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Pithoragarh News: चर्म रोग के इलाज को भटक रहे चंपावत के मरीज, पिथौरागढ़ का भी सहारा छूटा
Fri, 11 Sep 2026 11:16 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 11 Sep 2026 11:16 PM IST
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चंपावत। चर्म रोग के इलाज के लिए जिले के मरीजों की मुश्किल बढ़ गई है। पहले जिले के लोगों को करीब 76 किमी दूर पिथौरागढ़ जिला अस्पताल में ही चर्म रोग विशेषज्ञ की सुविधा मिल जाती थी और एक ही दिन में उपचार कराकर लौट आते थे। वहां तैनात चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. मृगांक शुक्ला के धारचूला स्थानांतरण के बाद यह सुविधा भी नहीं रही। अब विशेषज्ञ उपचार के लिए मरीजों को खटीमा, हल्द्वानी और बरेली तक जाना पड़ रहा है।
मानसून में बारिश और वातावरण में नमी बढ़ने के साथ दाद, खाज-खुजली, फंगल संक्रमण समेत त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में जिला अस्पताल, उप जिला अस्पताल लोहाघाट और टनकपुर में चर्म रोग विशेषज्ञ नहीं होने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। तीनों अस्पतालों में चर्म रोग विशेषज्ञ के एक-एक पद स्वीकृत हैं, लेकिन लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं।
जिला अस्पताल में चर्म रोग विशेषज्ञ का पद जुलाई से रिक्त है। इससे पहले तैनात विशेषज्ञ चिकित्सक भी लंबे समय से चिकित्सा अवकाश पर थीं। जिला अस्पताल में रोजाना करीब 550 मरीजों की ओपीडी होती है। इनमें त्वचा संबंधी समस्या लेकर आने वाले मरीज की भी संख्या शामिल हैं। विशेषज्ञ नहीं होने पर मरीजों को उपलब्ध अन्य चिकित्सकों से परामर्श लेना पड़ रहा है। जिन मरीजों को विशेषज्ञ उपचार की जरूरत होती है, उन्हें बाहर रेफर किया जा रहा है। मानसून के दौरान नमी के कारण त्वचा संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। दाद, खाज-खुजली और फंगल संक्रमण जैसी समस्याओं में कई बार विशेषज्ञ की सलाह और नियमित उपचार की जरूरत होती है। ऐसे में जिले के प्रमुख अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सक की कमी मरीजों के लिए परेशानी बनी हुई है।
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जिला अस्पताल चंपावत, उप जिला अस्पताल लोहाघाट और टनकपुर में रिक्त पदों की सूचना निदेशालय को भेजी गई है। चिकित्सकों के रिक्त पदों को भरने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। प्रयास है कि जिला अस्पताल में चर्म रोग विशेषज्ञ की तैनाती जल्द कराई जाए।
- डॉ. देवेश चौहान, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत
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मानसून में बारिश और वातावरण में नमी बढ़ने के साथ दाद, खाज-खुजली, फंगल संक्रमण समेत त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में जिला अस्पताल, उप जिला अस्पताल लोहाघाट और टनकपुर में चर्म रोग विशेषज्ञ नहीं होने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। तीनों अस्पतालों में चर्म रोग विशेषज्ञ के एक-एक पद स्वीकृत हैं, लेकिन लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं।
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जिला अस्पताल में चर्म रोग विशेषज्ञ का पद जुलाई से रिक्त है। इससे पहले तैनात विशेषज्ञ चिकित्सक भी लंबे समय से चिकित्सा अवकाश पर थीं। जिला अस्पताल में रोजाना करीब 550 मरीजों की ओपीडी होती है। इनमें त्वचा संबंधी समस्या लेकर आने वाले मरीज की भी संख्या शामिल हैं। विशेषज्ञ नहीं होने पर मरीजों को उपलब्ध अन्य चिकित्सकों से परामर्श लेना पड़ रहा है। जिन मरीजों को विशेषज्ञ उपचार की जरूरत होती है, उन्हें बाहर रेफर किया जा रहा है। मानसून के दौरान नमी के कारण त्वचा संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। दाद, खाज-खुजली और फंगल संक्रमण जैसी समस्याओं में कई बार विशेषज्ञ की सलाह और नियमित उपचार की जरूरत होती है। ऐसे में जिले के प्रमुख अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सक की कमी मरीजों के लिए परेशानी बनी हुई है।
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जिला अस्पताल चंपावत, उप जिला अस्पताल लोहाघाट और टनकपुर में रिक्त पदों की सूचना निदेशालय को भेजी गई है। चिकित्सकों के रिक्त पदों को भरने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। प्रयास है कि जिला अस्पताल में चर्म रोग विशेषज्ञ की तैनाती जल्द कराई जाए।
- डॉ. देवेश चौहान, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत