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मेतली और जाराजिबली गांवों में मलबे में दफन हुई दो महिलाएं
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नदी का प्रवाह रुकने से झील बनने के बाद नदी का रुख बगीचाबगड़ गांव की ओर हो गया और पूरे गांव के घर आंग?
- फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ जिले के बंगापानी तहसील में बारिश ने सोमवार की रात फिर तबाही मचाई। बरम क्षेत्र के मेतली और जाराजिबली गांवों में दो महिलाएं मलबे में दब गईं। इनमें मेतली निवासी राधा देवी पत्नी श्याम सिंह की मौत हो गई। उसके शव को मंगलवार की सुबह ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद मलबे से निकाला।
वहीं, जाराजिबली निवासी हीरा देवी (42) पत्नी कुशल सिंह मंगलवार की रात घर के बाहर बने बाथरूम में गई थी। इसी दौरान वह ऊपरी हिस्से से गिरे मलबे में दब गई। मंगलवार सुबह से ही ग्रामीणों ने हीरा देवी को ढूंढने का काफी प्रयास किया लेकिन समाचार लिखे जाने तक उसका पता नहीं चल पाया था। बता दें कि पिछले एक हफ्ते में बंगापानी तहसील में आई अलग-अलग आपदाओं में मलबे में दबने से अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी जबकि टांगा गांव के दो लोगों समेत तीन अब भी लापता हैं।
मेतली गांव के ऊपर पहाड़ी से जबरदस्त भूस्खलन से जौलजीबी-मुनस्यारी सड़क पर चामी नामक स्थान पर बना लोहे का पुल भी बह गया। इससे बंगापानी और सेराघाट के बीच का भी संपर्क कट गया। बरम में भी एक बेली ब्रिज गिरने की कगार पर है। मलबे के कारण गोरी नदी का प्रवाह रुकने से नदी में झील बन गई और पानी के साथ मलबा बगीचागांव में घुस गया। यहां के ग्रामीणों ने सुरक्षित स्थानों पर जाकर अपनी जान बचाई। नदी में बहने और मलबे में दबने से क्षेत्र के सैकड़ों मवेशी मर गए हैं। लुम्ती सहित कुछ अन्य गांवों में लोग फंसे हुए हैं। डीएम के निर्देश पर फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थान पर लाने के लिए आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के साथ ही कुमाऊं स्काउट के जवान भी क्षेत्र में भेज दिए गए हैं।
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मोरी गांव में भी बारिश ने भारी तबाही मचाई है। गांव में तीन मकान और लगभग आधा दर्जन वाहन नदी में बह गए। गलातीगाड़ के बढ़ते जल स्तर के कारण धामी गांव का संपर्क मुख्यालय से कट गया है। भूस्खलन से गलाती के सीपू खेड़ा के 12 मकान जद में आ गए। गलाती गाड़, भन गाड़ और रीठ गाड़ का अस्थायी पुल भी बह गया है। धारचूला में 11वीं वाहिनी एसएसबी कैंप के पास भू कटाव से कैंप खतरे की जद में आ गया है।
मोरी गांव में तीन मकान और आधा दर्जन वाहन नदी में बहे
पिथौरागढ़। मोरी गांव में भी बारिश ने भारी तबाही मचाई है। गांव में तीन मकान और लगभग आधा दर्जन वाहन नदी में बह गए। सड़क के पुल बहने और सड़क पर जगह-जगह मलबा आने से खोज बचाव के लिए जा रही एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें भी मौके पर समय से नहीं पहुंच सकीं। खोज बचाव दल सात घंटे बाद मोरी गांव पहुंचा। धारचूला के धामीगांव और सीपू खेड़ा में भी बारिश ने नुकसान पहुंचाया है। विधायक हरीश धामी ने पैदल ही आपदा प्रभावित गांवों में जाकर प्रभावितों का हाल जाना। मुनस्यारी और जौलजीबी दोनों ओर से मुख्य सड़क का संपर्क कटने और अन्य संपर्क मार्गों के बंद होने से लगभग एक हजार लोग गांवों में फंसे हैं। क्षेत्रीय विधायक हरीश धामी ने उनकी मदद के लिए सेना को क्षेत्र में भेजने की मांग की है।
