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इस बार समय से पहले पहुंच गए जलकॉक
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
Updated Tue, 01 Nov 2016 10:34 PM IST
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रामगंगा से मछली पकड़ने का प्रयास करता जलकाक
- फोटो : अमर उजाला
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आमतौर पर 15 नवंबर के बाद नजर आने वाला जलकॉक इस बार पहले ही यहां पहुंच गए हैं। ग्रेट कारमोरेंट नाम से जाना जाने वाला यह पक्षी अक्सर नदी के किनारे रहता है और मछलियों का शिकार करता है। यह मछली पकड़ने के लिए नदी में पांच मिनट तक रह जाता है। करीब साढ़े पांच किलो वजन का यह खूबसूरत पक्षी जब नदी में कूद लगाता है तो वह नजारा देखने लायक होता है।
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जलकॉक तिब्बत के ठंडे इलाकों में पाया जाता है। जब ठंड बढ़ने लगती है तो यह हजारों किलोमीटर का सफर तय कर थल में रामगंगा के किनारे डेरा जमा लेते हैं। इन पक्षियों पर शिकारियों की नजर भी रहती है। वन विभाग ने इनकी सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।
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रामगंगा के किनारे इन दिनों 50-60 जलकॉक नजर आ रहे हैं। यह मछली पकड़ने के लिए मुवानी से लेकर रिगूनिया तक चक्कर काटते रहते हैं। मछलियां खाने के बाद यह नदी के किनारे पंख फैलाकर धूप सेंकने लगते हैं। स्थानीय लोगों के लिए यह बेहद जिज्ञासा वाले पक्षी हैं। इनकी खूबसूरती देखने लायक होती है। अब मार्च तक जलकॉक यहां रहेंगे। इस दौरान यह मछलियों का शिकार करेंगे। जानकारों का कहना है कि जलकॉक इस इलाके में 1980 के बाद ही नजर आए थे। शुरुआत में दो पक्षी यहां पहुंचे। अगले साल यह संख्या पांच हो गई। 2015 में करीब 35 पक्षी यहां पहुंचे थे। इस बार यह संख्या 50 तक पहुंच गई है। लोगों का कहना है कि अगले सालों में यह संख्या और बढ़ जाएगी।
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