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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   The flower prematurely Pyoli

समय से पहले प्योली का फूल खिला

Sun, 01 Jan 2017 10:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
ब्यूरो/अमर उजाला, थल Updated Sun, 01 Jan 2017 10:26 PM IST
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The flower prematurely Pyoli
थल घाटी में समय से पहले खिला प्योली का फूल - फोटो : अमर उजाला

आमतौर पर वसंत पंचमी के दौरान छटा बिखरने वाला प्योली का फूल इस बार समय से पहले ही खिल गया है। वसंत पंचमी दो फरवरी को है, लेकिन प्योली के फूल दिसंबर के अंत से ही खिलने लगे थे। इस समय थल घाटी में कई स्थानों पर प्योली खिल चुकी है। करीब 1800 मीटर की ऊंचाई तक पाए जाने वाले प्योली के फूलों को वसंत पंचमी के मौके पर खासतौर पर उपयोग में लाया जाता है। प्योली के फूलों से ही वसंत पंचमी पर पूजन को शुभ माना जाता है।

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प्योली का बाटनिकल नाम रेनवासिया इंडिका है। एकदम पीले रंग का यह फूल जब खिलता है तो इसकी छटा दूर तक फैल जाती है। छोटे से आकार वाले इस फूल में चार या पांच पंखुड़ियां होती हैं। इस फूल में किसी प्रकार की कोई खुशबू नहीं होती। इसके गाढ़े पीले रंग का उपयोग रंग बनाने में भी किया जाता है। आयुर्वेद चिकित्सक एमडी डा. नवीन जोशी का कहना है कि प्योली के फूलों की पंखुड़ियों को पीसकर घावों में लगाने से घाव जल्दी भर जाता है। प्योली को बकरियां बेहद पसंद करती हैं, क्योंकि इसके फूलों में मिठास बहुत होती है।
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वहीं, समय से पहले प्योली के खिलने के बारे में जानकारों का कहना है कि अब पहाड़ के मौसम में लगातार बदलाव आ रहा है। इस कारण प्योली, बुरांश जैसे फूल समय से पहले खिलने लगे हैं। आयुर्वेद चिकित्सक डा. जोशी का कहना है कि प्योली अक्सर ठंड की समाप्ति और गर्मी की शुरुआत में ही खिलता है। वसंत पंचमी से पहाड़ पर मौसम बदलने लगता है, ठीक उसी समय प्योली खिलता है, लेकिन इस बार दिसंबर में तापमान बढ़ने से प्योली समय से पहले ही खिल गई। 

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