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रुपए के संकट से नहीं उबरा बाजार, सन्नाटे का आलम
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Fri, 11 Nov 2016 10:19 PM IST
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पिथौरागढ़ स्टेट बैंक में पुराने नोट जमा कराने उमड़े लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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रुपए का संकट समाप्त नहीं हुआ है और बाजार पर इसका असर बना हुआ है। लगातार तीन दिनों से बाजार की हालत पस्त हो गई है। ठीक लगन के महीने में अच्छा व्यवसाय करने की उम्मीद में बैठे व्यापारियों को भारी निराशा हाथ लगी है। अधिकांश व्यापारियों ने प्रचलन से बंद हो चुके नोटों को लेना बंद कर दिया है। अब तक 60 फीसदी व्यवसाय पर असर पड़ गया है।
व्यापारियों का कहना है कि इस नुकसान की भरपाई में लंबा समय लग जाएगा। बाजार में शादी-विवाह के लिए फर्नीचर, अलमारी, टीवी, इलेक्ट्रानिक्स सामान की बिक्री लगभग ठंडी हो गई है। लोगों ने थोड़े बहुत रुपए राशन, तेल, साबुन, सब्जी के लिए बचाकर रखे हैं। आम आदमी को इस समय सामान खरीदने की नहीं वरन पुराने नोटों को जमा करने और बदलने की चिंता हो रही है। लोग सुबह से ही बैंक के सामने खड़े हो रहे हैं। इसका रुपया जमा हो रहा है या फिर बदले में प्रचलन वाले नोट मिल रहे हैं, उनकी चिंता कम हो रही है।
बृहस्पतिवार से हालांकि बैंकों ने लोगों को पुराने नोट के बदले में प्रचलित करेंसी देना तो शुरू कर दिया है लेकिन इसकी राशि इतनी कम है कि वह बाजार में नहीं आ पा रही है। एक व्यक्ति को सिर्फ चार हजार रुपये ही बदले में मिले हैं। यह राशि कई घरों में तो दो दिन के खर्च के बराबर भी नहीं है। ग्रामीण अंचलों में हालात और ज्यादा खराब हैं। गांवों से बैंक काफी दूरी पर होते हैं। रुपये जमा करने या बदलने के लिए लोगों को पूरा दिन व्यतीत करना पड़ रहा है। व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष पवन जोशी ने कहा कि बाजार को पटरी पर आने में लंबा समय लग जाएगा। व्यापारियों को इस नुकसान की भरपाई करने में मेहनत करनी पड़ जाएगी।
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व्यापारियों का कहना है कि इस नुकसान की भरपाई में लंबा समय लग जाएगा। बाजार में शादी-विवाह के लिए फर्नीचर, अलमारी, टीवी, इलेक्ट्रानिक्स सामान की बिक्री लगभग ठंडी हो गई है। लोगों ने थोड़े बहुत रुपए राशन, तेल, साबुन, सब्जी के लिए बचाकर रखे हैं। आम आदमी को इस समय सामान खरीदने की नहीं वरन पुराने नोटों को जमा करने और बदलने की चिंता हो रही है। लोग सुबह से ही बैंक के सामने खड़े हो रहे हैं। इसका रुपया जमा हो रहा है या फिर बदले में प्रचलन वाले नोट मिल रहे हैं, उनकी चिंता कम हो रही है।
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बृहस्पतिवार से हालांकि बैंकों ने लोगों को पुराने नोट के बदले में प्रचलित करेंसी देना तो शुरू कर दिया है लेकिन इसकी राशि इतनी कम है कि वह बाजार में नहीं आ पा रही है। एक व्यक्ति को सिर्फ चार हजार रुपये ही बदले में मिले हैं। यह राशि कई घरों में तो दो दिन के खर्च के बराबर भी नहीं है। ग्रामीण अंचलों में हालात और ज्यादा खराब हैं। गांवों से बैंक काफी दूरी पर होते हैं। रुपये जमा करने या बदलने के लिए लोगों को पूरा दिन व्यतीत करना पड़ रहा है। व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष पवन जोशी ने कहा कि बाजार को पटरी पर आने में लंबा समय लग जाएगा। व्यापारियों को इस नुकसान की भरपाई करने में मेहनत करनी पड़ जाएगी।
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