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Pithoragarh News: दो साल से लीकेज हो रहा है पानी, धंसने लगी जमीन तो बढ़ गया खतरा

Sat, 07 Mar 2026 10:47 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Sat, 07 Mar 2026 10:47 PM IST
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Water has been leaking for two years, and the danger has increased as the ground begins to sink.
-अस्कोट के खोलिया गांव में लीकेज लाइन से बहता पानी। संवाद
अस्कोट (पिथौरागढ़)। कस्बे के खोलिया गांव में दो साल से लीकेज पेयजल लाइन अब तक ठीक नहीं हो सकी है। पानी के लगातार रिसाव से जमीन धंसने लगी है। इससे खतरा बढ़ गया है। पहाड़ी से मलबा गिरना शुरू हो गया है। इससे नीचे बने पांच मकान खतरे की जद में आ गए हैं। हालात यह हैं कि ये भवन स्वामी अपने भवनों में ठीक से सो भी नहीं पा रहे हैं।
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आईटीआई के लिए बनी पेयजल योजना खोलिया गांव के पास बीते दो साल से लीकेज है। लीकेज लाइन से पानी नाले की तरह बह रहा है, इससे जमीन कमजोर हो गई है। पहाड़ी कमजोर होने से हो रहे भूस्खलन से जगदीश पाल, किरन पाल, तनुज पाल, तुलसी देवी, बिमला देवी के मकान खतरे में आ गए हैं। दरारें पड़ने से खतरा बना हुआ है और इन परिवारों के लोग दहशत में हैं। प्रभावितों ने कहा कि खतरे के डर से वे अपने घरों में रात के समय ठीक से सो भी नहीं पा रहे हैं। ग्राम प्रधान अंकिता पाल ने कहा कहा कि यदि भूस्खलन हुआ तो इससे बड़ी घटना हो सकती है। जल संस्थान ने अपनी लाइन न होने से इसे ठीक करने से हाथ पीछे खींचे हैं तो आईटीआई प्रबंधन बजट न होने का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है।
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ओजपाली में गूल के रिसाव से हुआ था भूस्खलन, युवक की हो गई थी मौत
क्षेत्र के ओजपाली गांव में भी इसी तरह की घटना सामने आई थी। चार महीने पूर्व गूल से पानी के रिसाव के चलते यहां पहाड़ी से भूस्खलन हुआ। ठीक नीचे बने मकान के भीतर मलबा और बोल्डर घुस गए। घटना में मकान के भीतर सो रहे युवक की मलबे में दबने से मौत हो गई।
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कोट
लीकेज लाइन का निरीक्षण किया गया। इस जगह लाइन काफी गहराई में है। इसके ऊपर कंक्रीट डालकर रास्ता बनाया गया है। लाइन शिफ्ट करने में खर्च अधिक होना है। संस्थान के पास इसके लिए धन की कमी है। इसके लिए प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। - कविंद्र सिंह कन्याल, प्रधानाचार्य, आईटीआई, अस्कोट

कोट
लीकेज लाइन से पानी रिसने की सूचना ग्रामीणों ने दी थी। यह पेयजल योजना आईटीआई की है। इसे ठीक करना आईटीआई की जिम्मेदारी है। जल संस्थान ने ग्रामीणों को यह बताया है। - कमल कुमार भट्ट, अपर सहायक अभियंता, जल संस्थान, अस्कोट

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