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छात्रों को रिवर राफ्टिंग सिखा रहा केएमवीएन
ब्यूरो/अमर उजाला, नाचनी (पिथौरागढ़)।
Updated Mon, 24 Oct 2016 10:48 PM IST
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छात्रों को रिवर राफ्टिंग सिखा रहा केएमवीएन
- फोटो : अमर उजाला
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हरड़िया नाले के मलबे से हर साल बरसात में रामगंगा में बन रही झील अब साहसिक खेलों के काम आने लगी है। अस्थायी झील में केएमवीएन छात्रों को रिवर राफ्टिंग का प्रशिक्षण दे रहा है।
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केेएमवीएन ने सोमवार से हरड़िया में बनी अस्थायी झील में तीन दिवसीय रिवर राफ्टिंग प्रशिक्षण प्रारंभ कर दिया है। पहले दिन जीआईसी नाचनी, प्राथमिक स्कूल बांसबगड़ के 35 छात्र और 35 छात्राओं को दो घंटे तक रिवर राफ्टिंग का प्रशिक्षण दिया गया। केएमवीएन के साहसिक पर्यटन प्रबंधक दिनेश गुरुरानी ने बताया कि अगले दो दिन जीआईसी होकरा, जीआईसी डोर, जीआईसी तेजम, जीआईसी बिर्थी, जीआईसी कोटापंद्रपाला के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षणार्थियों को हिमालय बचाओ की शपथ दिलाई जा रही है। रिवर गाइड भूपेंद्र सिंह, देवेंद्र पोखरिया, पदम सिंह, अजय धामी, दीपक बिष्ट प्रशिक्षण दे रहे हैं।
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हरड़िया के पास नदी में 2014 से झील बन रही है। हरड़िया नाले से निकलने वाले मलबे के जमा होने से पानी का बहाव रुक जाता है। सालभर से रुका मलबा पहली बरसात में बह जाता है। फिर कुछ दिनों बाद हरड़िया नाले का मलबा नदी में पट जाता है और इस स्थान पर बड़ा सा तालाब बन जाता है। करीब 700 मीटर लंबी इस झील की अधिकतम गहराई तीन मीटर से अधिक नहीं है। मलबे से नदी का प्रवाह रुकने की समस्या के बीच नाचनी के लोग साहसिक पर्यटन का आनंद उठा रहे हैं। आयोजकों को भी अस्थाई झील राफ्टिंग के लिए मुफीद नजर आ रही है।
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