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आलू, राजमा नहीं, चौदास घाटी में अब खिल रहा गुलाब
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मलमालसोंग में गुलाब जल की खेती करते लोग
- फोटो : AMAR UJALA
शालू दताल, धारचूला (पिथौरागढ़)। सीमांत तहसील मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर और सड़क मार्ग से 7 किलोमीटर पैदल की दूरी पर बसा मरमालसौग (जयकोट) की चौदास घाटी गुलाब की खुशबू से महक रही है।
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समुद्रतल से लगभग 3450 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मरमालसौग (जयकोट) गांव के रुकुम सिंह और एसएसबी से सेवानिवृत्त भवान सिंह गुलाब की खेती कर रहे हैं। इस पहल से गांव के कई लोगों को घर बैठे ही रोजगार मिल रहा है।
कैलास-मानसरोवर यात्रा मार्ग पर नारायण आश्रम के निकट स्थित मरमालसौग (जयकोट) गांव कुछ वर्ष पूर्व तक आलू और राजमा उत्पादन के लिए जाना जाता था। लेकिन, बाजार दूर होने के कारण कृषि उत्पादों को वहां तक पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं था। ढुलान का खर्च अधिक होने की वजह से उत्पाद की कीमत लागत से कहीं अधिक हो जाती थी। ऐसे में ग्रामीणों ने कुछ नया करने की ठानी। इसके लिए गांव में खिलने वाले गुलाब के फूलों को चुना गया। फिर तमाम तकनीकी जानकारियां जुटाई गईं और धीरे-धीरे ग्रामीण स्वयं गुलाब जल तैयार करने लगे। देहरादून स्थित लैब में इस गुलाब जल का परीक्षण कराया तो वहां से शत प्रतिशत शुद्धता की मुहर लग गई। फिर क्या था, उत्साहित ग्रामीणों ने गुलाब जल का व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया। सामाजिक कार्यकर्ता कवीन्द्र सिंह ने बताया कि अब गांव में उत्पादित गुलाब जल की मार्केटिंग की तैयारी की जा रही है। गांव के 3 परिवारों के 10 लोग 20 नाली की भूमि में प्रतिवर्ष 100 किलो गुलाब जल उत्पादन करके तीस से पचास हजार रुपये की सालाना आमदनी कर रहे। रुकुम सिंह, महेंद्र सिंह दुसात, और भवान सिंह ने बताया कि सरकार की मदद मिलने पर ग्रामीणों की योजना निकट भविष्य में गुलाब का तेल तैयार करना और साथ ही बड़ी मात्रा में गुलाब जल का उत्पादन करना है। इसलिए गांव के लोगो की सरकार से मांग है उचित मदद की जाय।
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