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आबादी में पहुंचते ही महाकाली प्रदूषण का शिकार

Tue, 11 Apr 2017 10:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला Updated Tue, 11 Apr 2017 10:17 PM IST
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Victim of Mahakali pollution as soon as you reach the population
ग्लेशियर से निकलने वाली महाकाली - फोटो : अमर उजाला

महाकाली उन नदियों में से है, जिसका पानी गर्मियों में कम होने के बजाए बढ़ता है। ग्लेशियर से निकलने वाली हर नदी का स्वभाव ऐसा ही होता है। अप्रैल से ग्लेशियरों की बर्फ पिघलने लगती है और नदी का पानी बढ़ जाता है। महाकाली का उद्गम 3600 मीटर की ऊंचाई पर है। कालापानी और लिपिंयाधूरा ग्लेशियर से निकलने के बाद जब यह नदी आगे बढ़ती है तो 50 किलोमीटर तक इसके पानी में गंदगी का नामोनिशान तक नहीं दिखता। जैसे ही नदी आबादी की ओर बढ़ती है तो हर नदी की तरह इसमें में भी कूड़ा, गंदगी, सीवर मिलने लग जाती है।

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तवाघाट तक महाकाली को लगभग साफ माना जाता है। तवाघाट में महाकाली में धौली मिलती है। धौली भी अपने साथ थोड़ा सी गंदगी लेकर आती है। इससे आगे नदी के किनारे कई गांव, बस्तियां, कस्बे हैं। नेपाल की तरफ भी कई गांव महाकाली के किनारे बसे हैं। नदी को गंदा करने में नेपाल के लोग भी कोई कसर नहीं छोड़ते। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गांवों और कस्बों की गंदगी से महाकाली को बचाया जाता तो इसकी पवित्रता पर कोई दाग नहीं लगता।
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यह बात अलग है कि तेज प्रवाह वाली यह नदी अपनी गंदगी को खुद ही साफ करने में सक्षम रहती है, लेकिन इसके तटों, किनारों पर लगातार फैल रही गंदगी को रोकने के लिए कभी कोई कदम नहीं उठाया गया। महाकाली को साफ करने के लिए किसी भी स्तर पर अभियान नहीं चला। जिसका जहां पर बस चला उसने वहीं पर नदी में गंदगी डालने में कसर नहीं छोड़ी। यदि यह सिलसिला बंद नहीं हुआ तो आने वाले समय में महाकाली में फैल रही गंदगी इस महान नदी को लील जाएगी। 
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नदी संरक्षण योजना लागू की जाए
स्थानीय निवासी प्रकाश गुंज्याल का कहना है कि नदी के संरक्षण की योजना लागू होनी चाहिए। इस बात का पूरा ध्यान दिया जाए कि गांवों और बस्तियों की गंदगी किसी भी दशा में नदी में न मिले। नदी में जाने वाली गंदगी को रोकने के लिए पुख्ता प्रबंध होने चाहिए। 

लोगों को जागरूक करने का प्रयास करेंगे
पर्यावरण प्रेमी युवा जीवन ठाकुर का कहना है कि वह लोगों को जागरूक करने का अभियान चलाएंगे। नदी को प्रदूषित करने के लिए लोग ही जिम्मेदार होते हैं। अब यदि लोगों की समझ विकसित हो जाए तो वह नदी का संरक्षण भी करने लगेंगे। यह काम जल्दी शुरू होगा। 


फिलहाल लोगों को सजग करेंगे
तहसीलदार आईबी मल का कहना है कि पहले लोगों को जागरूक किया जाएगा। अभी नदी की सफाई के लिए कोई धन शासन से नहीं मिला है। प्रशासन अपने स्तर से लोगों को सजग करेगा।

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