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हिमालयी क्षेत्र में तेजी से बदल रहा मौसम

Fri, 09 Sep 2016 10:47 PM IST
दीपक उप्रेती/अमर उजाला, पिथौरागढ़
दीपक उप्रेती/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Fri, 09 Sep 2016 10:47 PM IST
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Rapid change in the Himalayan region weather
हीरामणि की चोटी में इस बार कम दिख रही बर्फ - फोटो : अमर उजाला

हिमालयी क्षेत्र में मौसम तेजी से बदल रहा है। इस बदलाव का प्रमाण इसी बात से मिल जाता है कि सितंबर प्रथम सप्ताह में कैलास मानसरोवर की यात्रा पूरी कर लौटने वाले अंतिम दो दलों को इस बार लिपुलेख में बर्फ के दर्शन नहीं हो पाए, जबकि पिछले वर्षों तक कम से कम अंतिम दो दलों को लिपुलेख में बर्फ जरूर मिल जाती थी।

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उससे भी बड़ा बदलाव यह देखने में आया है कि राज्य में मानसून की अभी सक्रियता बनी होने के बावजूद सितंबर में अब तक सिर्फ एक दिन मात्र 2.2 एमएम बारिश हुई है, जबकि सितंबर में पिथौरागढ़ जिले में औसत बारिश की मात्रा 293.6 एमएम रहती है। मानसून की सक्रियता 20 सितंबर तक बनी रहेगी, लेकिन फिलहाल व्यापक बारिश के लक्षण कम दिखाई दे रहे हैं। पांच हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित पिथौरागढ़ शहर में दिन का तापमान 29 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा रहा है। न्यूनतम तापमान भी 19 डिग्री तक पहुंच रहा है।
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मौसम विज्ञानियों का कहना है कि सितंबर में अब तक कोई भी ऐसा सिस्टम सक्रिय नहीं हुआ, जिसकी मदद से अच्छी बारिश की उम्मीद की जा सके। पिछले नौ दिनों से बारिश नहीं होने से नमी का स्तर लगातार कम हो रहा है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में आमतौर पर इस सीजन में बारिश के साथ हिमपात होने लगता था, लेकिन इस बार एक सप्ताह पूर्व उच्च हिमालय की चोटियों पर हुए हल्के हिमपात के बाद एक प्रकार से मौसम रूठ सा गया है। कैलास मानसरोवर यात्रा से लौटे 17वें और 18वें दल के यात्रियों ने बताया कि लिपुलेख में बर्फ नहीं थी। 18वें दल के लायजन आफीसर आईपीएस अधिकारी संजय गुंज्याल के अनुसार उच्च हिमालयी क्षेत्र पर मौसम में खासा बदलाव आ रहा है। लिपुलेख दर्रे में बर्फ का नहीं मिलना इसका संकेत है। मुनस्यारी के आसपास नंदाकुंड और हीरामणि ग्लेशियर के नजदीक की पहाड़ियों पर बर्फ कम हो रही है और पहाड़ काले नजर आ रहे हैं। इन पहाड़ों पर ताजा हिमपात नहीं हुआ है।
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समय से पहले खिलने लगा ब्रह्मकमल, बुरांश
वनस्पति विज्ञानियों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में तापमान बढ़ रहा है। मौसम चक्र में बदलाव के कारण हिमालयी फूल समय से पहले खिल रहे हैं। इस बार बुरांश में फूल जनवरी में ही दिख गए, जबकि सितंबर में खिलने वाला ब्रह्मकमल भी निचले बुग्यालों में अगस्त में ही खिल गया। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. आरके सिंह का कहना है कि समय पर बारिश और हिमपात न होने से यह लक्षण सामने आ रहे हैं।

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