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सीमांत के गांव खाली होना सुरक्षा के लिए खतरा
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Tue, 06 Oct 2015 10:15 PM IST
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गांव बचाओ’ यात्रा मंगलवार को डीडीहाट पहुंची। यहां मुख्य चौराहे पर हुई नुक्कड़ सभा में यात्रा के संयोजक पद्मश्री डा. अनिल जोशी ने कहा कि सीमांत के गांवों का खाली होना सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। सरकार को यह आभास तक नहीं है कि सीमांत में रहने वाले लोग देश के असली प्रहरी होते हैं। उन्होंने कहा कि शहरों और कस्बों के नजदीक के गांव तो खाली हो ही रहे हैं, लेकिन राज्य गठन के बाद भी सरकार कोई ऐसी नीति तैयार नहीं कर पाई कि सीमांत के गांव आबाद हो सकें।
उन्होंने कहा कि सीमांत के कई इलाके नो मेंस लैंड में बदलते जा रहे हैं। पिथौरागढ़ जिले के सीमांत इलाकों में यह समस्या हाल के वर्षों में गंभीर रूप से सामने आई है। राज्य गठन के 15 साल बाद भी सरकार कोई ऐसी नीति और सीमांत के गांवों के लिए सुविधा नहीं जुटा पाई कि लोग अपने गांव में रुक सकें। पिछले 15 साल में गांवों से शहरों की ओर पलायन तेजी से बढ़ा है। राज्य गठन के समय सिर्फ एक ही धारणा थी कि दूरदराज के गांवों तक शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार की सुविधा पहुंचे, लेकिन अब तक सत्ता का सुख भोगने वाली किसी भी पार्टी ने इस धारणा को समझने की कोशिश नहीं की। डा. जोशी का कहना है कि गांव बचाने के लिए गांव के लोगों को ही संगठित होना पड़ेगा। उनके स्वागत के लिए यहां नगर पंचायत अध्यक्ष कवींद्र शाही, प्रकाश सिंह, मान सिंह समेत तमाम लोग उपस्थित थे। यात्रा अब ओगला, अस्कोट, जौलजीबी होते हुए धारचूला को रवाना हो गई।
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उन्होंने कहा कि सीमांत के कई इलाके नो मेंस लैंड में बदलते जा रहे हैं। पिथौरागढ़ जिले के सीमांत इलाकों में यह समस्या हाल के वर्षों में गंभीर रूप से सामने आई है। राज्य गठन के 15 साल बाद भी सरकार कोई ऐसी नीति और सीमांत के गांवों के लिए सुविधा नहीं जुटा पाई कि लोग अपने गांव में रुक सकें। पिछले 15 साल में गांवों से शहरों की ओर पलायन तेजी से बढ़ा है। राज्य गठन के समय सिर्फ एक ही धारणा थी कि दूरदराज के गांवों तक शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार की सुविधा पहुंचे, लेकिन अब तक सत्ता का सुख भोगने वाली किसी भी पार्टी ने इस धारणा को समझने की कोशिश नहीं की। डा. जोशी का कहना है कि गांव बचाने के लिए गांव के लोगों को ही संगठित होना पड़ेगा। उनके स्वागत के लिए यहां नगर पंचायत अध्यक्ष कवींद्र शाही, प्रकाश सिंह, मान सिंह समेत तमाम लोग उपस्थित थे। यात्रा अब ओगला, अस्कोट, जौलजीबी होते हुए धारचूला को रवाना हो गई।
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