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काॅफी, सुरती देकर ले रहे हैं तिब्बती सामान
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला
Updated Tue, 09 Oct 2018 10:52 PM IST
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तिब्बती मंडी में रखा व्यापारियों का सामान
- फोटो : अमर उजाला
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भारत-चीन व्यापार अपने अंतिम चरण पर पहुंच गया हैं। 31 अक्तूबर को व्यापार समाप्त हो जाएगा। तिब्बत में खेतीबाड़ी का सीजन समाप्त होने के कारण व्यापार में अब तेजी आई है। व्यापारी पुरांग मंडी स्थित बाजार में आने लगे हैं।
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भारतीय व्यापारी दिनेश गुंज्याल ने तिब्बत से फोन पर बताया कि तिब्बती लोग अब खरीदारी में तेजी दिखा रहे हैं। चीन से ऊन, याक की पूंछ, छिरबी, तिब्बती चाय, कंबल, रेडीमेड कपडे़, चीनी जूते सहित अन्य सामानों की खरीदारी भारतीय व्यापारियोें ने की है। चीनी ग्राहकों ने कॉफी, अल्युमीनियम के बर्तन, रेडीमेड कपड़े, सुरती, माचिस, टॉफियां कास्मेटिक्स के सामान की खरीददारी की है।
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वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और ट्रेड सहायक पीएस कुटियाल ने बताया कि अब भी 95 सहायक, 51 व्यापारियों सहित 146 लोग चीन में हैं। अब तक 44 लाख 21 हजार 690 रुपये का आयात और 89 लाख 14 हजार 10 रुपये का निर्यात हुआ है। व्यापार की समाप्ति तक आयात में भारी इजाफा प्रति वर्ष देखा गया है।
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नजंग का रास्ता खराब होने से व्यापारी चिंतित
धारचूला। इस वर्ष लखनपुर और नजंग के बीच रास्ता खराब होने से व्यापारियों को भारी परेशानियां हुईं। व्यापारियों का सामान नजंग, बूंदी, गर्ब्यांग में फंसा रहा। अब भारतीय व्यापारियों को गुंजी से धारचूला सामान लाने की चिंता सता रही है। व्यास घाटी को जोड़ने वाला पैदल मार्ग अब तक नहीं बन सका है। इस कारण पारंपरिक माइग्रेशन करने वाले व्यास घाटी के सात और मित्र राष्ट्र नेपाल के दो गांवों के लोग निराश हैं।