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बर्फबारी ने 2014 का रिकार्ड भी तोड़ा
Sun, 17 Feb 2019 10:38 PM IST
kamlesh kamlesh
ब्यूरो/ अमर उजाला , डीडीहाट (पिथौरागढ़)।
ब्यूरो/ अमर उजाला , डीडीहाट (पिथौरागढ़)।
Published by: kamlesh kamlesh
Updated Sun, 17 Feb 2019 10:38 PM IST
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धारचूला के गुंजी पोस्ट से बर्फ हटाते हिमवीर।
- फोटो : पिथौरागढ़
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धारचूला का उच्च हिमालयी क्षेत्र बर्फ से पूरी तरह लकदक हो गया है। वर्ष 2014 के बाद क्षेत्र में इतनी अधिक बर्फबारी हुई है। इस सीजन में 10 वीं बार 50 सेमी से अधिक बर्फबारी हो गई है। आईटीबीपी की अग्रिम चौकियोें के अंदर भी बर्फ है। बावजूद इसके चीन सीमा पर हिमवीर लगातार गश्त कर रहे हैं। हिमवीरों को सावधानी के साथ सीमा की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
व्यास घाटी में कैलास मानसरोवर और छोटा कैलास यात्रा मार्ग बर्फ से ढक चुके हैं। आईटीबीपी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 2014 के बाद बर्फबारी का ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है। आईटीबीपी की सीमा की अग्रिम चौकियों के अंदर तक बर्फ है। जवान पहले चरण में चौकियों के अंदर से बर्फ हटाने में जुटे हैं। दूसरे चरण में एक चौकी से दूसरी चौकी तक पहुंचने के लिए रास्ते साफ किए जाएंगे। उच्च हिमालयी क्षेत्र में आवाजाही बेहद खतरनाक हो गई है। धूप खिलने के दौरान ग्लेशियरों के खिसकने का भी खतरा बना हुआ है। आईटीबीपी सातवीं वाहिनी मिर्थी के सेनानी महेंद्र प्रताप ने बताया कि ऊपरी क्षेत्रों में सीमा की निगरानी को तैनात जवानों को अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
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व्यास घाटी में कैलास मानसरोवर और छोटा कैलास यात्रा मार्ग बर्फ से ढक चुके हैं। आईटीबीपी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 2014 के बाद बर्फबारी का ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है। आईटीबीपी की सीमा की अग्रिम चौकियों के अंदर तक बर्फ है। जवान पहले चरण में चौकियों के अंदर से बर्फ हटाने में जुटे हैं। दूसरे चरण में एक चौकी से दूसरी चौकी तक पहुंचने के लिए रास्ते साफ किए जाएंगे। उच्च हिमालयी क्षेत्र में आवाजाही बेहद खतरनाक हो गई है। धूप खिलने के दौरान ग्लेशियरों के खिसकने का भी खतरा बना हुआ है। आईटीबीपी सातवीं वाहिनी मिर्थी के सेनानी महेंद्र प्रताप ने बताया कि ऊपरी क्षेत्रों में सीमा की निगरानी को तैनात जवानों को अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
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