो तेंदुए की हड्डी, 16 ग्राम भालू की पित्ती पकड़ी गई। वर्ष 2013 वन्यजीव तस्करी के लिहाज से बहुत ऊपर रहा। तस्करी के 9 मामलों में 9 तेंदुए की खाल, 210 ग्राम भालू की पित्ती, तेंदुए की हड्डियां और नाखून बरामद हुए। वर्ष 2012 में तस्करी के 4 मामलों में तेंदुए की 6 खालें बरामद हुईं। एक जिंदा उल्लू पकड़ा गया। आंकड़े इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि सरकारी महकमों की नाकामी के कारण वन्यजीवों की जान पर शिकारी आफत बनकर टूट रहे हैं। जंगलों से वन्यजीवों का सफाया हो रहा है।