{"_id":"60e09c058ebc3ebc791a374b","slug":"road-closed-in-dharchula-pithoragarh-news-hld4299351117","type":"story","status":"publish","title_hn":"तवाघाट-लिपुलेख सड़क बंद होने से व्यास घाटी के लोग लगा रहे 10 से 20किमी की दौड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तवाघाट-लिपुलेख सड़क बंद होने से व्यास घाटी के लोग लगा रहे 10 से 20किमी की दौड़
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धारचूला (पिथौरागढ़)। तहसील मुख्यालय में 17-18 जून की बारिश के कारण कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग से जुड़ी तवाघाट-लिपुलेख सड़क कई जगह बंद है। मार्ग न खुलने से व्यास घाटी के सात गांवों के लोग और सीमा पर तैनात जवानों को 20 किमी पैदल यात्रा करनी पड़ रही है।
दो दिन पूर्व पैदल यात्रा करके लौटी रोंकांग गांव की प्रधान अंजू रोंकली ने बताया कि बुदि-छियालेक से गुंजी और कुटी की सड़कें बीआरओ ने खोल दी हैं। इससे लोगों को थोड़ी राहत तो मिली, लेकिन नीचे की ओर सड़क बंद है। डीजल की कमी से फंसे वाहन भी नहीं चल रहे हैं।
अभी भी बुदि के नीचे पुराने एसएसबी कैंप कुथला से छंकन तक करीब नौ किमी लंबी सड़क बड़े बोल्डरों और मलबे से बंद है। प्रधान रोंकली ने बताया कि सीमा सुरक्षा पर तैनात सेना, आईटीबीपी के जवान लोगों की हरसंभव मदद कर रहे हैं। महिलाओं, बीमार और बच्चों को भी वाहन सेवा उपलब्ध करा रहे हैं।
विज्ञापन
नाबी के उपप्रधान जनक नबियाल और रोंकांग निवासी बीरेंद्र रोंकली ने बताया कि वे लोग 25 महिला-पुरुष के साथ 10 किमी तक उबड़-खाबड़ पहाड़ी से एक-दूसरे के हाथों के सहारे जान हथेली पर रखकर सड़क तक पहुंचे। फिर वाहन से धारचूला पहुंचे।
वाहन स्वामी देवेंद्र सिंह और धर्मेंद्र गुंज्याल ने बताया कि सड़क पूरी तरह न खुलने पर डीजल की कमी से चार-पांच वाहन गुंजी में फंसे हैं।
देवेंद्र सिंह ने बताया कि छंकन और पैलसती झरने के पास लगातार बोल्डर और मलबा गिरने से सड़क खुलने में दिक्कतें हो रहीं हैं। लोगों ने ग्रिफ और प्रशासन से शीघ्र सड़क खोलने की मांग की है।
विज्ञापन
दो दिन पूर्व पैदल यात्रा करके लौटी रोंकांग गांव की प्रधान अंजू रोंकली ने बताया कि बुदि-छियालेक से गुंजी और कुटी की सड़कें बीआरओ ने खोल दी हैं। इससे लोगों को थोड़ी राहत तो मिली, लेकिन नीचे की ओर सड़क बंद है। डीजल की कमी से फंसे वाहन भी नहीं चल रहे हैं।
विज्ञापन
अभी भी बुदि के नीचे पुराने एसएसबी कैंप कुथला से छंकन तक करीब नौ किमी लंबी सड़क बड़े बोल्डरों और मलबे से बंद है। प्रधान रोंकली ने बताया कि सीमा सुरक्षा पर तैनात सेना, आईटीबीपी के जवान लोगों की हरसंभव मदद कर रहे हैं। महिलाओं, बीमार और बच्चों को भी वाहन सेवा उपलब्ध करा रहे हैं।
विज्ञापन
नाबी के उपप्रधान जनक नबियाल और रोंकांग निवासी बीरेंद्र रोंकली ने बताया कि वे लोग 25 महिला-पुरुष के साथ 10 किमी तक उबड़-खाबड़ पहाड़ी से एक-दूसरे के हाथों के सहारे जान हथेली पर रखकर सड़क तक पहुंचे। फिर वाहन से धारचूला पहुंचे।
वाहन स्वामी देवेंद्र सिंह और धर्मेंद्र गुंज्याल ने बताया कि सड़क पूरी तरह न खुलने पर डीजल की कमी से चार-पांच वाहन गुंजी में फंसे हैं।
देवेंद्र सिंह ने बताया कि छंकन और पैलसती झरने के पास लगातार बोल्डर और मलबा गिरने से सड़क खुलने में दिक्कतें हो रहीं हैं। लोगों ने ग्रिफ और प्रशासन से शीघ्र सड़क खोलने की मांग की है।