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यारसागंबू का वैज्ञानिक तरीके से दोहन जरूरी
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला
Updated Sun, 16 Apr 2017 10:27 PM IST
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धारचूला में लोगों को यारसागंबू के प्रति जागरूक करते शोधछात्र
- फोटो : अमर उजाला
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राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय पिथौरागढ़ के जंतु विज्ञान विषय के शोधछात्र प्रदीप शर्मा और नरेंद्र सिंह ने कहा कि यारसागंबू के दोहन के लिए वैज्ञानिक तरीका अपनाया जाना जरूरी है। जिस तरह यारसागंबू के दोहन के लिए होड़ मची रहती है, वह एकदम गलत है। गांव के लोगों को खुद सजग होना पड़ेगा। वर्ना कुछ वर्षों में यह बेशकीमती लार्वा पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
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यारसागंबू के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए यहां आयोजित कार्यशाला में दोनों शोधछात्रों ने कहा कि अब लोगों को इसके संरक्षण के लिए खुद आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि गांव के लोगों को चाहिए कि वह अपने स्तर से ही यारसागंबू के दोहन का नियम तैयार करें। पिछले कई वर्षों के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए शोधछात्रों ने कहा कि यारसागंबू का उत्पादन कम होना भविष्य के लिए खतरे का संकेत है। पिथौरागढ़ कॉलेज के जंतु विज्ञान विषय के विभागाध्यक्ष डा. सीएस नेगी के निर्देशन में यारसागंबू पर शोधप्रबंध तैयार कर रहे प्रदीप और नरेंद्र ने कहा कि जागरूकता अभियान शोधकार्य का प्रमुख हिस्सा है। लोग यारसागंबू के प्रति जितना संवेदनशील रहेंगे, उनको उतना ही लाभ होगा। मुनस्यारी विकासखंड के गांवों में जागरूकता अभियान चलाने के बाद अब धारचूला विकासखंड में यह अभियान चलाया जा रहा है।
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कार्यशाला में कृषि अधिकारी चंद्र प्रकाश गौतम, सरपंच शंकर सीपाल, रूकपति देवी, प्रधान सरिता देवी, पुष्पा देवी, सनम देवी, ऊषा कुटियाल सहित कई लोग उपस्थित थे। दल के लोगों ने बताया कि अब दर, बोंगलिंग, तेजम आदि गांवों में जाकर ग्रामीणों को जानकारी देंगे।
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