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Pithoragarh News: हमें हमारी सरकार चाहिए, जिसे बता सकें समस्याएं
Tue, 10 Dec 2024 11:57 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 10 Dec 2024 11:57 PM IST
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पिथौरागढ़। निकायों का कार्यकाल खत्म हुए एक साल से अधिक समय बीत गया है। निकाय प्रशासकों के हवाले हैं। लंबे समय से निकाय चुनाव न होने से स्थानीय सरकार अस्तित्व में नहीं आ सकी है। इससे कई काम अटके हैं। आम जनता को भी कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
भवन कर, व्यवसाय कर, तहबाजारी के तहत लिया जाने वाला टैक्स जमा करने के लिए लोग निकाय कार्यालयों के चक्कर काटने के लिए मजबूर हैं। परिवार रजिस्टर की नकल सहित अन्य दस्तावेजों के लिए भी लोगों को निकाय कार्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है।
जिले के कई निकायों में भवन कर का सही निर्धारण न होने से लोग परेशान हैं और निकाय गठन के बाद बोर्ड बैठक में इस पर विचार किए जाने की आस लगाए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थानीय सरकार न बनने से सभाषद, पार्षद, मेयर नहीं चुने गए हैं। यदि जनता के बीच से जनप्रतिनिधि चुनकर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेंगे तो जनता उनके माध्यम से आसानी से अपनी समस्याएं जिम्मेदारों तक पहुंचा सकती है।
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जनप्रतिनिधियों के दबाव से विकास कार्य भी होंगे। मेयर या पालिकाध्यक्ष भी जनता का प्रतिनिधित्व करता है। उसके माध्यम से जनता की समस्याओं के जल्द समाधान होने की संभावना बढ़ जाती है। अधिकारियों पर भी दबाव रहता है।
स्थानीय सरकार ही नहीं होने से क्षेत्रवासियों की समस्याएं सुनने वाले प्रतिनिधि नहीं हैं। ऐसे में जनता किसे अपनी समस्या बताएगी और लोगों बात जिम्मेदारों तक कौन पहुंचाएगा यह बड़ा सवाल है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र के लोगों की समस्याओं के समाधान और विकास के लिए स्थानीय सरकार बेहद जरूरी है।
बोले स्थानीय लोग
- स्थानीय सरकार होती तो स्थानीय प्रतिनिधि अपने क्षेत्र की समस्याओं को जिम्मेदारों तक पहुंचाते और आम जनता को राहत मिलती। निकाय चुनाव में देरी आम जनता पर भारी पड़ रही है। छोटे-मोटे कामों के लिए भी निकाय कार्यालयों की दौड़ लगानी पड़ रही है। - एडवोकेट आरएस चौहान, अध्यक्ष, बार एसोसिएशन, डीडीहाट।
- निकाय चुनाव नहीं होने से स्थानीय सरकार अस्तित्व में नहीं आ सकी है। इससे आम जनता को रोजमर्रा के कामों के लिए निकाय कार्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है। यदि क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सभासद या पार्षद चुने जाते तो जनता को छोटे-मोटे काम कराने में आसानी होती। - डीएस पांगती, पूर्व प्राचार्य, डायट, डीडीहाट।
- निश्चित तौर पर निकायों का गठन न होने से स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है। राज्य वित्त से होने वाले विकास कार्य अटके हैं। विकास के लिए स्थानीय सरकार जरूरी है। - कमला चुफाल, पूर्व पालिकाध्यक्ष, नगर पालिका, डीडीहाट।
- स्थानीय समस्याओं के समाधान की प्राथमिकता स्थानीय सरकार की होती है। एक स्थानीय जनप्रतिनिधि स्थानीय जनता की समस्याओं से भली-भांति वाकिफ होता है जो इनके समाधान के प्रति उत्तरदायी होता है। - राजेंद्र सिंह रावत, पूर्व पालिकाध्यक्ष, नगर पालिका, पिथौरागढ़।
बोले प्रशासक
क्षेत्र में विकास कार्य हो रहे हैं। नगर में साफ-सफाई दुरुस्त रखने के लिए पालिका गंभीरता से काम कर रही है। जनता की हर समस्या सुनी जा रही है और इनका समाधान किया जा रहा है। - खुशबू पांडे, प्रशासक, नगर पालिका, डीडीहाट।
- निकाय क्षेत्र के लोगों की हर समस्या का समाधान किया जा रहा है। विकास कार्य भी तेजी से हो रहे हैं। जनता की समस्याओं का समाधान कराना प्राथमिकता है। गंगोलीहाट में बॉयलाज के हिसाब के भवन कर का निर्धारण किया जाएगा।
- यशवीर सिंह, प्रशासक, नगर निगम पिथौरागढ़, नगर पालिका गंगोलीहाट।
नगर पालिका में प्रशासक के बैठने से लोग नाखुश
