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दानवीर कर्ण के जीवन से हुए रूबरू
Sun, 31 Mar 2019 11:38 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन
अमर उजाला ब्यूरो, पिथौरागढ़।
अमर उजाला ब्यूरो, पिथौरागढ़।
Published by: बृजमोहन बृजमोहन
Updated Sun, 31 Mar 2019 11:38 PM IST
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पिथौरागढ़ में चल रहे नाट्य उत्सव में कर्णभारम नाटक की प्रस्तुति देते कलाकार।
- फोटो : AMAR UJALA
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भाव राग ताल नाट्य अकादमी की ओर से आयोजित पांच दिनी नाट्य महोत्सव के चौथे दिन महाभारत के पात्र कर्ण के जीवन पर आधारित महाकवि भास लिखित नाटक कर्णभारम की सुंदर प्रस्तुति दी। चौथे दिन के कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने किया।
मध्यप्रदेश से आए इंद्रवती नाट्य समिति के कलाकारों ने नाटक में कर्ण के महर्षि परशुराम से धनुर्विद्या सीखने का वृत्तांत दिखाया। परशुराम केवल ब्राह्मणों को शस्त्र विद्या सिखाते थे। उन्हें जब पता चलता है कि कर्ण ब्राह्मण नहीं हैं तो वह कर्ण को विद्या भूल जाने का श्राप देते हैं। नाटक में कर्ण की दानवीरता, अर्जुन से लड़ाई का सुंदर मंचन किया गया। निर्देशक नीरज कुंदेर, रोशनी प्रसाद मिश्र के नेतृत्व में कलाकार नरेंद्र बहादुर सिंह, प्रणीत कुमार, साकेत, शिवनारायण, रजनीश, संतोष, करुणा, दीप्ति, पवन, राजा, मनीष, मयंक, अंबर, अजीज, सुनैना, उपेंद्र, पुष्पेंद्र मिश्रा ने सजीव अभिनय किया। नाट्य अकादमी के निर्देशक कैलाश कुमार ने सहयोग के लिए सभी का आभार जताया। संचालन विप्लव भट्ट ने किया।
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मध्यप्रदेश से आए इंद्रवती नाट्य समिति के कलाकारों ने नाटक में कर्ण के महर्षि परशुराम से धनुर्विद्या सीखने का वृत्तांत दिखाया। परशुराम केवल ब्राह्मणों को शस्त्र विद्या सिखाते थे। उन्हें जब पता चलता है कि कर्ण ब्राह्मण नहीं हैं तो वह कर्ण को विद्या भूल जाने का श्राप देते हैं। नाटक में कर्ण की दानवीरता, अर्जुन से लड़ाई का सुंदर मंचन किया गया। निर्देशक नीरज कुंदेर, रोशनी प्रसाद मिश्र के नेतृत्व में कलाकार नरेंद्र बहादुर सिंह, प्रणीत कुमार, साकेत, शिवनारायण, रजनीश, संतोष, करुणा, दीप्ति, पवन, राजा, मनीष, मयंक, अंबर, अजीज, सुनैना, उपेंद्र, पुष्पेंद्र मिश्रा ने सजीव अभिनय किया। नाट्य अकादमी के निर्देशक कैलाश कुमार ने सहयोग के लिए सभी का आभार जताया। संचालन विप्लव भट्ट ने किया।
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