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Pithoragarh News: आखिर कब बनेगी सपनों की रई झील, एक बार फिर सर्वे की तैयारी
Thu, 28 Sep 2023 10:46 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 28 Sep 2023 10:46 PM IST
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पिथौरागढ़। वर्ष 1990 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने सोर के लोगों को रई झील का जो सपना दिखाया था वह आज तक पूरा नहीं हो पाया है। झील का कार्य कभी सर्वे से आगे ही नहीं बढ़ पाया। अब फिर से रई झील के लिए सर्वे कराए जाने की बात कही जा रही है। लोगों का कहना है कि उन्हें फिर से झील के सपने दिखाए जा रहे हैं लेकिन पता नहीं कब झील अस्तित्व में आएगी। हालांकि यह तय है कि रई झील के बनने के बाद यहां पर्यटन को पंख लगेंगे।
पिथौरागढ़ के खूबसूरत स्थानों में एक रई क्षेत्र में वर्ष 1990 में डेढ़ किमी लंबी झील के निर्माण के लिए यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने रई झील बनाने की घोषणा की थी। उस समय अलग राज्य के लिए चल रहे आंदोलन के कारण झील का सपना ठंडे बस्ते में चला गया। नौ नवंबर 2000 को यूपी से हटकर उत्तरांचल के अस्तित्व में आने के बाद फिर रई झील के निर्माण की मांग तेज होने लगी। छात्र संगठन सहित कई अन्य संगठनों ने रई झील के लिए आंदोलन किए।
चुनाव से ठीक पहले पिथौरागढ़ आने वाले हर एक मुख्यमंत्री ने रई झील की घोषणा की। डूब क्षेत्र ज्यादा होने के कारण इसका आकार घटाकर 600 मीटर और अधिकतम चौड़ाई 200 मीटर रखी गई। सिंचाई विभाग ने वर्ष 2013 में 32 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। झील के निर्माण के लिए आईआईटी रुड़की की टीम ने सर्वे भी किया लेकिन झील नहीं बन पाई।
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उत्तराखंड शासन भी आश्वासन तक सीमित रहा
पिथौरागढ़। वर्ष 2013 के बाद से प्रत्येक सीएम पिथौरागढ़ में आयोजित हुई चुनावी जनसभाओं में घोषणा करके चले जाते हैं लेकिन इसे मूर्तरूप देने के लिए किसी ने कोई प्रयास नहीं किए। वर्ष 2017 में पिथौरागढ़ के तत्कालीन डीएम डॉ. रंजीत सिन्हा ने झील निर्माण में आ रही समस्याओं का निराकरण करने की पहल की लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद फिर फाइल ठंडे बस्ते में चली गई।
अब उत्तराखंड सरकार के भाषा सचिव विनोद प्रसाद रतूड़ी ने सिंचाई विभाग से झील निर्माण के लिए जानकारी मांगी है। इसके बाद सिंचाई विभाग ने एक बार फिर झील निर्माण के लिए कवायद शुरू कर दी है। देखना दिलचस्प होगा कि ये कवायद कहां तक पहुंचती है। संवाद
यक्षवती नदी भी नहीं हो पाई शुद्ध
पिथौरागढ़। वर्ष 2017 में हरेला सोसाइटी और तत्कालीन डीएम रंजीत कुमार सिन्हा की पहल पर यक्षवती नदी को शुद्ध और पुनर्जीवित करने की कवायद की गई। नदी क्षेत्र में पौधरोपण भी किया गया और नदी में सीवर डालने और अतिक्रमण करने वालों पर चालान की कार्रवाई भी की गई लेकिन डीएम के स्थानांतरण के बाद यह सब किया धरा ठंडे बस्ते में चला गया। संवाद
एडवोकेट मनोज जोशी लंबे समय से कर रहे हैं संघर्ष
पिथौरागढ़। एडवोकेट मनोज जोशी (एमएल) रई झील के निर्माण के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2000 में छात्र राजनीति में आने के बाद कई बार आंदोलन किया। मनोज का कहना है कि रई झील के निर्माण के बाद पिथौरागढ़ नगर की सुंदरता बढ़ेगी। यहां पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी और लोगों को रोजगार भी मिलेगा। अगर रई में झील का निर्माण हो गया तो पिथौरागढ़ नगर नैनीताल से भी अधिक सुंदर दिखेगा। प्रस्तावित रई झील में कोई भी भवन डूब क्षेत्र में नहीं आ रहा है। डूब क्षेत्र में भूमि की रजिस्ट्री भी बंद है। अब बस झील निर्माण के लिए मजबूत इच्छा शक्ति की जरूरत है। संवाद
