भूकंपरोधी भवन बनाने की ओर किसी का ध्यान नहीं
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पिथौरागढ़ को भूकंप की दृष्टि से जोन 5 में रखा गया है। नेपाल और तिब्बत से सटे इस इलाके में अक्सर भूकंप के झटके आते रहते हैं लेकिन भूकंपरोधी मकान बनाने के लिए जो गाइड लाइन तय की गई है उसका पालन इस शहर में नहीं हो रहा है। हालांकि भवन का प्लान पास कराते समय भवन स्वामी को बाकायदा यह शपथपत्र देना होता है कि वह भूकंपरोधी मकान के मानकों का पालन करेगा। पर यह मानक पूरे हो रहे हैं या नहीं, इसका निरीक्षण कभी नहीं किया जाता। लोग अपने उपलब्ध संसाधनों और सुविधा के अनुसार ही भवन का ढांचा खड़ा कर देते हैं। अब पिथौरागढ़ को स्मार्ट सिटी बनाने की पहल हो रही है। ऐसे में शहर की सुरक्षा के मानकों पर भी गौर किया जाना जरूरी हो जाएगा। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी डा. आरएस राणा भी स्वीकार करते हैं कि भूकंपरोधी मकानों के निर्माण के प्रति लोग ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे हैं। कई बार तो यह देखा गया है कि लोग पुराने भवन की बुनियाद के ऊपर ही दोमंजिला और तीनमंजिला मकान खड़ा कर देते हैं। डा. राणा ने बताया कि आपदा प्रभावित इलाकों में जो 652 मकान बन रहे हैं उनमें भूकंपरोधी और आपदारोधी मानकों का पूरा पालन हो रहा है। लोग देखादेखी इसी शैली से मकान बनाने की कोशिश भी कर रहे हैं लेकिन शहरी क्षेत्रों में इसका पालन उस अनुपात में नहीं हो रहा है जितना होना चाहिए। पुराने मकानों में तो भूकंपरोधी का कोई पालन नहीं हुआ है।
लोग खुद समझदारी दिखाएं
नगर निवासी अनीता दिगारी का कहना है कि भूकंपरोधी मकानों के निर्माण के लिए लोगों को खुद समझदारी दिखानी चाहिए। किसी के कहने पर या फिर प्रशासन की सख्ती के बाद यह कदम उठाना गलत है। वह मानती हैं कि भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील इस क्षेत्र में भवनों में कम वजन वाली निर्माण सामग्री लगाई जाए।
लोगों को सजग करने की जरूरत
बैंककर्मी संजय पाटनी का कहना है कि भूकंपरोधी मकान बनाने के लिए लोगों को सजग करने की जरूरत है। लोग भवन बनाते समय लागत तो उतनी ही लगाते हैं लेकिन सुरक्षा के मानकों का ध्यान देने में कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आता। वह कहते हैं कि भूकंपरोधी मकान बनाने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाए।
पुराने मकानों में कैसे होगा पालन
नगर निवासी सुरेश कुमार जोशी कहते हैं कि पुराने मकानों में कैसे भूकंपरोधी मानकों का पालन किया जाएगा यह सोचने वाला विषय है। हजारों मकान पहले बन चुके हैं। नए मकानों में तो दिशा निर्देशों का पालन हो सकता है। पुराने मकानों में सुरक्षा के लिए कुछ व्यवस्था की जाए और हर मकान मालिक उसका पालन करे।
ईंट, सरिया से बढ़ता है वजन
नगर निवासी नवीन खर्कवाल का कहना है कि अब लोग मकानों में ईंट, सरिया, सीमेंट, रोड़ी, बजरी का बहुत ज्यादा प्रयोग करने लगे हैं। इससे मकान का वजन बढ़ जाता है। पहले गांवों में लोग पत्थर की दीवार लगाते थे और छत पर टिन या लकड़ी डाल देते थे। ऐसे मकानों में भूकंप का खतरा बहुत कम रहता था।