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बयान से नाराज आंदोलनकारी छात्रों ने फूंका प्रदेश के मुख्यमंत्री का पुतला
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पिथौरागढ़ में मुख्यमंत्री का पुतला दहन करते छात्र। अमर उजाला
- फोटो : PITHORAGARH
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एलएसएम पीजी कालेज पिथौरागढ़ में शिक्षक-पुस्तक आंदोलन 33वें दिन भी जारी रहा। मुख्यमंत्री के बयान से नाराज आंदोलनकारी छात्रों ने पुतला फूंक दिया। छात्रों ने कहा कि मुख्यमंत्री उन्हें पढ़ने की नसीहत दे रहे हैं, जबकि महाविद्यालय शिक्षक और पुस्तकों की कमी से जूझ रहा है। कहा कि बिना शिक्षकों और पुस्तकों के गरीब छात्र किस तरह पढ़ेंगे मुख्यमंत्री को इस बारे में भी सोचना चाहिए।
शनिवार को छात्र संघ अध्यक्ष राकेश जोशी के नेतृत्व में छात्र-छात्राओं ने धरना दिया। धरना स्थल पर हुई सभा में आंदोलनकारी छात्रों ने कहा कि सीमांत का महाविद्यालय शिक्षक-पुस्तक सहित तमाम समस्याओं से जूझ रहा है। आंदोलन को एक माह बीतने के बाद भी समस्याओं के स्थायी समाधान के बजाय बयानबाजी की जा रही है। इसके बाद छात्रों ने परिसर में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का पुतला फूंका।
छात्रों ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री महाविद्यालय के पुस्तकालय में एक लाख दस हजार पुस्तकें होने की बात कह रहे हैं, जबकि यह पुस्तकें आउट ऑफ सिलेबस हो चुकी हैं। इन पुस्तकों को पढ़कर गरीब घरों के छात्र कैसे परीक्षा देंगे यह सोचनीय बात है। सात हजार की छात्र संख्या वाले महाविद्यालय की समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलन तोड़ने की कोशिशें हो रही हैं। एक ओर सरकार पहाड़ से पलायन रोकने के लिए नीति बनाने की बात कह रही है दूसरी ओर उच्च शिक्षा के यह हाल हैं। शिक्षा के लिए लगातार युवा वर्ग जनपद से बाहर पलायन कर रहा है। कहा कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता है आंदोलन जारी रखा जाएगा। इस अवसर पर दीपक, नूतन, अभिषेक, शुभम आदि छात्र-छात्राएं शामिल थे।
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शनिवार को छात्र संघ अध्यक्ष राकेश जोशी के नेतृत्व में छात्र-छात्राओं ने धरना दिया। धरना स्थल पर हुई सभा में आंदोलनकारी छात्रों ने कहा कि सीमांत का महाविद्यालय शिक्षक-पुस्तक सहित तमाम समस्याओं से जूझ रहा है। आंदोलन को एक माह बीतने के बाद भी समस्याओं के स्थायी समाधान के बजाय बयानबाजी की जा रही है। इसके बाद छात्रों ने परिसर में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का पुतला फूंका।
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छात्रों ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री महाविद्यालय के पुस्तकालय में एक लाख दस हजार पुस्तकें होने की बात कह रहे हैं, जबकि यह पुस्तकें आउट ऑफ सिलेबस हो चुकी हैं। इन पुस्तकों को पढ़कर गरीब घरों के छात्र कैसे परीक्षा देंगे यह सोचनीय बात है। सात हजार की छात्र संख्या वाले महाविद्यालय की समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलन तोड़ने की कोशिशें हो रही हैं। एक ओर सरकार पहाड़ से पलायन रोकने के लिए नीति बनाने की बात कह रही है दूसरी ओर उच्च शिक्षा के यह हाल हैं। शिक्षा के लिए लगातार युवा वर्ग जनपद से बाहर पलायन कर रहा है। कहा कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता है आंदोलन जारी रखा जाएगा। इस अवसर पर दीपक, नूतन, अभिषेक, शुभम आदि छात्र-छात्राएं शामिल थे।
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