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कैडर सचिवों की कलमबंद हड़ताल शुरू
अमर उजाला ब्यूूूूराे पिथौरागढ़।
Updated Mon, 19 Feb 2018 10:23 PM IST
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एक अस्पताल में बिना डॉक्टर के खाली पड़ी कुर्सी
- फोटो : Amar Ujala
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साधन सहकारी समितियों में कार्यरत कैडर सचिवों ने सोमवार से कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी है। कैडर सचिवों की कलमबंद हड़ताल से 64 साधन समितियों में ताले लग गए हैं। कैडर सचिव, आंकिक और सुपरवाइजर को मिलाकर 100 से ज्यादा कर्मचारी हड़ताल पर हैं। हड़ताल के कारण किसानों को कर्ज का वितरण, कर्ज की वसूली, उर्वरकों का वितरण जैसे काम ठप पड़ गए हैं।
साधन समिति सचिव परिषद के अध्यक्ष ईश्वर सिंह वल्दिया और उपाध्यक्ष शेखर जोशी ने बताया कि देहरादून के परेड मैदान में पांच फरवरी से कैडर सचिव धरने पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि कैडर सचिवों की सेवा का सरकारीकरण करने, एक जनवरी 2016 से सभी सचिवों को सातवें वेतनमान का लाभ देने, सचिवों का ग्रेड पे 2800 रुपये करने, आंकिक पद पर कार्यरत कर्मचारियों का जिला कैडर बनाने की मांग को लेकर यह आंदोलन चलाया जा रहा है। सरकार ने इन मुद्दों को हल करने के लिए सिर्फ आश्वासन दिए हैं लेकिन अब तक उसका लाभ कर्मचारियों को नहीं मिला है। सचिवों ने बैठक की और आंदोलन की रणनीति तय की। वित्तीय वर्ष की समाप्ति के समय हो रही इस हड़ताल का व्यापक असर पड़ने की संभावना है। बैठक में ललिता खत्री, दीपक भट्ट, भगत सिंह धामी, कमान सिंह, कृष्ण कुमार, योगेश जोशी, कृष्ण सिंह पिंगल, त्रिलोक सिंह पंवार, हरीश राम आदि मौजूद थे।
इधर, चंपावत में तीन सूत्री मांगों को लेकर साधन सहकारी समितियों के कैडर सचिवों ने सोमवार से बेमियादी कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी है। साधन सहाकारी समिति के कैडर सचिवों की हड़ताल के समर्थन में समिति कर्मचारी संगठन भी उतर आया है तथा उसने भी कैडर सचिवों के आंदोलन में शामिल होने का ऐलान किया है। कैडर सचिवों का कहना है कि संगठन की ओर से पांच फरवरी को कलमबंद हड़ताल का अंतिम नोटिस विभाग को भेजा गया था। किंतु नोटिस पर विभाग की ओर से कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिए जाने के पश्चात साधन समिति सचिव परिषद ने 19 फरवरी से बेमियादी कलमबंद हड़ताल शुरू करने का निर्णय लिया है। परिषद के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र कुमार शर्मा और महामंत्री लक्ष्मण सिंह रावत ने बताया कि कैडर सचिवों की मांगों में एक जनवरी 2016 से कैडर सचिवों को सातवें वेतन के आदेश जारी किए जाने, कैडर सचिवों का न्यूनतम ग्रेड वेतन 2800 रुपये किए जाने तथा कैडर सचिवों की सेवाओं का सरकारीकरण कर वेतन की स्थायी व्यवस्था किए जाने की है। जबकि समिति कर्मचारियों की मांगें सचिवों के खाली पदों पर आंकिकों की पदोन्नति किए जाने, कर्मचारियों का वर्गीकरण कर सम्मानजनक वेतन दिए जाने और कर्मचारियों का जिला कैडर बनाए जाने प्रमुख हैं।
साधन समिति सचिव परिषद के अध्यक्ष ईश्वर सिंह वल्दिया और उपाध्यक्ष शेखर जोशी ने बताया कि देहरादून के परेड मैदान में पांच फरवरी से कैडर सचिव धरने पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि कैडर सचिवों की सेवा का सरकारीकरण करने, एक जनवरी 2016 से सभी सचिवों को सातवें वेतनमान का लाभ देने, सचिवों का ग्रेड पे 2800 रुपये करने, आंकिक पद पर कार्यरत कर्मचारियों का जिला कैडर बनाने की मांग को लेकर यह आंदोलन चलाया जा रहा है। सरकार ने इन मुद्दों को हल करने के लिए सिर्फ आश्वासन दिए हैं लेकिन अब तक उसका लाभ कर्मचारियों को नहीं मिला है। सचिवों ने बैठक की और आंदोलन की रणनीति तय की। वित्तीय वर्ष की समाप्ति के समय हो रही इस हड़ताल का व्यापक असर पड़ने की संभावना है। बैठक में ललिता खत्री, दीपक भट्ट, भगत सिंह धामी, कमान सिंह, कृष्ण कुमार, योगेश जोशी, कृष्ण सिंह पिंगल, त्रिलोक सिंह पंवार, हरीश राम आदि मौजूद थे।
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इधर, चंपावत में तीन सूत्री मांगों को लेकर साधन सहकारी समितियों के कैडर सचिवों ने सोमवार से बेमियादी कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी है। साधन सहाकारी समिति के कैडर सचिवों की हड़ताल के समर्थन में समिति कर्मचारी संगठन भी उतर आया है तथा उसने भी कैडर सचिवों के आंदोलन में शामिल होने का ऐलान किया है। कैडर सचिवों का कहना है कि संगठन की ओर से पांच फरवरी को कलमबंद हड़ताल का अंतिम नोटिस विभाग को भेजा गया था। किंतु नोटिस पर विभाग की ओर से कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिए जाने के पश्चात साधन समिति सचिव परिषद ने 19 फरवरी से बेमियादी कलमबंद हड़ताल शुरू करने का निर्णय लिया है। परिषद के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र कुमार शर्मा और महामंत्री लक्ष्मण सिंह रावत ने बताया कि कैडर सचिवों की मांगों में एक जनवरी 2016 से कैडर सचिवों को सातवें वेतन के आदेश जारी किए जाने, कैडर सचिवों का न्यूनतम ग्रेड वेतन 2800 रुपये किए जाने तथा कैडर सचिवों की सेवाओं का सरकारीकरण कर वेतन की स्थायी व्यवस्था किए जाने की है। जबकि समिति कर्मचारियों की मांगें सचिवों के खाली पदों पर आंकिकों की पदोन्नति किए जाने, कर्मचारियों का वर्गीकरण कर सम्मानजनक वेतन दिए जाने और कर्मचारियों का जिला कैडर बनाए जाने प्रमुख हैं।
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