कोट
रई झील के निर्माण को सर्वे कराने के लिए आईआईटी रुड़की को प्रस्ताव भेजा गया है। झील के निर्माण के लिए सारी जानकारी सचिव भाषा को दे दी गई है। - धीरज जोशी, ईई, सिंचाई विभाग, पिथौरागढ़।
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पिथौरागढ़ के खूबसूरत स्थानों में एक रई क्षेत्र में वर्ष 1990 में डेढ़ किमी लंबी झील के निर्माण के लिए यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने रई झील बनाने की घोषणा की थी। उस समय अलग राज्य के लिए चल रहे आंदोलन के कारण झील का सपना ठंडे बस्ते में चला गया। नौ नवंबर 2000 को यूपी से हटकर उत्तरांचल के अस्तित्व में आने के बाद फिर रई झील के निर्माण की मांग तेज होने लगी। छात्र संगठन सहित कई अन्य संगठनों ने रई झील के लिए आंदोलन किए।
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चुनाव से ठीक पहले पिथौरागढ़ आने वाले हर एक मुख्यमंत्री ने रई झील की घोषणा की। डूब क्षेत्र ज्यादा होने के कारण इसका आकार घटाकर 600 मीटर और अधिकतम चौड़ाई 200 मीटर रखी गई। सिंचाई विभाग ने वर्ष 2013 में 32 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। झील के निर्माण के लिए आईआईटी रुड़की की टीम ने सर्वे भी किया लेकिन झील नहीं बन पाई।
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उत्तराखंड शासन भी आश्वासन तक सीमित रहा
पिथौरागढ़। वर्ष 2013 के बाद से प्रत्येक सीएम पिथौरागढ़ में आयोजित हुई चुनावी जनसभाओं में घोषणा करके चले जाते हैं लेकिन इसे मूर्तरूप देने के लिए किसी ने कोई प्रयास नहीं किए। वर्ष 2017 में पिथौरागढ़ के तत्कालीन डीएम डॉ. रंजीत सिन्हा ने झील निर्माण में आ रही समस्याओं का निराकरण करने की पहल की लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद फिर फाइल ठंडे बस्ते में चली गई।
अब उत्तराखंड सरकार के भाषा सचिव विनोद प्रसाद रतूड़ी ने सिंचाई विभाग से झील निर्माण के लिए जानकारी मांगी है। इसके बाद सिंचाई विभाग ने एक बार फिर झील निर्माण के लिए कवायद शुरू कर दी है। देखना दिलचस्प होगा कि ये कवायद कहां तक पहुंचती है। संवाद
यक्षवती नदी भी नहीं हो पाई शुद्ध
पिथौरागढ़। वर्ष 2017 में हरेला सोसाइटी और तत्कालीन डीएम रंजीत कुमार सिन्हा की पहल पर यक्षवती नदी को शुद्ध और पुनर्जीवित करने की कवायद की गई। नदी क्षेत्र में पौधरोपण भी किया गया और नदी में सीवर डालने और अतिक्रमण करने वालों पर चालान की कार्रवाई भी की गई लेकिन डीएम के स्थानांतरण के बाद यह सब किया धरा ठंडे बस्ते में चला गया। संवाद
एडवोकेट मनोज जोशी लंबे समय से कर रहे हैं संघर्ष
पिथौरागढ़। एडवोकेट मनोज जोशी (एमएल) रई झील के निर्माण के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2000 में छात्र राजनीति में आने के बाद कई बार आंदोलन किया। मनोज का कहना है कि रई झील के निर्माण के बाद पिथौरागढ़ नगर की सुंदरता बढ़ेगी। यहां पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी और लोगों को रोजगार भी मिलेगा। अगर रई में झील का निर्माण हो गया तो पिथौरागढ़ नगर नैनीताल से भी अधिक सुंदर दिखेगा। प्रस्तावित रई झील में कोई भी भवन डूब क्षेत्र में नहीं आ रहा है। डूब क्षेत्र में भूमि की रजिस्ट्री भी बंद है। अब बस झील निर्माण के लिए मजबूत इच्छा शक्ति की जरूरत है। संवाद
कोट
रई झील के निर्माण को सर्वे कराने के लिए आईआईटी रुड़की को प्रस्ताव भेजा गया है। झील के निर्माण के लिए सारी जानकारी सचिव भाषा को दे दी गई है। - धीरज जोशी, ईई, सिंचाई विभाग, पिथौरागढ़।