{"_id":"65a6b2d9049cd94123004e5b","slug":"sick-lachhima-devi-died-because-there-was-no-road-to-the-village-pithoragarh-news-c-230-1-shld1025-9259-2024-01-16","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बीमार लछिमा देवी मर गईं: दस की शाम को महिला को पड़ा था दौरा, हायर सेंटर ले जाते समय रास्ते में तोड़ा दम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीमार लछिमा देवी मर गईं: दस की शाम को महिला को पड़ा था दौरा, हायर सेंटर ले जाते समय रास्ते में तोड़ा दम
Wed, 17 Jan 2024 12:02 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
Updated Wed, 17 Jan 2024 12:02 PM IST
सार
पिथौरागढ़ के बंगापानी गांव से एक हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। यहां एक महिला की मौत की खबर को बाहर आने में पांच दिन लग गए और आप इस खबर को घटना के छठे दिन पढ़ रहे हैं।
विज्ञापन
लछिमा देवी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पिथौरागढ़ के बंगापानी गांव तक सड़क नहीं होने का खामियाजा एक और बीमार को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा। यही नहीं अफसोस यह भी है कि महिला की मौत की खबर को बाहर आने में पांच दिन लग गए और आप इस खबर को घटना के छठे दिन पढ़ रहे हैं। यह हाल आलम दारमा गांव का है। यह कोई साधारण गांव नहीं है इस गांव के नौ लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम में अहम योगदान तो दिया ही, साथ ही यह गांव एक वीर चक्र विजेता की पहचान भी है। और जानते हैं! गांव तक सिर्फ आठ किमी सड़क की जरूरत है जो ज्यादा बड़ा काम भी नहीं है।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार आलम दारमा गांव की लछिमा देवी (58) 10 जनवरी की शाम को दौरा पड़ने से घर में बेहोश हो गईं। रात का समय होने के ग्रामीणों ने सुबह होने का इंतजार किया। 11 जनवरी की सुबह होते ही परिजन ग्रामीणों की मदद से डोली के सहारे महिला को आठ किमी बदहाल पैदल रास्तों पर चलकर बंगापानी तक लाए। यहां से महिला को वाहन से 100 किमी दूर जिला अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें हायर सेंटर रेफर बरेली रेफर किया गया। परिजन बरेली के लिए चले लेकिन चल्थी (टनकपुर) में लछिमा देवी ने दम तोड़ दिया।
विज्ञापन
ग्रामीणों का कहना है कि अगर उनके गांव तक सड़क होती तो महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाई जा सकती थी। गांव तक सड़क नहीं होने से ग्रामीण गर्भवती और बीमार महिलाओं को डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाते हैं। कई बीमार और बुजुर्ग अस्पताल पहुंचने से पहले की दुनिया को छोड़कर चले जाते हैं। इसके बाद सरकार और शासन-प्रशासन को लोगों का दर्द नहीं दिख रहा है।
विज्ञापन
ये पढ़ें- Uttarakhand: प्रदेश में चल रहा है जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र का खेल, CSR पोर्टल से बनाए जा रहे फर्जी सर्टिफिकेट
12 किमी सड़क की जरूरत, स्वीकृत सिर्फ 7.5 किमी
पिथौरागढ़ के बंगापानी में वर्ष 2016 से आलम दारमा गांव के लिए पुल का निर्माण कार्य किया जा रहा है लेकिन अभी तक सिर्फ पुल का अपार्टमेंट ही बन पाया है। आलम दारमा गांव के प्रत्येक तोक तक सड़क पहुंचाने के लिए कुल 12 किमी की सड़क की जरूरत है। वर्तमान में 7.5 किमी सड़क ही स्वीकृत हो पाई है।
लोकसभा चुनाव बहिष्कार करने की चेतावनी
बंगापानी के ग्रामीण लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। इसके बाद भी ग्रामीणों का दर्द किसी को नहीं दिख रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और शासन-प्रशासन का ऐसा ही रवैया रहा तो लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा।
पिथौरागढ़ के बंगापानी में वर्ष 2016 से आलम दारमा गांव के लिए पुल का निर्माण कार्य किया जा रहा है लेकिन अभी तक सिर्फ पुल का अपार्टमेंट ही बन पाया है। आलम दारमा गांव के प्रत्येक तोक तक सड़क पहुंचाने के लिए कुल 12 किमी की सड़क की जरूरत है। वर्तमान में 7.5 किमी सड़क ही स्वीकृत हो पाई है।
लोकसभा चुनाव बहिष्कार करने की चेतावनी
बंगापानी के ग्रामीण लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। इसके बाद भी ग्रामीणों का दर्द किसी को नहीं दिख रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और शासन-प्रशासन का ऐसा ही रवैया रहा तो लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा।
ये हैं वीर चक्र विजेता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी
बंगापानी गांव के वीर सैनिक दीवान सिंह धामी को जाफना (श्रीलंका) में बहादुरी के लिए वीर चक्र भी दिया गया था। इसी गांव के नेत्र सिंह, बच्ची सिंह, जैत सिंह, कल्याण सिंह, केशर सिंह, प्रताप सिंह, देव सिंह, तेज सिंह और भगवत सिंह ने आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
बुजुर्ग को पहुंचाया अस्पताल
बंगापानी के आलम-दारमा गांव के ही 79 वर्षीय चंद्र सिंह धामी की तबीयत 14 जनवरी को खराब हो गई। परिजन इंतजार करते रहे कि शायद बुजुर्ग घरेलू नुस्खाें से ही ठीक हो जाएंगे लेकिन जब 15 जनवरी को तबीयत और खराब हो गई तो ग्रामीणों ने उन्हें डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टर ने चंद्र सिंह धामी को बुखार और टाइफाइड की दिक्कत बताई। ग्रामीणों का कहना है कि कब तक मरीजों को ऐसे डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाएंगे। उन्होंने गांव तक जल्द सड़क पहुंचाने की मांग की है।
बंगापानी गांव के वीर सैनिक दीवान सिंह धामी को जाफना (श्रीलंका) में बहादुरी के लिए वीर चक्र भी दिया गया था। इसी गांव के नेत्र सिंह, बच्ची सिंह, जैत सिंह, कल्याण सिंह, केशर सिंह, प्रताप सिंह, देव सिंह, तेज सिंह और भगवत सिंह ने आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
बुजुर्ग को पहुंचाया अस्पताल
बंगापानी के आलम-दारमा गांव के ही 79 वर्षीय चंद्र सिंह धामी की तबीयत 14 जनवरी को खराब हो गई। परिजन इंतजार करते रहे कि शायद बुजुर्ग घरेलू नुस्खाें से ही ठीक हो जाएंगे लेकिन जब 15 जनवरी को तबीयत और खराब हो गई तो ग्रामीणों ने उन्हें डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टर ने चंद्र सिंह धामी को बुखार और टाइफाइड की दिक्कत बताई। ग्रामीणों का कहना है कि कब तक मरीजों को ऐसे डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाएंगे। उन्होंने गांव तक जल्द सड़क पहुंचाने की मांग की है।