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जिस गधेरे का पानी पी रहे, उसी में गिर रहा सीवर

Thu, 23 Mar 2017 10:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Thu, 23 Mar 2017 10:18 PM IST
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The seawater falling in the water of the man who is drinking the water
पिथौरागढ़ के रई नाले में पटा कूड़ा। - फोटो : अमर उजाला
गंगा और नदी, नालों को प्रदूषण मुक्त करने को लेकर आए उत्तराखंड हाइकोर्ट के फैसले के बाद सरकारी तंत्र की सक्रियता बढ़ रही हैं। जिला प्रशासन ने गंगा, नदी, नालों को गंदा करने वालों को चिह्नित करने के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं लेकिन सरकारी महकमों की वर्षों की सुस्ती अभियान को तत्काल पंख लगाएगी, ऐसा संभव नहीं है।
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पिथौरागढ़ नगर के नाले, गधेरे बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। शहर के लोग जिस रई गधेरे का पानी पीते है उसे गधेरे में सीवर की गंदगी डाली जा रही है। इस बात को जल संस्थान भी स्वीकार कर रहा है।
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हाइकोर्ट के फैसले पर अमल की दिशा में डीएम ने गंदगी फैलाने वाले तत्वों का पता लगाकर जुर्माना वसूलने के साथ ही वैधानिक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सीसीटीवी का प्रयोग करने के लिए कहा गया है। वर्तमान हालात यह हैं कि पिथौरागढ़ नगर में ही कई नाले बहते हैं।
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जो गंदगी से पटे रहते हैं। कूड़ा उठाने की उचित व्यवस्था न होने के कारण घरों की सारी गंदगी इन नालों में जाती है। सबसे बुरे हालात रई गधेरे के हैं और रई गधेरे का साफ न रहना लोगों की जिदंगी पर भारी पड़ सकता है। क्योंकि इस नाले में सीवर की गंदगी डाले जाने की बात सामने आ रही है। रई गधेरे का पानी लिफ्ट कर शहर के कई इलाकों में वितरित किया जाता है। 

जल संस्थान के अधिकारियों को भी सीवर की गंदगी डाले जाने की बात मालूम है लेकिन इस दिशा में कोई कदम अब तक नहीं उठे हैं। जल संस्थान के ईई आरके वर्मा ने माना है कि रई गधेरे में सीवर की गंदगी डाली जा रही है। ईई कहते हैं कि रई क्षेत्र में सीवरेज की व्यवस्था न होने से लोग सीवर की गंदगी नाले में डाल देते हैं।


इससे पानी प्रदूषित हो रहा है। ईई कहते हैं कि सिवरेज की गंदगी डालने वालों को चिह्नित किया जा रहा है। उनके खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी। जिले में रामगंगा, सरयू, महाकाली, गोरी, धौली, भुजगड़ आदि नदियां बहती हैं। सारी नदियां, गधेरे प्रदूषण की चपेट में हैं। खुले में शौच की समस्या इन नदियों को नुकसान पहुंचा रही है। 
 
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