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Pithoragarh News: अस्कोट में दिखी दुर्लभ तितली कॉमन अर्ल
Fri, 01 Sep 2023 11:33 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 01 Sep 2023 11:33 PM IST
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कॉमन अर्ल तितली।
पंकज पाठक
पिथौरागढ़। जिले के अस्कोट वन्यजीव विहार क्षेत्र में 75 साल बाद कॉमन अर्ल तितली दिखी है। इससे पहले यह तितली भीमताल के सातताल में देखी गई थी। विंग्स फाउंडेशन के जगदीश भट्ट ने इस तितली को देखा है।
विंग्स फाउंडेशन के जगदीश ने शोध कार्य के दौरान पिछले माह अस्कोट वन क्षेत्र में कॉमन अर्ल तितली देखी। इसका वैज्ञानिक नाम टानाइसिया जूली है। यह निम्फलिऐडी परिवार से है। इस तितली के लार्वा का होस्ट प्लांट च्यूरा है। इसका विंग स्पान 70 से 75 तक होता है। नर अधिक भूरे रंग और मादा हल्के भूरे रंग की होती।
इस तितली का नमूना बटरफ्लाई रिसर्च सेंटर भीमताल में रखा गया है। 75 साल बाद इस तितली के दिखने से विशेषज्ञ और वनाधिकारी काफी उत्साहित हैं। लंबे अध्ययन के बाद फाउंडेशन को इस दुर्लभ तितली के बारे में जानकारी मिली है। इस दुर्लभ तितली के मिलने पर फाउंडेशन फिर से यहां शोध कार्य करने की तैयारी में है।
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विंग्स फाउंडेशन ने करीब 75 साल बाद अस्कोट वन्यजीव विहार क्षेत्र में कॉमन अर्ल तितली को ढूंढा है। यह अच्छी बात है। अस्कोट क्षेत्र तितलियों के लिए उपयुक्त स्थान है। - जीवन मोहन दगाड़े, डीएफओ, पिथौरागढ़ वन प्रभाग।
75 साल बाद कॉमन अर्ल का मिलना काफी अच्छा है। इससे उसके अस्कोट क्षेत्र में रहने की संभावना है। वन विभाग के साथ मिलकर क्षेत्र में तितलियों पर शोध कार्य किया जाएगा। - जगदीश भट्ट, शोधार्थी, विंग्स फाउंडेशन।
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पिथौरागढ़। जिले के अस्कोट वन्यजीव विहार क्षेत्र में 75 साल बाद कॉमन अर्ल तितली दिखी है। इससे पहले यह तितली भीमताल के सातताल में देखी गई थी। विंग्स फाउंडेशन के जगदीश भट्ट ने इस तितली को देखा है।
विंग्स फाउंडेशन के जगदीश ने शोध कार्य के दौरान पिछले माह अस्कोट वन क्षेत्र में कॉमन अर्ल तितली देखी। इसका वैज्ञानिक नाम टानाइसिया जूली है। यह निम्फलिऐडी परिवार से है। इस तितली के लार्वा का होस्ट प्लांट च्यूरा है। इसका विंग स्पान 70 से 75 तक होता है। नर अधिक भूरे रंग और मादा हल्के भूरे रंग की होती।
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इस तितली का नमूना बटरफ्लाई रिसर्च सेंटर भीमताल में रखा गया है। 75 साल बाद इस तितली के दिखने से विशेषज्ञ और वनाधिकारी काफी उत्साहित हैं। लंबे अध्ययन के बाद फाउंडेशन को इस दुर्लभ तितली के बारे में जानकारी मिली है। इस दुर्लभ तितली के मिलने पर फाउंडेशन फिर से यहां शोध कार्य करने की तैयारी में है।
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विंग्स फाउंडेशन ने करीब 75 साल बाद अस्कोट वन्यजीव विहार क्षेत्र में कॉमन अर्ल तितली को ढूंढा है। यह अच्छी बात है। अस्कोट क्षेत्र तितलियों के लिए उपयुक्त स्थान है। - जीवन मोहन दगाड़े, डीएफओ, पिथौरागढ़ वन प्रभाग।
75 साल बाद कॉमन अर्ल का मिलना काफी अच्छा है। इससे उसके अस्कोट क्षेत्र में रहने की संभावना है। वन विभाग के साथ मिलकर क्षेत्र में तितलियों पर शोध कार्य किया जाएगा। - जगदीश भट्ट, शोधार्थी, विंग्स फाउंडेशन।