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राजस्व उपनिरीक्षक हैं राजस्व विभाग की रीढ : डीएम
Tue, 07 May 2019 12:46 AM IST
बृजमोहन बृजमोहन
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
Published by: बृजमोहन बृजमोहन
Updated Tue, 07 May 2019 12:46 AM IST
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अल्मोड़ा कलक्ट्रेट में प्रशिक्षु राजस्व उप निरीक्षकों को संबोधित करते डीएम नितिन सिंह भदौरिया।
- फोटो : AMAR UJALA
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जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने कहा है कि राजस्व उपनिरीक्षक राजस्व विभाग की सबसे छोटी इकाई और विभाग की रीढ है। अगर यह मजबूत होगी तो तभी प्रशासन मजबूत होगा। डीएम कलक्ट्रेट के बहुउद्देश्यीय हॉल में प्रशिक्षणरत राजस्व उप निरीक्षकों की एक दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि राजस्व उप निरीक्षकों को मई से जुलाई तक व्यावहारिक प्रशिक्षण विभिन्न तहसीलों और राजस्व पटलों में दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान उनकी जो भी शंकाएं होंगी उनका समाधान अवश्य कर लें। डीएम ने कहा कि सभी प्रशिक्षणार्थियों को कंप्यूटर का व्यावहारिक ज्ञान होना अति आवश्यक है। वर्तमान में सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए कंप्यूटर एक मुख्य माध्यम है। सूचनाओं के आदान-प्रदान में जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी ही निराकरण होने की संभावना रहती है।
उन्होंने कहा कि जिले में अनेक अनुभवी अधिकारी और कार्मिक हैं। जिनके अनुभव का फायदा लेकर राजस्व उपनिरीक्षक काफी कुछ सीख सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न राजस्व पटलों की कार्यविधि से भी अवगत कराया जाएगा। साथ ही तहसीलों में व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा। राजस्व उपनिरीक्षक संस्थान के कार्यकारी निदेशक श्रीष कुमार, उपजिलाधिकारी सदर सीमा विश्वकर्मा, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी मनोहर लाल, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी राजेश तिवारी, आपदा प्रबंधन अधिकारी राकेश जोशी ने कलक्ट्रेट के विभिन्न पटलों के बारे में जानकारी दी। प्रतिभागियों ने आपदा प्रबंधन विभाग के नियंत्रण कक्ष में जाकर वहां के कार्यों की जानकारी ली।
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उन्होंने कहा कि राजस्व उप निरीक्षकों को मई से जुलाई तक व्यावहारिक प्रशिक्षण विभिन्न तहसीलों और राजस्व पटलों में दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान उनकी जो भी शंकाएं होंगी उनका समाधान अवश्य कर लें। डीएम ने कहा कि सभी प्रशिक्षणार्थियों को कंप्यूटर का व्यावहारिक ज्ञान होना अति आवश्यक है। वर्तमान में सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए कंप्यूटर एक मुख्य माध्यम है। सूचनाओं के आदान-प्रदान में जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी ही निराकरण होने की संभावना रहती है।
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उन्होंने कहा कि जिले में अनेक अनुभवी अधिकारी और कार्मिक हैं। जिनके अनुभव का फायदा लेकर राजस्व उपनिरीक्षक काफी कुछ सीख सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न राजस्व पटलों की कार्यविधि से भी अवगत कराया जाएगा। साथ ही तहसीलों में व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा। राजस्व उपनिरीक्षक संस्थान के कार्यकारी निदेशक श्रीष कुमार, उपजिलाधिकारी सदर सीमा विश्वकर्मा, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी मनोहर लाल, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी राजेश तिवारी, आपदा प्रबंधन अधिकारी राकेश जोशी ने कलक्ट्रेट के विभिन्न पटलों के बारे में जानकारी दी। प्रतिभागियों ने आपदा प्रबंधन विभाग के नियंत्रण कक्ष में जाकर वहां के कार्यों की जानकारी ली।
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