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बलुवाकोट में मिली नवजात जिला अस्पताल में भर्ती

Fri, 30 Mar 2018 10:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Fri, 30 Mar 2018 10:43 PM IST
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Recruitment in newly born District Hospital in Baluwakot
नवजात को जिला बाल कल्याण समिति के सुपुर्द करते वरदानी संस्था के लोग - फोटो : अमर उजाला

बलुवाकोट में मिली नवजात बालिका को जिला बाल संरक्षण समिति के सुपुर्द कर दिया गया है। जिला बाल संरक्षण यूनिट में पंजीकरण के बाद नवजात को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक-दो दिनों में नवजात को परवरिश के लिए अल्मोड़ा स्थित बाल कल्याण केेंद्र भेजा जाएगा।

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शुक्रवार को धारचूला थाने की एक महिला पुलिस कर्मी की अभिरक्षा में वरदान संस्था की सुमन वर्मा आदि लोग नवजात को लेकर रई स्थित जिला बाल संरक्षण यूनिट पहुंचे। यहां नवजात को बाल संरक्षण समिति को सौंप दिया गया। समिति ने यूनिट मेें बच्ची का पंजीकरण किया। इसके बाद जिला अस्पताल भर्ती कराया गया। जिला बाल कल्याण समिति अध्यक्ष रेनु ठाकुर ने बताया कि नवजात को एहतियातन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बच्ची की हालत पर नजर रखी जा रही है। संभवतया शनिवार को बच्ची को अल्मोड़ा स्थित बाल कल्याण केंद्र भेजा जाएगा। इधर, थानाध्यक्ष महेश चंद्र ने बताया कि घटना की छानबीन कराई जा रही है। इस संबंध में पुलिस अस्पतालों से ब्योरा जुटा रही है।
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गोद लेने आगे आए लोग
नवजात बच्ची के मिलने के बाद कई संस्था और दंपतियों ने उसे गोद लेने की इच्छा जताई है। बलुवाकोट, धारचूला, मुनस्यारी के साथ ही पिथौरागढ़ में संस्थाएं और लोग गोद लेने के लिए आगे आए हैं। जिला बाल कल्याण समिति को इस संबंध में कई लोगों के आवेदन मिले हैं। हालांकि अभी बच्ची को गोद देने के संबंध में फैसला नहीं हुआ है। दूसरी ओर नवजात बच्ची को इस तरह लावारिस फेंके जाने पर आम जनमानस में आक्रोश है। विभिन्न संगठन एवं लोगों ने दोषियों को पकड़ने और सजा दिलाने की मांग की है।
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अप्रैल से शुरू होगा आश्रय
बाल कल्याण के साथ ही बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान में काम कर रही घनश्याम ओली चाइल्ड वेलफेयर सोसाइटी ने लावारिस हाल में मिले बच्चों, अनाथों और ठुकराए गए नवजातों के पालन पोषण के लिए अप्रैल से आश्रय योजना बनाई है। योजना के तहत कोई भी व्यक्ति या परिवार अपने नवजात को पालने में असमर्थ है तो संस्था को सौंप सकता है। नवजातों को असुरक्षित माहौल में छोड़ने के बजाय संस्था को सौंपने की अपील भी की है। संस्था बच्चे का पालन पोषण करेगी। संस्था ने उम्मीद जताई है कि इससे लिंगानुपात में सुधार होगा और इस तरह की घटनाओं की रोकथाम होगी।

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