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वहीं, जाराजिबली निवासी हीरा देवी (42) पत्नी कुशल सिंह मंगलवार की रात घर के बाहर बने बाथरूम में गई थी। इसी दौरान वह ऊपरी हिस्से से गिरे मलबे में दब गई। मंगलवार सुबह से ही ग्रामीणों ने हीरा देवी को ढूंढने का काफी प्रयास किया लेकिन समाचार लिखे जाने तक उसका पता नहीं चल पाया था। बता दें कि पिछले एक हफ्ते में बंगापानी तहसील में आई अलग-अलग आपदाओं में मलबे में दबने से अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी जबकि टांगा गांव के दो लोगों समेत तीन अब भी लापता हैं।
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मेतली गांव के ऊपर पहाड़ी से जबरदस्त भूस्खलन से जौलजीबी-मुनस्यारी सड़क पर चामी नामक स्थान पर बना लोहे का पुल भी बह गया। इससे बंगापानी और सेराघाट के बीच का भी संपर्क कट गया। बरम में भी एक बेली ब्रिज गिरने की कगार पर है। मलबे के कारण गोरी नदी का प्रवाह रुकने से नदी में झील बन गई और पानी के साथ मलबा बगीचागांव में घुस गया। यहां के ग्रामीणों ने सुरक्षित स्थानों पर जाकर अपनी जान बचाई। नदी में बहने और मलबे में दबने से क्षेत्र के सैकड़ों मवेशी मर गए हैं। लुम्ती सहित कुछ अन्य गांवों में लोग फंसे हुए हैं। डीएम के निर्देश पर फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थान पर लाने के लिए आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के साथ ही कुमाऊं स्काउट के जवान भी क्षेत्र में भेज दिए गए हैं।
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मोरी गांव में भी बारिश ने भारी तबाही मचाई है। गांव में तीन मकान और लगभग आधा दर्जन वाहन नदी में बह गए। गलातीगाड़ के बढ़ते जल स्तर के कारण धामी गांव का संपर्क मुख्यालय से कट गया है। भूस्खलन से गलाती के सीपू खेड़ा के 12 मकान जद में आ गए। गलाती गाड़, भन गाड़ और रीठ गाड़ का अस्थायी पुल भी बह गया है। धारचूला में 11वीं वाहिनी एसएसबी कैंप के पास भू कटाव से कैंप खतरे की जद में आ गया है।
मोरी गांव में तीन मकान और आधा दर्जन वाहन नदी में बहे
पिथौरागढ़। मोरी गांव में भी बारिश ने भारी तबाही मचाई है। गांव में तीन मकान और लगभग आधा दर्जन वाहन नदी में बह गए। सड़क के पुल बहने और सड़क पर जगह-जगह मलबा आने से खोज बचाव के लिए जा रही एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें भी मौके पर समय से नहीं पहुंच सकीं। खोज बचाव दल सात घंटे बाद मोरी गांव पहुंचा। धारचूला के धामीगांव और सीपू खेड़ा में भी बारिश ने नुकसान पहुंचाया है। विधायक हरीश धामी ने पैदल ही आपदा प्रभावित गांवों में जाकर प्रभावितों का हाल जाना। मुनस्यारी और जौलजीबी दोनों ओर से मुख्य सड़क का संपर्क कटने और अन्य संपर्क मार्गों के बंद होने से लगभग एक हजार लोग गांवों में फंसे हैं। क्षेत्रीय विधायक हरीश धामी ने उनकी मदद के लिए सेना को क्षेत्र में भेजने की मांग की है।

धारचूला के गलाती में इस स्थान पर मकान खतरे की जद में आ गए हैं।- फोटो : PITHORAGARH

बंगापानी तहसील के मोरी गांव में मलबे से तबाह घर। संवाद- फोटो : PITHORAGARH