चंपावत/लोहाघाट। जिले में प्रशासकों के पालिका में कार्य संभालने की वजह से लोग परेशान हैं। उनका कहना है कि पालिकाध्यक्ष के माध्यम से उनके काम आसानी से हो जाते थे। मानवीय दृष्टिकोण भी देखा जाता था, लेकिन प्रशासक नियमों की बात करते हैं, ऐसे में उनके काम अटक रहे हैं। छोटे-छोटे कामों के लिए भी उन्हें 10 चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। प्रशासक हर समय कार्यालय में मौजूद नहीं रहते हैं। उन्हें प्रशासन के भी काम देखने होते हैं। ऐसे में कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
कोट
लोहाघाट नगर पालिका में प्रशासक तैनात होने के बाद निरंतर विकास कार्य हो रहे हैं। पालिका में स्वच्छता के लिए नया कूडा वाहन क्रय किया गया है। सीवर मशीन खरीदने के साथ सीवर के निस्तारण के लिए पिथौरागढ़ स्थित एसटीपी से टाइअप किया गया है। पालिका क्षेत्र में यूजर चार्ज लगाकर पालिका की आय बढ़ाने का प्रयास किया है। - रिंकू बिष्ट, प्रशासक, नगर पालिका लोहाघाट
- नगर पालिका में प्रशासक बैठे करीब एक साल से अधिक का समय बीत चुका है। प्रशासक कार्यकाल में नगर की जनता बहुत परेशान है। लोगों को प्रमाणपत्र व अन्य कार्यों के लिए पालिका के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जनहित को देखते हुए जल्द से जल्द पालिका के चुनाव कराए जाने चाहिए। - गोविंद वर्मा, निवर्तमान पालिकाध्यक्ष लोहाघाट
- नगर पालिका लोहाघाट में प्रशासक तैनात होने के बाद उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई। नगर पालिका से किराये पर ली गई उनकी दुकान वर्षों से जीर्णशीर्ण बनी हुई थी। पालिकाध्यक्ष के कार्यकाल में कई बार दुकान सही कराने को कहा गया, लेकिन उनकी मांग नहीं सुनी गई। - भगवान सिंह ढेक, व्यापारी, लोहाघाट
- नगर पालिका में प्रशासक तैनात होने के बाद नगर की सफाई और पथ प्रकाश व्यवस्था चरमरा गई है। नगर में लंबे समय से खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों को बदला नहीं जा रहा है। पालिकाध्यक्ष को लोग खुलकर अपनी समस्याएं बताते थे। प्रशासक के पास जाने में लोग घबराते हैं। - जीवन गहतोड़ी, लोहाघाट
-जब से पालिका में प्रशासक बैठे हैं, तब से काम कराने में दिक्कतें हो रही हैं। छोटे से काम के लिए भी 10 चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इतना सबकुछ होने के बाद भी काम नहीं हो पा रहे हैं। चुनाव कराना जरूरी है ताकि लोगों के काम तो हो सकें। - भगवतशरण राय, व्यापारी, चंपावत।
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भवन कर, व्यवसाय कर, तहबाजारी के तहत लिया जाने वाला टैक्स जमा करने के लिए लोग निकाय कार्यालयों के चक्कर काटने के लिए मजबूर हैं। परिवार रजिस्टर की नकल सहित अन्य दस्तावेजों के लिए भी लोगों को निकाय कार्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है।
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जिले के कई निकायों में भवन कर का सही निर्धारण न होने से लोग परेशान हैं और निकाय गठन के बाद बोर्ड बैठक में इस पर विचार किए जाने की आस लगाए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थानीय सरकार न बनने से सभाषद, पार्षद, मेयर नहीं चुने गए हैं। यदि जनता के बीच से जनप्रतिनिधि चुनकर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेंगे तो जनता उनके माध्यम से आसानी से अपनी समस्याएं जिम्मेदारों तक पहुंचा सकती है।
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जनप्रतिनिधियों के दबाव से विकास कार्य भी होंगे। मेयर या पालिकाध्यक्ष भी जनता का प्रतिनिधित्व करता है। उसके माध्यम से जनता की समस्याओं के जल्द समाधान होने की संभावना बढ़ जाती है। अधिकारियों पर भी दबाव रहता है।
स्थानीय सरकार ही नहीं होने से क्षेत्रवासियों की समस्याएं सुनने वाले प्रतिनिधि नहीं हैं। ऐसे में जनता किसे अपनी समस्या बताएगी और लोगों बात जिम्मेदारों तक कौन पहुंचाएगा यह बड़ा सवाल है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र के लोगों की समस्याओं के समाधान और विकास के लिए स्थानीय सरकार बेहद जरूरी है।
बोले स्थानीय लोग
- स्थानीय सरकार होती तो स्थानीय प्रतिनिधि अपने क्षेत्र की समस्याओं को जिम्मेदारों तक पहुंचाते और आम जनता को राहत मिलती। निकाय चुनाव में देरी आम जनता पर भारी पड़ रही है। छोटे-मोटे कामों के लिए भी निकाय कार्यालयों की दौड़ लगानी पड़ रही है। - एडवोकेट आरएस चौहान, अध्यक्ष, बार एसोसिएशन, डीडीहाट।
