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पिथौरागढ़ के तीन युवाओं का सीडीएस में धमाल

Fri, 18 May 2018 11:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Fri, 18 May 2018 11:08 PM IST
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Three youths of Pithoragarh are injured in CDS
विवेक थरकोटी - फोटो : अमर उजाला

जिले के तीन होनहार युवाओं ने देश की प्रतिष्ठित सीडीएस (कंबाइंड डिफेंस सर्विस) में कमाल कर दिखाया है। पिथौरागढ़ के विवेक थरकोटी ने इस परीक्षा में देश भर में पहली रैंक हासिल की है, जबकि पिथौरागढ़ के ही पवन बिष्ट ने 16वीं और आशीष ने 82वीं रैंकिंग हासिल की है। छोटे गांवों के बाशिंदे और सामान्य पृष्ठभूमि वाले इन युवाओं ने फिर साबित कर दिखाया कि प्रतिभा सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। तीनों युवा पहली जुलाई से देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी में प्रशिक्षण लेंगे।

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इस वर्ष देश की प्रतिष्ठित सीडीएस परीक्षा में पिथौरागढ़ सिरमौर बना है। जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर एक छोटे से गांव लेलू के विवेक थरकोटी ने इस परीक्षा में देेश भर में पहला स्थान प्राप्त किया है। विवेक ने प्रारंभिक शिक्षा वड्डा कस्बे के विश्व भारती पब्लिक स्कूल से हासिल की। एशियन एकेडमी से आठवीं और घोड़ाखाल सैनिक स्कूल से इंटरमीडिएट पास किया। पिथौरागढ़ महाविद्यालय से बीएससी और एमए किया। विवेक के पिता श्याम सिंह बैंक कर्मी, जबकि मां निर्मला शिक्षिका हैं। पिथौरागढ़ के ही पवन बिष्ट ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में देशभर में 16वीं रैंक हासिल की है।
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पवन वड्डा कस्बे के पास एक छोटे से गांव आगर के रहने वाले हैं। प्रारंभिक शिक्षा पुलिस लाइन स्थित बीयरशिवा स्कूल में हुई। महाविद्यालय से बीएससी की। पवन के पिता गोपाल सिंह असम राइफल्स में तैनात हैं, जबकि मां ललिता गृहणी हैं। पिथौरागढ़ के ही तीसरे युवा आशीष शर्मा ने परीक्षा में 82वीं रैंक हासिल की है। आशीष मुख्यालय से चार किमी दूर विण गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने हाईस्कूल तक शिक्षा महर्षि विद्या मंदिर से ली। फिर बीसी जोशी आर्मी स्कूल से इंटरमीडिएट किया। महाविद्यालय से बीएससी करने के बाद सैन्य विज्ञान में एमए कर रहे हैं। आशीष के पिता कमलेश शर्मा सीआरपीएफ में तैनात हैं, जबकि मां कविता गृहणी हैं।
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कड़ी मेहनत के बूते पाया मुकाम 
इन युवाओं ने कड़ी मेहनत के बूते पर यह मुकाम हासिल किया है। इन्होंने बचपन से ही सेना का हिस्सा बनने की ठान ली थी। अपने इस सपने को साकार करने के लिए जी-तोड़ मेहनत की। सुविधाओं की कमी और सामान्य पृष्ठभूमि उनकी राह में रोड़ा नहीं बन पाई। आखिरकार उन्होंने साबित किया कि मेहनत से ही सफलता पाई जा सकती है। अमर उजाला ने इन युवाओं से फोन पर बातचीत की और सफलता के बारे में जाना। युवाओं का कहना है कि इरादे पक्के हो और पूरी मेहनत के साथ लक्ष्य की ओर बढ़ा जाए तो कामयाबी मिलनी निश्चित है।

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