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रोज फिंच, हिमालयन बुलबुल, श्रायक नजर आए
ब्यूरो/अमर उजाला, मुनस्यारी (पिथौरागढ़)।
Updated Mon, 27 Feb 2017 10:29 PM IST
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रोज फिंच,
- फोटो : अमर उजाला
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मोनाल संस्था का बर्ड वाचिंग कैंप सोमवार से शुरू हो गया है। कैंप में शामिल लोगों ने मुनस्यारी के आसपास तथा मैसर कुंड में रोज फिंच, ग्रीन बैक टिट, मिशेल थ्रश, श्रायक, हिमालयन बुलबुल, कॉमन हुपू जैसी पक्षियों का दीदार किया। उनके स्वभाव की जानकारी ली।
पहले दिन कैंप में 20 लोग शामिल हुए। इनमें पर्यटन व्यवसायी, स्कूली बच्चे शामिल हैं। सबसे अच्छी बात यह रही कि जाड़ों में उच्च हिमालयी क्षेत्रों से निचले इलाकों में उतरे कई दुर्लभ पक्षियों के दर्शन हो गए।
मोनाल संस्था के सचिव और इस कैंप के आयोजक सुरेंद्र पंवार ने बताया कि आज जितने भी पक्षी नजर आए उन सभी का मूल प्रवास उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ही है। जाड़ा समाप्त होते ही यह पक्षी अपने मूल प्रवास को लौट जाएंगे। उन्होंने कहा कि मुनस्यारी अब बर्ड वाचरों की सबसे पसंदीदा जगह बनती जा रही है। कैंप के माध्यम से स्थानीय स्तर पर बर्ड गाइड तैयार किए जाएंगे। मैसर कुंड में जंगल काफी घने हैं। उनमें कई प्रकार के पक्षी रहते हैं। उन्होंने बताया कि कैंप को लेकर जिस तरह लोगों ने रुचि दिखाई है उसे देखते हुए इसे कम से कम दस दिन तक लगातार संचालित किया जाएगा।
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मदकोट जीआईसी के विद्यार्थियों ने भी बर्ड वाचिंग कैंप में शामिल होने की इच्छा जताई है। अब गोरी के किनारे और गोरी के जंगलों में भी यह कैंप लगाया जाएगा। मोनाल संस्था कैंप का आयोजन अपने संसाधनों से कर रही है।
कैंप के संचालन में बृजेश धर्मशक्तू, पुष्कर आर्या, राजेंद्र सिंह बिष्ट आदि सहयोग कर रहे हैं। मोनाल संस्था ने वर्ष 2016 में अप्रैल में बर्ड वाचिंग का बड़ा कैंप आयोजित किया था लेकिन उस समय उच्च हिमालयी क्षेत्रों के पक्षी कम संख्या में नजर आए। इस बार बर्ड वाचरों, प्रतिभागियों को कई दुर्लभ पक्षी देखने को मिले। मोनाल संस्था ने इन पक्षियों के संरक्षण के प्रति भी जागरूकता फैलाने का फैसला लिया है।
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पहले दिन कैंप में 20 लोग शामिल हुए। इनमें पर्यटन व्यवसायी, स्कूली बच्चे शामिल हैं। सबसे अच्छी बात यह रही कि जाड़ों में उच्च हिमालयी क्षेत्रों से निचले इलाकों में उतरे कई दुर्लभ पक्षियों के दर्शन हो गए।
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मोनाल संस्था के सचिव और इस कैंप के आयोजक सुरेंद्र पंवार ने बताया कि आज जितने भी पक्षी नजर आए उन सभी का मूल प्रवास उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ही है। जाड़ा समाप्त होते ही यह पक्षी अपने मूल प्रवास को लौट जाएंगे। उन्होंने कहा कि मुनस्यारी अब बर्ड वाचरों की सबसे पसंदीदा जगह बनती जा रही है। कैंप के माध्यम से स्थानीय स्तर पर बर्ड गाइड तैयार किए जाएंगे। मैसर कुंड में जंगल काफी घने हैं। उनमें कई प्रकार के पक्षी रहते हैं। उन्होंने बताया कि कैंप को लेकर जिस तरह लोगों ने रुचि दिखाई है उसे देखते हुए इसे कम से कम दस दिन तक लगातार संचालित किया जाएगा।
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मदकोट जीआईसी के विद्यार्थियों ने भी बर्ड वाचिंग कैंप में शामिल होने की इच्छा जताई है। अब गोरी के किनारे और गोरी के जंगलों में भी यह कैंप लगाया जाएगा। मोनाल संस्था कैंप का आयोजन अपने संसाधनों से कर रही है।
कैंप के संचालन में बृजेश धर्मशक्तू, पुष्कर आर्या, राजेंद्र सिंह बिष्ट आदि सहयोग कर रहे हैं। मोनाल संस्था ने वर्ष 2016 में अप्रैल में बर्ड वाचिंग का बड़ा कैंप आयोजित किया था लेकिन उस समय उच्च हिमालयी क्षेत्रों के पक्षी कम संख्या में नजर आए। इस बार बर्ड वाचरों, प्रतिभागियों को कई दुर्लभ पक्षी देखने को मिले। मोनाल संस्था ने इन पक्षियों के संरक्षण के प्रति भी जागरूकता फैलाने का फैसला लिया है।