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49 वर्षों का संघर्ष फिर भी सीमांत के हाथ खाली

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jul 2020 10:33 PM IST
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The struggle of 49 years still left the hands of the frontier
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ महाविद्यालय को अलग विश्वविद्यालय बनाने की 49 साल पुरानी मांग एक बार फिर धरी रह गई। कुमाऊं विश्वविद्यालय के दो हिस्सों में बंटने के बाद अब पिथौरागढ़ महाविद्यालय सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा से संबद्ध होगा। इससे सीमांत में निराशा है।
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पिथौरागढ़ महाविद्यालय की स्थापना 1963 में हुई थी। उस समय यह महाविद्यालय आगरा से संबद्ध था। 1972 में सीमांत में अलग विश्वविद्यालय के लिए बड़ा आंदोलन चला था। 15 दिसंबर 1972 के आंदोलन के दौरान पिथौरागढ़ मुख्यालय में पुलिस ने छात्रों पर गोलियां चलाई थी, जिसमें छात्र नेता सज्जन लाल साह और एक नेपाल मजदूर सोबन सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी।
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इन्हीं के बलिदान के कारण 1972 में अविभाजित उत्तर प्रदेश में आगरा विश्वविद्यालय से अलग उत्तराखंड में कुमाऊं और गढ़वाल विश्वविद्यालय की स्थापना की हुई। इसमें भी पिथौरागढ़ को कोई फायदा नहीं मिला। 48 साल बाद पिछले वर्ष 2019 में छात्र संघ ने अलग विश्वविद्यालय की मांग को लेकर लंबा आंदोलन चलाया था, उस समय उम्मीद की जा रही थी कि शासन प्रशासन इस जिले की भौगोलिक स्थिति और छात्र संख्या को देखते हुए अलग विश्वविद्यालय बनाने की पहल करेगा लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई पैरवी नहीं होने के कारण सीमांत के हाथ फिर खाली रह गए।
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पूर्व में अलग विश्वविद्यालय की मांग को लेकर संघर्ष कर चुके पूर्व छात्र नेताओं का कहना है कि मात्र 60 किलोमीटर की दूरी में दो विश्वविद्यालय बना दिए गए, लेकिन चीन और नेपाल सीमा से लगे पिथौरागढ़ जिले के छात्रों की सुविधा के विषय में नहीं सोचा गया। पूर्व छात्र नेताओं का कहना है कि अल्मोड़ा को विश्वविद्यालय बना देने से पिथौरागढ़ के छात्रों को कोई भी सुविधा नहीं मिलेगी।
अल्मोड़ा में पहले से कैंपस है। वहां पर लॉ की सुविधा है। इसके बावजूद अल्मोड़ा को विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया। पिथौरागढ़ जिले के छात्र-छात्राओं के लिए निराश करने वाला फैसला है। पिथौरागढ़ को सीमांत विश्वविद्यालय स्थापित करने को लेकर संघर्ष जारी रहेगा। - भगवान रावत, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष एवं जनमंच के संयोजक।
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अलग विश्वविद्यालय की मांग को लेकर लंबा आंदोलन चलाया था। चार दशक पूर्व दो लोग इस मांग को लेकर शहादत दे चुके हैं। ल्मोड़ा में पहले से कैंपस और आवासीय विश्वविद्यालय है। सीमांत पिथौरागढ़ की शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए विश्वविद्यालय स्थापित किया जाना जरूरी है। -राकेश जोशी, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष।

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विश्वविद्यालय सुविधाजनक स्थल पर बनाना चाहिए था। पिथौरागढ़ में विश्वविद्यालय की स्थापना होने से न केवल पिथौरागढ़ बल्कि चंपावत जिले के छात्रों को भी सुविधा मिलती। अल्मोड़ा में अलग विश्वविद्यालय बनाने से घोर निराशा हुई है। आगे भी अलग विश्वविद्यालय को लेकर संघर्ष जारी रहेगा।
- महेंद्र रावत, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष।
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