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यह बेहूदा मजाक मेरे साथ क्यों
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Thu, 02 Jun 2016 10:23 PM IST
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विधायक मयूख महर
- फोटो : अमर उजाला
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विधायक मयूख महर ने हाल ही में दिये गए योजना आयोग के उपाध्यक्ष पद और सीमांत क्षेत्र अनुश्रवण समिति के अध्यक्ष पद ठुकरा दिए हैं। मुख्यमंत्री हरीश रावत को पत्र लिख कर मयूख ने चुन-चुन कर सवाल उठाये हैं। उन्होंने पत्र में कहा है कि वह पिथौरागढ़ के विकास के लिए की गई घोषणाओं को पूरा करा दें, यह उनके लिए कैबिनेट मंत्री के पद के समान होगा। महर ने राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष पद को बेहूदा मजाक करार दिया है।
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मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 31 मई को विधायक मयूख महर को राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष और सीमांत क्षेत्र विकास अनुश्रवण समिति अध्यक्ष के पद से नवाजा था। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में मयूख ने कहा है कि यदि सरकार 11 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव में मतदान के लिए माहौल बनाना चाहती है तो कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने के लिए मुझे प्रभावित करने की कोई जरूरत नहीं है। मयूख हरदा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहने वालों में शुमार किये जाने वाले विधायकों में गिने जाते हैं। अब मयूख ने यह दोनों पद ठुकराकर मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए ऐसा संकट खड़ा कर दिया है जो जितना दिख रहा है, उससे कहीं अधिक गहरा है।
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दायित्व को ठुकराना मयूख के लिए नया नहीं है। इससे पहले राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष पद को ही मयूख ने ताक पर रखा हुआ था। 2014 में रावत के मुख्यमंत्री बनने के सात महीने बाद ही मयूख क्षेत्र के विकास के मुद्दों को लेकर धरने पर बैठ गए थे। उस समय मयूख ने कहा था कि क्षेत्र का प्रतिनिधि होने के नाते क्षेत्र की समस्याओं को उठाना उनका अधिकार है। इतना होने पर भी मयूख ने कभी हरीश रावत का साथ नहीं छोड़ा।
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मयूख ने ये उठाये सवाल...
-जब चार साल पहले वह तत्कालीन मुख्यमंत्री के इस तरह के अनुरोध को अस्वीकार कर चुके हैं तो आज पुन: यह प्रस्ताव उनके सामने क्यों रखा?
-जब भारत सरकार ने योजना आयोग का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया है तो इस प्रस्ताव का क्या औचित्य है।