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ट्यूलिप से महका पातलथौड़ और खलिया
Fri, 12 Apr 2019 11:16 PM IST
kamlesh kamlesh
ब्यूरो/ अमर उजाला , डीडीहाट(पिथौरागढ़)।
ब्यूरो/ अमर उजाला , डीडीहाट(पिथौरागढ़)।
Published by: kamlesh kamlesh
Updated Fri, 12 Apr 2019 11:16 PM IST
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मुनस:यारी में खिला ट्यूलिप।
- फोटो : पिथौरागढ़
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हिमनगरी मुनस्यारी शीघ्र ही ट्यूलिप की खुशबू से महकेगी। वन विभाग की और से पातलथौड़ और खलिया टॉप में विकसित की गई नर्सरी में इन दिनों ट्यूलिप के आकर्षक रंग-बिरंगे फूल खिले हैं। शीघ्र ही नर्सरी का विकास कर इन फूलों को औद्यानिकी से जुड़े काश्तकारों को उपलब्ध कराया जाएगा।
वर्ष 2018 में उच्च हिमालयी क्षेत्र में पाई जाने वाली बहुमूल्य प्रजाति की जड़ीबूटियों धूप, गुग्गुल, मेयल, कुश, कुटकी, अतीस, ब्रह्मकमल, पुष्कर मूल को संकटग्रस्त और लुप्त प्राय पाया गया था। वन अनुसंधान केंद्र ने इनके संरक्षण और संवर्द्धन के लिए जैव विविधता से परिपूर्ण खलिया टॉप का चयन किया। वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने खलिया और पातलथौड़ क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का विस्तृत अध्ययन किया। उनके प्रयासों से कश्मीर घाटी में होने वाले विदेशी प्रजाति के ट्यूलिप फूल की नर्सरी तैयार की गई।
केंद्र के रिसर्च रेंजर पर्वतीय क्षेत्र नैनीताल केआर टम्टा ने बताया कि नर्सरी में लगाया गए ट्यूलिप पुष्प सफल हो गए हैं। इन दिनों ट्यूलिप के आकर्षक फूल खिले हुए हैं। उन्होंने बताया कि अब नर्सरी का विकास किया जाएगा और व्यापक स्तर पर ट्यूलिप के पौधों का रोपण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ट्यूलिप से हिमनगरी में पर्यटकों का आकर्षण तो बढ़ेगा ही साथ ही क्षेत्र की औद्यानिकी को भी नई पहचान मिलेगी। उनका कहना है कि ट्यूलिप भविष्य में यहां के काश्तकारों की आर्थिकी बढ़ाने में भी बेहद कारगर होगा।
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वर्ष 2018 में उच्च हिमालयी क्षेत्र में पाई जाने वाली बहुमूल्य प्रजाति की जड़ीबूटियों धूप, गुग्गुल, मेयल, कुश, कुटकी, अतीस, ब्रह्मकमल, पुष्कर मूल को संकटग्रस्त और लुप्त प्राय पाया गया था। वन अनुसंधान केंद्र ने इनके संरक्षण और संवर्द्धन के लिए जैव विविधता से परिपूर्ण खलिया टॉप का चयन किया। वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने खलिया और पातलथौड़ क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का विस्तृत अध्ययन किया। उनके प्रयासों से कश्मीर घाटी में होने वाले विदेशी प्रजाति के ट्यूलिप फूल की नर्सरी तैयार की गई।
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केंद्र के रिसर्च रेंजर पर्वतीय क्षेत्र नैनीताल केआर टम्टा ने बताया कि नर्सरी में लगाया गए ट्यूलिप पुष्प सफल हो गए हैं। इन दिनों ट्यूलिप के आकर्षक फूल खिले हुए हैं। उन्होंने बताया कि अब नर्सरी का विकास किया जाएगा और व्यापक स्तर पर ट्यूलिप के पौधों का रोपण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ट्यूलिप से हिमनगरी में पर्यटकों का आकर्षण तो बढ़ेगा ही साथ ही क्षेत्र की औद्यानिकी को भी नई पहचान मिलेगी। उनका कहना है कि ट्यूलिप भविष्य में यहां के काश्तकारों की आर्थिकी बढ़ाने में भी बेहद कारगर होगा।
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