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Pithoragarh News: जर्जर विद्यालय में बच्चों को भेजने से इन्कार
Thu, 23 Jul 2026 10:54 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 23 Jul 2026 10:54 PM IST
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डीडीहाट(पिथौरागढ़)। सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही ने एक और सरकारी स्कूल का भविष्य अंधकार में ढकेल दिया है। प्राइमरी स्कूल चिटगालगांव के जर्जर भवन की मरम्मत न होने से सहमे अभिभावकों ने जब अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया, तो अधिकारियों ने सुधारीकरण कराने के बजाय स्कूल पर ताला लटकाकर अपनी जिम्मेदारियों से इतिश्री कर ली।
डीडीहाट के चिटगालगांव के एकमात्र प्राथमिक विद्यालय में छात्रसंख्या शून्य होने से लगे ताले सिस्टम पर कई सवाल खड़े कर रहे हैं। चिटगालगांव अनुसूचित जाति बाहुल्य है। पिछड़ी जातियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकारी स्तर पर कई दावे किए जा रहे हैं जिनकी प्राथमिक विद्यालय ने खोली है। अभिभावक और ग्रामीण पिछले कई सालों से शिक्षा विभाग से जर्जर हो चुके स्कूल के सुधारीकरण की मांग करते रहे लेकिन उनकी नहीं सुनी गई।
पांच साल पहले तक विद्यालय आते थे 30 बच्चे
विकासखंड के सबसे दुर्गम गांव चिटगालगांव स्थित प्राइमरी स्कूल में पांच साल पहले तक 30 बच्चे पढ़ने आते थे। गांव से एक किलोमीटर दूर स्थित प्राइमरी स्कूल की छत साल 2022 में क्षतिग्रस्त हो गई। छत टूटने से बरसात में पानी कक्षाओं में भरता गया। इसके बाद भी स्कूल के सुधारीकरण की आस में वर्ष 2026 तक अभिभावक अपने बच्चों को वहां पढ़ने भेजते रहे। अभिभावकों की उम्मीद टूट गई। अभिभावकों और ग्रामीणों का कहना है कि छात्रसंख्या को शून्य तक पहुंचाने का काम खुद शिक्षा विभाग ने किया है।
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पांच साल में 100 से अधिक स्कूलों में लग गए ताले
बीते पांच साल में जिले में 100 से अधिक प्राथमिक विद्यालयों को शून्य छात्रसंख्या होने से बंद करना पड़ा है। सीमांत क्षेत्र में एक-एक कर सरकारी विद्यालयों में लगने वाले तालों ने सरकारी शिक्षा की बेहतरी के जिले से प्रदेश स्तर तक हो रहे दावों की हकीकत भी सामने लाने का काम किया है।
बोले ग्रामीण
इस स्कूल में अधिकतर बच्चे गरीब परिवारों के पढ़ते थे। स्कूल के भवन को ठीक किया जाएगा तो हम अपने बच्चों को फिर से स्कूल भेजने के लिए तैयार हैं।-दीपक कुमार
हम मजदूरी करके अपने बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं। बच्चों को मजदूरी न करनी पड़े इसके लिए दिन-रात पसीना बहा रहे हैं। बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी कीमत में समझौता नहीं कर सकते। -पुष्कर राम
............
प्राइमरी स्कूल चिटगालगांव में छात्रसंख्या शून्य होने के कारणों की जांच की जाएगी। शिक्षा विभाग से इस संबंध में बात कर जानकारी ली जाएगी और उचित कदम उठाए जाएंगे। -खुशबू पांडे, उप जिलाधिकारी, डीडीहाट
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डीडीहाट के चिटगालगांव के एकमात्र प्राथमिक विद्यालय में छात्रसंख्या शून्य होने से लगे ताले सिस्टम पर कई सवाल खड़े कर रहे हैं। चिटगालगांव अनुसूचित जाति बाहुल्य है। पिछड़ी जातियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकारी स्तर पर कई दावे किए जा रहे हैं जिनकी प्राथमिक विद्यालय ने खोली है। अभिभावक और ग्रामीण पिछले कई सालों से शिक्षा विभाग से जर्जर हो चुके स्कूल के सुधारीकरण की मांग करते रहे लेकिन उनकी नहीं सुनी गई।
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पांच साल पहले तक विद्यालय आते थे 30 बच्चे
विकासखंड के सबसे दुर्गम गांव चिटगालगांव स्थित प्राइमरी स्कूल में पांच साल पहले तक 30 बच्चे पढ़ने आते थे। गांव से एक किलोमीटर दूर स्थित प्राइमरी स्कूल की छत साल 2022 में क्षतिग्रस्त हो गई। छत टूटने से बरसात में पानी कक्षाओं में भरता गया। इसके बाद भी स्कूल के सुधारीकरण की आस में वर्ष 2026 तक अभिभावक अपने बच्चों को वहां पढ़ने भेजते रहे। अभिभावकों की उम्मीद टूट गई। अभिभावकों और ग्रामीणों का कहना है कि छात्रसंख्या को शून्य तक पहुंचाने का काम खुद शिक्षा विभाग ने किया है।
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पांच साल में 100 से अधिक स्कूलों में लग गए ताले
बीते पांच साल में जिले में 100 से अधिक प्राथमिक विद्यालयों को शून्य छात्रसंख्या होने से बंद करना पड़ा है। सीमांत क्षेत्र में एक-एक कर सरकारी विद्यालयों में लगने वाले तालों ने सरकारी शिक्षा की बेहतरी के जिले से प्रदेश स्तर तक हो रहे दावों की हकीकत भी सामने लाने का काम किया है।
बोले ग्रामीण
इस स्कूल में अधिकतर बच्चे गरीब परिवारों के पढ़ते थे। स्कूल के भवन को ठीक किया जाएगा तो हम अपने बच्चों को फिर से स्कूल भेजने के लिए तैयार हैं।-दीपक कुमार
हम मजदूरी करके अपने बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं। बच्चों को मजदूरी न करनी पड़े इसके लिए दिन-रात पसीना बहा रहे हैं। बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी कीमत में समझौता नहीं कर सकते। -पुष्कर राम
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प्राइमरी स्कूल चिटगालगांव में छात्रसंख्या शून्य होने के कारणों की जांच की जाएगी। शिक्षा विभाग से इस संबंध में बात कर जानकारी ली जाएगी और उचित कदम उठाए जाएंगे। -खुशबू पांडे, उप जिलाधिकारी, डीडीहाट