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गोल्फा के पूर्व प्रधान की जड़ी-बूटी उगाने की मुहिम शुरू

Thu, 29 Jun 2017 10:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मदकोट
ब्यूरो/अमर उजाला, मदकोट Updated Thu, 29 Jun 2017 10:25 PM IST
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The campaign to start the herb of the former head of golf
गोल्फा गांव में जड़ीबूटी की खेती की तैयारी करते स्थानीय लोग - फोटो : अमर उजाला

दस किलोमीटर के कठिन पैदल रास्ते पर पड़ने वाले गोल्फा गांव के पूर्व प्रधान बाला सिंह को यकीन है कि गांव छोड़कर जा चुके 80 परिवार एक बार फिर गांव लौटेंगे। उन्होंने गांव की खाली पड़ी जमीन पर जड़ी-बूटी उगाना शुरू कर दिया है। इस बगीचे को मोदी गार्डन नाम दिया गया है। बाला सिंह का कहना है कि गोल्फा गांव की जलवायु में हिमालयी जड़ी-बूटियां आसानी से पैदा की जा सकती हैं। यदि गांव में जड़ी-बूटी का बेहतर ढंग से उत्पादन होने लगेगा तो गांव छोड़कर जा चुके लोग फिर से वापसी करने लगेंगे।

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गोल्फा गांव में पहले 120 परिवार रहते थे। राज्य गठन के बाद जब हालातों में कोई बदलाव नहीं आया तो भारी असुविधाओं से तंग आकर 80 परिवारों ने गांव छोड़ दिया। किसी समय में चहल-पहल से भरे इस गांव में अब वीरानी सी है। कुछ गरीब परिवार और उनमें ज्यादातर बुजुर्ग ही गांव में रहते हैं। गांव से सड़क तक पहुंचने के लिए दस किलोमीटर का पैदल सफर तय करना पड़ता है। गांव में आलू, राजमा तो पैदा होता है, लेकिन यातायात की सुविधा न होने से वह गांव में ही खराब हो जाता है। इलाज के लिए लोगों को 150 किलोमीटर की दूरी तय कर जिला अस्पताल जाना पड़ता है। यही नहीं गांव को जोड़ने वाला एकमात्र पैदल पुल 2013 की आपदा की भेंट चढ़ गया था, लेकिन उसके स्थान पर नया पुल नहीं बना।
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गांव के पूर्व प्रधान बाला सिंह कहते हैं कि गांव छोड़कर जाना समस्या का समाधान नहीं हो सकता। इसके बदले में गांव की जमीन पर जड़ी-बूटी और अन्य प्रकार के पौधों के रोपण का काम उन्होंने शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि जड़ी-बूटी की फसल छह महीने में तैयार हो जाती है। यह नकदी फसल है। यदि लोगों की जेब में पैसा आने लगे तो लोग गांव छोड़ने की नहीं सोचेंगे। उनको यकीन है कि जो लोग गांव छोड़कर जा चुके हैं वह भी वापस लौटने लगेंगे। उनका सहयोग दीवान सिंह गोर्खा, केदार सिंह कोरंगा, रुद्र सिंह कोरंगा, दरपान सिंह, पुष्कर सिंह, मोहन सिंह, भवान सिंह राणा समेत अन्य लोग कर रहे हैं। फिलहाल इस बगीचे में धूप जड़ी, काला जीरा, जम्बू, गंद्रायण, बड़ी इलायची के पौधे रोपे गए हैं। 

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