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मरीजों को डोली में लाने की मजबूरी कब होगी खत्म

Sat, 20 Feb 2016 10:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,मुनस्यारी /पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला,मुनस्यारी /पिथौरागढ़ Updated Sat, 20 Feb 2016 10:40 PM IST
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When will the compulsion to bring patients over Doli
सेमली गांव के लोग 108 आपात सेवा के बारे में कुछ नहीं जानते। आज भी बीमार और प्रसूता को डोली में बैठाकर ही अस्पताल लाना पड़ता है। यदि गांव तक सड़क बनी होती तो 108 आपात वाहन गांव में पहुंच जाता। बीमार को कंधे में ढोकर लाने की मजबूरी नहीं होती।
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सेमली गांव के गरीब मोहन चंद्र द्विवेदी की तबियत शनिवार को बहुत बिगड़ गई। वह हार्ट के मरीज हैं। उनको मुख्य सड़क तक लाने के लिए लोगों को 4 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ा। गांव के लोग डोली में बैठाकर मरीज को मुख्य सड़क तक लाए।
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गांव के लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र के हाल ऐसे हैं तो अन्य के बारे में क्या उम्मीद की जा सकती है। पूर्व विधायक और वन विकास निगम के अध्यक्ष हरीश धामी के सामने लोगों ने कई बार सड़क की समस्या रखी, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।
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लोगों का कहना है कि जब सरकार चार किलोमीटर सड़क नहीं बना सकती तो 12 किलोमीटर दूर पातो के लिए कैसे सड़क बन पाएगी। गांववालों ने बताया कि मरीजों को डोली में ले जाने के लिए हमेशा डोली का ही उपयोग करना पड़ता है। लोग जरूरी सामान के लिए भी चार किलोमीटर पैदल दूरी तय करते हैं।

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