{"_id":"63026b203ab0cf56ea47716e","slug":"the-road-became-difficult-due-to-the-breaking-of-the-bridge-pithoragarh-news-hld473058291","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुल टूटने से राह हुई मुश्किल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुल टूटने से राह हुई मुश्किल
विज्ञापन
बंगापानी तहसील के ग्राम पंचायत मेतली में स्कूली बच्चों को इस तरह जान जोखिम में डालकर आवाजाही करन?
- फोटो : PITHORAGARH
बंगापानी (पिथौरागढ़)। पुल ध्वस्त होने से तहसील के दूरस्थ गांव के मेतली ग्राम पंचायत के लोग और स्कूली बच्चे सात किमी पैदल चलने के लिए मजबूर हैं। लोगों को गांव तक जरूरी सामान ले जाने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
वर्ष 2019 में आई आपदा में ग्राम पंचायत योजना से सिलिंगगाड़ और दोगड़ीगाड़ में बने आरसीसी पुल ध्वस्त हो गए थे। इस कारण ग्राम पंचायत की एक हजार से अधिक की आबादी की आवाजाही मुश्किल हो गई थी। तब से लोग सात किमी पैदल चलने के लिए मजबूर हैं। करीब तीन साल बाद भी ग्राम पंचायत के देवलेख, भटबटा, कुमैर्या गैर, बत्थी, दोगड़ा के 25 स्कूली छात्र राजकीय जूनियर हाईस्कूल मेतली सात किमी पैदल चलकर जाते हैं।
रास्ते इतने जोखिम भरे कि जरा सा पैर फिसलते ही बड़ा हादसा हो सकता है। मेतली के पूर्व प्रधान पुष्कर सिंह परिहार ने बताया कि पुल निर्माण के लिए जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख, विधायक, प्रशासन को पत्र दिया है। पुल नहीं होने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
वर्ष 2019 में दोनों पुल ताश के पत्ते की तरह बह गए थे लेकिन इतना समय बीतने के बावजूद इन पुलों का निर्माण नहीं हो सका है जिस कारण आवाजाही में दिक्कत होती है। -जगत सिंह परिहार, भटबटा।
आरसीसी पुल बहने के कारण पिछले तीन साल से मुश्किल हालातों में जीवन जी रहे हैं। स्कूली बच्चे भी जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। पुल बन जाता तो बड़ी राहत मिलती। -भूपेंद्र सिंह परिहार, देवलेख।
विज्ञापन
वर्ष 2019 में आई आपदा में ग्राम पंचायत योजना से सिलिंगगाड़ और दोगड़ीगाड़ में बने आरसीसी पुल ध्वस्त हो गए थे। इस कारण ग्राम पंचायत की एक हजार से अधिक की आबादी की आवाजाही मुश्किल हो गई थी। तब से लोग सात किमी पैदल चलने के लिए मजबूर हैं। करीब तीन साल बाद भी ग्राम पंचायत के देवलेख, भटबटा, कुमैर्या गैर, बत्थी, दोगड़ा के 25 स्कूली छात्र राजकीय जूनियर हाईस्कूल मेतली सात किमी पैदल चलकर जाते हैं।
विज्ञापन
रास्ते इतने जोखिम भरे कि जरा सा पैर फिसलते ही बड़ा हादसा हो सकता है। मेतली के पूर्व प्रधान पुष्कर सिंह परिहार ने बताया कि पुल निर्माण के लिए जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख, विधायक, प्रशासन को पत्र दिया है। पुल नहीं होने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
वर्ष 2019 में दोनों पुल ताश के पत्ते की तरह बह गए थे लेकिन इतना समय बीतने के बावजूद इन पुलों का निर्माण नहीं हो सका है जिस कारण आवाजाही में दिक्कत होती है। -जगत सिंह परिहार, भटबटा।
आरसीसी पुल बहने के कारण पिछले तीन साल से मुश्किल हालातों में जीवन जी रहे हैं। स्कूली बच्चे भी जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। पुल बन जाता तो बड़ी राहत मिलती। -भूपेंद्र सिंह परिहार, देवलेख।