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अपनी माटी से दूर होने को तैयार नहीं महिलाएं

Tue, 26 Jul 2016 10:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बस्तड़ी/डीडीहाट
ब्यूरो/अमर उजाला, बस्तड़ी/डीडीहाट Updated Tue, 26 Jul 2016 10:39 PM IST
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The women refused to be away from your soil
बस्तड़ी - फोटो : अमर उजाला

बस्तड़ी में 30 जून की तबाही के बाद लोगों ने अब अपने भविष्य के बारे में सोचना शुरू कर दिया है। लोगों की मजबूत इच्छाशक्ति को देखकर तो यही लगता है कि एक नया बस्तड़ी जरूर अस्तित्व में आएगा, लेकिन लोग नए बस्तड़ी में सुरक्षा की पूरी गारंटी चाहते हैं। महिलाएं तो अपनी माटी से दूर होने को कतई तैयार नहीं हैं। पुरुष तो काम के लिए बाहर जाते रहते हैं, लेकिन महिलाओं के सामने समस्या यह है कि वह नई जगह में न तो समाज को विकसित कर पाएंगी और न उनको अपने पास-पड़ोस जैसा अपनापन ही मिलेगा।

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महिलाओं की राय में प्रकृति ने चाहे गांव के साथ बेहद क्रूरता बरती है, लेकिन वह कहती हैं कि गांव के पास ही सुरक्षित स्थान पर फिर से नया बस्तड़ी बसाया जाए। महिलाओं ने अपने जीवन के सारे सुख-दुख इसी माटी में झेले हैं। उनके खेत, खलिहान, रिश्ते, नाते सब इसी के आसपास हैं। महिलाओं का कहना है कि मूल बस्तड़ी में तो अब रहने लायक स्थितियां नहीं हैं, लेकिन यदि आसपास की नई जगह पर उनकी व्यवस्था हो तो इस बिखराव को पाटा जा सकता है।
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संपन्नता की राह दी थी बस्तड़ी ने
बस्तड़ी निवासी रमा भट्ट ने आपदा में देवर और देवरानी को खोया है। वह कहती हैं कि बस्तड़ी ने सभी लोगों को संपन्नता की राह दी थी। इस उपजाऊ माटी ने लोगों को आजीविका के स्रोत दिए थे। वह कहती हैं कि दूसरी जगह रह पाना संभव नहीं है। नए स्थान पर बस्तड़ी गांव को बसाने के प्रयास किए जाने चाहिए। 
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इस जगह को छोड़कर कहां जाएंगे
बस्तड़ी निवासी रंजना भट्ट कहती हैं कि इलाके को छोड़कर कहां जाएंगे। आपदा के बाद सिंघाली कस्बे के लोगों ने जिस तरह की मदद की, उसे भूला नहीं जा सकता। वह कहती हैं कि सिंघाली के पास बस्तड़ी गांव के लोगों की जमीन है। उसमें फिर से यह गांव बसाया जा सकता है। इसके लिए कोशिश की जाए। 

इसी माटी में बिता दिए 70 वर्ष
बस्तड़ी निवासी मंगला देवी 89 वर्ष की हैं। वह 19 वर्ष में शादी होकर बस्तड़ी गांव आ गई थी। वह कहती हैं कि जिस माटी में जीवन के 70 वर्ष बिताए हों उसे कैसे छोड़ा जा सकता है। वह कहती हैं कि प्रकृति ने गांव को तबाह कर दिया था, लेकिन जो बचे हुए हैं, उनको नए सिरे से सोचना होगा। बस्तड़ी फिर से बस जाए।


सुविधा और सुरक्षा दी जाए
बस्तड़ी निवासी कमला भट्ट का कहना है कि सरकार अब गांव के लोगों को सुविधा और सुरक्षा दे। लोग अपने जंगल, रिश्तेदारों को नहीं छोड़ सकते। सुरक्षित स्थान पर मकान बनाने का काम जल्दी शुरू होना चाहिए, यदि सरकार सुरक्षा देती है तो बस्तड़ी के लोगों का भय दूर होगा और वह सुकून से जी सकेंगे। 

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