- निकाय चुनाव नहीं होने से स्थानीय सरकार अस्तित्व में नहीं आ सकी है। इससे आम जनता को रोजमर्रा के कामों के लिए निकाय कार्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है। यदि क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सभासद या पार्षद चुने जाते तो जनता को छोटे-मोटे काम कराने में आसानी होती। - डीएस पांगती, पूर्व प्राचार्य, डायट, डीडीहाट।
- निश्चित तौर पर निकायों का गठन न होने से स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है। राज्य वित्त से होने वाले विकास कार्य अटके हैं। विकास के लिए स्थानीय सरकार जरूरी है। - कमला चुफाल, पूर्व पालिकाध्यक्ष, नगर पालिका, डीडीहाट।
- स्थानीय समस्याओं के समाधान की प्राथमिकता स्थानीय सरकार की होती है। एक स्थानीय जनप्रतिनिधि स्थानीय जनता की समस्याओं से भली-भांति वाकिफ होता है जो इनके समाधान के प्रति उत्तरदायी होता है। - राजेंद्र सिंह रावत, पूर्व पालिकाध्यक्ष, नगर पालिका, पिथौरागढ़।
बोले प्रशासक
क्षेत्र में विकास कार्य हो रहे हैं। नगर में साफ-सफाई दुरुस्त रखने के लिए पालिका गंभीरता से काम कर रही है। जनता की हर समस्या सुनी जा रही है और इनका समाधान किया जा रहा है। - खुशबू पांडे, प्रशासक, नगर पालिका, डीडीहाट।
- निकाय क्षेत्र के लोगों की हर समस्या का समाधान किया जा रहा है। विकास कार्य भी तेजी से हो रहे हैं। जनता की समस्याओं का समाधान कराना प्राथमिकता है। गंगोलीहाट में बॉयलाज के हिसाब के भवन कर का निर्धारण किया जाएगा।
- यशवीर सिंह, प्रशासक, नगर निगम पिथौरागढ़, नगर पालिका गंगोलीहाट।
नगर पालिका में प्रशासक के बैठने से लोग नाखुश
चंपावत/लोहाघाट। जिले में प्रशासकों के पालिका में कार्य संभालने की वजह से लोग परेशान हैं। उनका कहना है कि पालिकाध्यक्ष के माध्यम से उनके काम आसानी से हो जाते थे। मानवीय दृष्टिकोण भी देखा जाता था, लेकिन प्रशासक नियमों की बात करते हैं, ऐसे में उनके काम अटक रहे हैं। छोटे-छोटे कामों के लिए भी उन्हें 10 चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। प्रशासक हर समय कार्यालय में मौजूद नहीं रहते हैं। उन्हें प्रशासन के भी काम देखने होते हैं। ऐसे में कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
कोट
लोहाघाट नगर पालिका में प्रशासक तैनात होने के बाद निरंतर विकास कार्य हो रहे हैं। पालिका में स्वच्छता के लिए नया कूडा वाहन क्रय किया गया है। सीवर मशीन खरीदने के साथ सीवर के निस्तारण के लिए पिथौरागढ़ स्थित एसटीपी से टाइअप किया गया है। पालिका क्षेत्र में यूजर चार्ज लगाकर पालिका की आय बढ़ाने का प्रयास किया है। - रिंकू बिष्ट, प्रशासक, नगर पालिका लोहाघाट
- नगर पालिका में प्रशासक बैठे करीब एक साल से अधिक का समय बीत चुका है। प्रशासक कार्यकाल में नगर की जनता बहुत परेशान है। लोगों को प्रमाणपत्र व अन्य कार्यों के लिए पालिका के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जनहित को देखते हुए जल्द से जल्द पालिका के चुनाव कराए जाने चाहिए। - गोविंद वर्मा, निवर्तमान पालिकाध्यक्ष लोहाघाट
- नगर पालिका लोहाघाट में प्रशासक तैनात होने के बाद उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई। नगर पालिका से किराये पर ली गई उनकी दुकान वर्षों से जीर्णशीर्ण बनी हुई थी। पालिकाध्यक्ष के कार्यकाल में कई बार दुकान सही कराने को कहा गया, लेकिन उनकी मांग नहीं सुनी गई। - भगवान सिंह ढेक, व्यापारी, लोहाघाट
- नगर पालिका में प्रशासक तैनात होने के बाद नगर की सफाई और पथ प्रकाश व्यवस्था चरमरा गई है। नगर में लंबे समय से खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों को बदला नहीं जा रहा है। पालिकाध्यक्ष को लोग खुलकर अपनी समस्याएं बताते थे। प्रशासक के पास जाने में लोग घबराते हैं। - जीवन गहतोड़ी, लोहाघाट
-जब से पालिका में प्रशासक बैठे हैं, तब से काम कराने में दिक्कतें हो रही हैं। छोटे से काम के लिए भी 10 चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इतना सबकुछ होने के बाद भी काम नहीं हो पा रहे हैं। चुनाव कराना जरूरी है ताकि लोगों के काम तो हो सकें। - भगवतशरण राय, व्यापारी, चंपावत।