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Pithoragarh News: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को आजीवन कारावास की सजा
Fri, 11 Aug 2023 10:50 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 11 Aug 2023 10:50 PM IST
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पिथौरागढ़। विशेष सत्र न्यायाधीश पाॅक्सो शंकर राज ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी छवि यादव को आजीवन कारावास और एक लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अगस्त 2022 में पिथौरागढ़ नगर में कक्षा चार में पढ़ने वाली बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी। परिजनों की रिपोर्ट पर परचून की दुकान चलाने वाले छवि यादव के खिलाफ पिथौरागढ़ कोतवाली में केस दर्ज कराया गया। पुलिस ने आरोपी छवि यादव को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ पाॅक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। यह मामला विशेष सत्र न्यायालय में चला। दोनों पक्षों को सुनने के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश शंकर राज ने छवि यादव को दोष सिद्ध करार देते हुए आजीवन कारावास (जिसका अभिप्राय दोषसिद्ध के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए होगा) की सजा सुनाई।
दोषसिद्ध पर एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड नहीं देने पर पांच वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने कहा कि यदि दोषसिद्ध जुर्माने की धनराशि जमा करता है तो पूरी धनराशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी।
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न्यायालय ने यह भी कहा कि घटना के समय पीड़िता 12 साल से कम की अबोध बच्ची थी। इस कृत्य से उसे शारीरिक और मानसिक आघात पहुंचा है। उसकी मनोवृत्ति और शिक्षा प्रभावित होने के साथ-समाज में उसकी प्रतिष्ठा भी धूमिल हुई है। न्यायालय ने लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत राज्य सरकार से पीड़िता को अतिरिक्त प्रतिकर दिलाए जाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से अनुशंसा की है। राज्य सरकार की ओर से मामले की पैरवी डीजीसी प्रमोद पंत और एडीजीसी प्रेम भंडारी ने की।
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अगस्त 2022 में पिथौरागढ़ नगर में कक्षा चार में पढ़ने वाली बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी। परिजनों की रिपोर्ट पर परचून की दुकान चलाने वाले छवि यादव के खिलाफ पिथौरागढ़ कोतवाली में केस दर्ज कराया गया। पुलिस ने आरोपी छवि यादव को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ पाॅक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। यह मामला विशेष सत्र न्यायालय में चला। दोनों पक्षों को सुनने के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश शंकर राज ने छवि यादव को दोष सिद्ध करार देते हुए आजीवन कारावास (जिसका अभिप्राय दोषसिद्ध के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए होगा) की सजा सुनाई।
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दोषसिद्ध पर एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड नहीं देने पर पांच वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने कहा कि यदि दोषसिद्ध जुर्माने की धनराशि जमा करता है तो पूरी धनराशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी।
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न्यायालय ने यह भी कहा कि घटना के समय पीड़िता 12 साल से कम की अबोध बच्ची थी। इस कृत्य से उसे शारीरिक और मानसिक आघात पहुंचा है। उसकी मनोवृत्ति और शिक्षा प्रभावित होने के साथ-समाज में उसकी प्रतिष्ठा भी धूमिल हुई है। न्यायालय ने लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत राज्य सरकार से पीड़िता को अतिरिक्त प्रतिकर दिलाए जाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से अनुशंसा की है। राज्य सरकार की ओर से मामले की पैरवी डीजीसी प्रमोद पंत और एडीजीसी प्रेम भंडारी ने की।