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सजा काटकर लौटे तो गांव उजड़ा मिला

Sat, 03 Feb 2018 10:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट Updated Sat, 03 Feb 2018 10:25 PM IST
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When the punishment came back, the village got rid
बस्तड़ी गांव में अपने घर पर अकेले रह रहे पुष्कर दत्त भट्ट - फोटो : अमर उजाला

बस्तड़ी निवासी पुष्कर दत्त भट्ट को वर्ष 1999 में किसी मामले में सजा हो गई थी। 18 साल की सजा काटने के बाद जब वह 15 अगस्त 1917 को रिहा होकर घर लौटे तो पूरा गांव उजड़ा हुआ मिला। संयोग से 30 जून 2016 को आई आपदा में पुष्कर दत्त के मकान को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा था, लेकिन सभी लोग गांव छोड़कर दूसरी जगह बस चुके थे।

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52 वर्षीय पुष्कर दत्त ने घर आने के बाद कुछ समय तो अपने रिश्तेदारों के साथ बिताया, लेकिन अक्तूबर में जब बारिश थमने लगी तो उन्होंने सबसे पहले अपने मकान की मरम्मत का बीड़ा उठाया। आपदा से आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकान, खेतों की मरम्मत में उनको लंबा समय लग गया।
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पिछले दिनों पुष्कर दत्त ने तय किया कि अब वह बस्तड़ी गांव में स्थित अपने मकान में ही रहेंगे। उन्होंने मकान में खाने-पीने का सामान रख दिया है। पुष्कर दत्त की पत्नी का देहांत कुछ वर्ष पहले हो गया था। इकलौता बेटा प्राइवेट नौकरी में बाहर है। पुष्कर दत्त ने बताया कि इस बीच उनका अपने बेटे से कोई संपर्क नहीं हुआ।
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वह कहते हैं कि लंबे समय तक किसी के परिवार में मेहमान बनकर रह पाना संभव नहीं है। इसलिए वह अपने पुराने मकान में ही रहने का फैसला ले चुके हैं। बस्तड़ी गांव के सभी 23 आपदा प्रभावित परिवार सिंघाली के पास नए मकान बनाकर रहने लगे हैं। 

नए मकान के लिए प्रयास किया
बस्तड़ी निवासी पुष्कर दत्त भट्ट ने प्रशासन के सामने नए मकान की गुहार लगाई थी, लेकिन अब तक उनको मकान नहीं मिल पाया है। तहसीलदार आईबी मल्ल का कहना है कि पुष्कर दत्त के मामले में दोबारा सर्वे किया जाएगा। कोशिश की जाएगी कि उनको भी मकान के लिए धनराशि मिल जाए।


पुष्कर के साहस की सराहना
जिस बस्तड़ी में आज भी दिन के समय ही जाने में डर लगता है, वहां पर पुष्कर दत्त भट्ट रात के समय भी अकेले रहते हैं। गांव के सामाजिक कार्यकर्ता शंकर दत्त भट्ट का कहना है कि पुष्कर का साहस सराहनीय है। यदि कुछ परिवार गांव में बस जाएं तो हो सकता है कि गांव फिर से गुलजार हो जाए।

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