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उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया त्रिपुरासुंदरी का मेला
ब्यूरो/अमर उजाला, बैतड़ी/झूलाघाट
Updated Tue, 08 Nov 2016 10:48 PM IST
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त्रिपुरासुंदरी मेले में देवी के डोले के आगे नृत्य करतीं महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
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नेपाल के पश्चिमांचल में बैतड़ी जिले का विश्वविख्यात त्रिपुरासुंदरी का मेला मंगलवार को अपार उत्साह और श्रद्धा के साथ संपन्न हो गया। मेले में पहुंचे 3 लाख से ज्यादा लोगों ने माता का आशीर्वाद लिया। दो दिनों तक चले मेले में 200 से अधिक भैंसों और 900 से अधिक बकरों की बलि दी गई। नेपाल के मंदिरों में बलि प्रथा पर कोई रोक नहीं है। मेले में शांति व्यवस्था के लिए नेपाल प्रहरी के 100 से भी अधिक जवान और 2 दर्जन से अधिक हथियार युक्त प्रहरी लगाए गए थे।
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त्रिपुरासुंदरी मंदिर में सुबह तक 20 स्थानों पर हवन और सोमवार की रात्रि में लोगों ने 5 लाख दीये जलाए। उसके बाद मंगलवार सुबह सबसे पहले माता का डोला 9 बजे अपने मायके कापड़ीगांव की ओर ले जाया गया। डोले के साथ नर्तकियां नृत्य करते हुए और देव कन्याएं चंवर हिलाते हुए चल रही थीं। डोले के साथ कई दिनों से उपवास में रहने वाले लोग भूखे-प्यासे हाथों पर त्रिशूल, सोने और चांदी की छड़ें लेकर चलते हैं। कापड़ीगांव में कुछ देर रुकने के बाद डोले के साथ चल रहे लोग परंपराओं के अनुसार भागते हुए मंदिर में आते हैं। वहां से मां भगवती के डोले का सोने-चांदी के आभूषणों के साथ शृंगार करके एक भंडार में ले जाया जाता है। वहां से भगवती के पुजारी सबको आशीर्वाद देते हैं। दोबारा देवी का डोला मंदिर में जाता है। वहां से वापस माता के अस्त्र-शस्त्रों को अगले साल की पूजा तक के लिए भंडारगृह में रख दिया जाता है और पशुओं की बलि शुरू हो जाती है।
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महाकाली अंचल के बैतड़ी जिले में मंगलवार सुबह से ही नेपाल से लगे भारत के गांवों और नेपाल के सैकड़ों गांवों के लोग मंदिर पहुंचने लगे थे। एक किलोमीटर लंबे मेला स्थल में माता का डोला निकलते ही अपार जनसमूह आ गया। मेले में स्थानीय फलों माल्टा, संतरा, अखरोट और केलों की खूब बिक्री हुई। मेले में हाथरस, आगरा और मथुरा से आए मिठाई के व्यापारी मूलचंद, कन्हैयालाल, श्रीराम, ओमप्रकाश ने बताया कि इस वर्ष मेला अन्य वर्षों की तुलना में बहुत अच्छा रहा। महाकाली यातायात समिति ने भारत से आने वाले लोगों के लिए 2 दर्जन से अधिक टैक्सियों को जूलाघाट से लगाया था। मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए नेपाल सरकार के भौतिक योजना एवं पूर्वाधार मंत्री रमेश लेखक, सुदूर पश्चिमी क्षेत्र के डीआईजी विजय कुमार भट्ट, महेंद्रनगर के सांसद बहादुर थापा, महेंद्रनगर के अपर पुलिस अधीक्षक किशोर कुमार दहाल, बैतड़ी के जिलाधिकारी किशोर कुमार चौधरी, बैतड़ी के पुलिस अधीक्षक बाल नर सिंह राणा, युवा समाजसेवी प्रकाश थापा आदि उपस्थित थे।
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मंदिर में चढ़ावा होता है दर्ज
बैतड़ी/झूलाघाट (पिथौरागढ़)। बैतड़ी के त्रिपुरासुंदरी मंदिर में बुजुर्गों द्वारा 85 साल पहले मंदिर में दान देने वाले श्रद्धालुओं द्वारा दी गई रकम को रजिस्टर में लिखने का प्रावधान रखा था, जो आज भी कायम है। रजिस्टर का काम देख रहे मंदिर के पुजारी पद्म चंद ने कहा कि भक्तों द्वारा दी गई 25 रुपए से ऊपर की रकम को रजिस्टर में दर्ज किया जाता है।
मंदिर की फोटोग्राफी पर प्रतिबंध
बैतड़ी/झूलाघाट (पिथौरागढ़)। मेला कमेटी के स्वयंसेवकों ने माता के डोले को कैमरे में कैद नहीं होने दिया। उनका कहना हैं कि मां भगवती की सवारी को कोई भी मोबाइल या कैमरे में कैद न करे। इसका उन्होंने से सख्ती से पालन कराया। कई कैमरामैन को इन स्वयंसेवकों ने मंदिर से बाहर खदेड़ दिया।
मंदिर परिसर में धूम्रपान रहा वर्जित
बैतड़ी/झूलाघाट (पिथौरागढ़)। त्रिपुरासुंदरी मेला कमेटी ने निर्णय लिया था कि मेला परिसर में कोई भी व्यक्ति धूम्रपान न करे। उन्होंने जगह-जगह चेतावनी बोर्ड भी लगाए थे। मेला कमेटी के संयोजक किशन सिंह थापा और लाल सिंह मौनी ने बताया कि मेले के माध्यम से लोगों में नशा विरोधी संदेश भी दिया गया।
झूलाघाट की यातायात व्यवस्था बिगड़ी
झूलाघाट (पिथौरागढ़)। त्रिपुरासुंदरी मेले के कारण भारत से भी सैकड़ों भक्त वाहनोें से झूलाघाट पहुंचे। स्थानीय थाना पुलिस द्वारा यातायात को व्यवस्थित करने के लिए कोई भी व्यवस्था नहीं की गई थी। इस कारण बाजार में कई बार जाम लग गया। बाहर से आए लोगों को अपने वाहनों को निकालने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। व्यापार संघ के पदाधिकारियों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर रोष जताया।