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उतारूं राज के कपड़े, बनाऊं भेष मुनियों का...
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Fri, 10 Nov 2017 10:19 PM IST
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पंडा की रामलीला में कैकेई-मंथरा संवाद
- फोटो : अमर उजाला
जिला मुख्यालय के नजदीक पंडा की रामलीला में पांचवें दिन मंथरा-कैकेई संवाद, राम, लक्ष्मण, सीता का वनवास को जाना और भरत मिलाप का मंचन किया गया। राम के वनवास जाने की लीला को देखने के लिए काफी संख्या में दर्शक मौजूद थे।
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बृहस्पतिवार रात पंडा की रामलीला में भगवान राम पिता दशरथ द्वारा माता कैकेई को दिए गए वचनों को पूरा करने के लिए लक्ष्मण और सीता के साथ वन को प्रस्थान करते हैं। वनवास को जाने से पहले राम, लक्ष्मण और सीता राजवंश के कपड़ों को उतारकर मुनियों का भेष धारण कर कहते हैं-उतारूं राज के कपड़े, बनाऊं भेष मुनियों का। राजवंश के सारे सुख को छोड़कर राम, लक्ष्मण और सीता के वन को प्रस्थान करने के मार्मिक दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। इधर, भरत माता कैकेई से मिलने कैकेई भवन पहुंचते हैं।
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भरत और कैकेई के बीच राम को मनाकर वापस अयोध्या बुलाने का संवाद होता है। भरत कौशल्या समेत सभी अयोध्यावासी श्रीराम को मनाने जाते हैं। सभी लोग भगवान राम से अयोध्या लौटकर राजपाठ संभालने का आग्रह करते हैं, लेकिन श्रीराम पिता दशरथ द्वारा मां कैकेई को दिए वचन को पूरा करने की बात कहकर अयोध्या लौटने से मना कर देते हैं।
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भरत श्रीराम के खड़ाऊ को सिर पर रखकर अयोध्या लौट आते हैं। मुख्य अतिथि भाजपा के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र वल्दिया, भाजयुमो के प्रदेश उपाध्यक्ष बसंत जोशी, गणेश भंडारी, ललित मोहन भट्ट थे। राम का अभिनय नीरज भट्ट, सीता का अभिषेक जोशी, लक्ष्मण का नीरज बिष्ट और भरत का अभिनय चंदन भट्ट कर रहे हैं। रामलीला के आयोजन में पंडा के प्रधान भूपेंद्र बिष्ट, अजय रावत, मनीष बिष्ट, दीपक बिष्ट, मनोहर बिष्ट, भूपेंद्र रावल सहयोग दे रहे हैं।