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Pithoragarh News: डिजिटल युग की कड़वी हकीकत... पहाड़ी पर चढ़ कर अपनों से बात करते हैं चामा के ग्रामीण
Thu, 19 Mar 2026 11:29 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 19 Mar 2026 11:29 PM IST
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डीडीहाट (पिथौरागढ़)। कहने को हम डिजिटल इंडिया और 5जी के दौर में जी रहे हैं लेकिन सीमांत जिला पिथौरागढ़ के ग्राम सभा चामा की हकीकत कुछ और ही बयां करती है। यहां आज भी ग्रामीणों को अपनों से हैलो कहने के लिए घर की दहलीज नहीं बल्कि एक किलोमीटर दूर ऊंची पहाड़ी चढ़नी पड़ती है।
डीडीहाट विकासखंड के अति दुर्गम गांव चामा में संचार सुविधा बेहतर करने के उद्देश्य से साल 2024 में बीएसएनएल ने मोबाइल टावर तो स्थापित किया लेकिन यह टावर ग्रामीणों के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है। आलम यह है कि टावर लगने के बावजूद इसके सिग्नल एक किलोमीटर का दायरा भी कवर नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीण घंटों घरों से बाहर निकलकर मोबाइल में सिग्नल आने का इंतजार करते हैं।
नेटवर्क न होने का सबसे बुरा असर छात्रों और आपातकालीन सेवाओं पर पड़ रहा है। स्कूली बच्चों को ऑनलाइन क्लास लेने या पढ़ाई से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए एक किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पार करनी पड़ती है। परिजनों से बात करने के लिए ग्रामीण आज भी दूसरे ऊंचे स्थानों पर जाकर नेटवर्क तलाशने को मजबूर हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि उनकी इस बुनियादी समस्या की ओर शासन-प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है, जिससे वे खुद को विकास की दौड़ में पिछड़ा महसूस कर रहे हैं।
कोट
- क्षेत्र में लगा टावर किसी काम का नहीं है। हमने कई बार बीएसएनएल के अधिकारियों को पत्र लिखकर सिग्नल की क्षमता बढ़ाने की मांग की लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब हमारे पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। - फकीर चौहान, ग्रामीण, चामा
- चामा जैसे दुर्गम क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी की समस्या हमारे संज्ञान में है। कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के लिए जल्द ही बीएसएनएल के उच्चाधिकारियों से वार्ता कर समाधान निकाला जाएगा। - खुशबू पांडे, एसडीएम, डीडीहाट
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डीडीहाट विकासखंड के अति दुर्गम गांव चामा में संचार सुविधा बेहतर करने के उद्देश्य से साल 2024 में बीएसएनएल ने मोबाइल टावर तो स्थापित किया लेकिन यह टावर ग्रामीणों के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है। आलम यह है कि टावर लगने के बावजूद इसके सिग्नल एक किलोमीटर का दायरा भी कवर नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीण घंटों घरों से बाहर निकलकर मोबाइल में सिग्नल आने का इंतजार करते हैं।
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नेटवर्क न होने का सबसे बुरा असर छात्रों और आपातकालीन सेवाओं पर पड़ रहा है। स्कूली बच्चों को ऑनलाइन क्लास लेने या पढ़ाई से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए एक किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पार करनी पड़ती है। परिजनों से बात करने के लिए ग्रामीण आज भी दूसरे ऊंचे स्थानों पर जाकर नेटवर्क तलाशने को मजबूर हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि उनकी इस बुनियादी समस्या की ओर शासन-प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है, जिससे वे खुद को विकास की दौड़ में पिछड़ा महसूस कर रहे हैं।
कोट
- क्षेत्र में लगा टावर किसी काम का नहीं है। हमने कई बार बीएसएनएल के अधिकारियों को पत्र लिखकर सिग्नल की क्षमता बढ़ाने की मांग की लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब हमारे पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। - फकीर चौहान, ग्रामीण, चामा
- चामा जैसे दुर्गम क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी की समस्या हमारे संज्ञान में है। कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के लिए जल्द ही बीएसएनएल के उच्चाधिकारियों से वार्ता कर समाधान निकाला जाएगा। - खुशबू पांडे, एसडीएम, डीडीहाट