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चीन की महिलाओं से मिले स्नेह से रानीखेत की दीपा खुश
दिनेश अवस्थी/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Sat, 15 Sep 2018 10:32 PM IST
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महिला कैलाश यात्री दीपा तिवारी
- फोटो : अमर उजाला
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बचपन से ही भगवान भोलेनाथ की नगरी कैलाश को देखने की तमन्ना थी। हमेशा मां से कहती थी, एक दिन कैलाश के दर्शन जरूर करूंगी। मौसम साफ रहने से कैलाश के दिव्य और विराट दर्शन हुए। काफी अनुरोध के बाद चरण स्पर्श तक पहुंची और 108 बत्तियों का दीप जलाया। यह कहना है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के 15वें दल में शामिल रानीखेत बसभीड़ा की शिक्षिका दीपा तिवारी (48) का।
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दीपा ने मोबाइल फोन पर बताया कि चीन ने सीमा पर काफी विकास किया है। वहां लोगों में देश प्रेम की भावना भी काफी अधिक है। रास्ते पर कहीं भी खाली केन और कूड़ा मिलने पर पोनी-पोर्टर्स उसे उठाकर कूड़ेदानों में डालते हैं। सरकारी शिक्षा पर चीन की सरकार का काफी फोकस रहता है। साथ ही हर परिवार से एक व्यक्ति को सेना में भर्ती किया जाता है। बेरोजगारों को करीब 40 हजार रुपये का भत्ता दिया जाता है। उन्होंने बताया कि तकलाकोट में वहां की महिलाओं ने उन्हें अपार स्नेह देते हुए गले लगाया। महिलाओं ने उन्हें अपने परिजनों से भी मिलाया।
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वहां के लोगों ने यात्रियों के साथ हिंदी-चीनी भाई-भाई का नारा भी लगाया। रात में चीनी महिलाएं गोल घेरे में सामूहिक नृत्य कर रही थीं जो कि हमारे कुमाऊं में होने वाली चांचरी से काफी मिलता-जुलता है। डेरापुक पहुंचने के बाद कैलाश के चरण स्पर्श करने की इच्छा हुई। इसकी अनुमति नहीं थी, लेकिन गाइड डिक्की से अनुरोध किया और चरण स्पर्श किए। अपने साथ ले गई 108 बत्तियों का दीप जलाकर भगवान भोलेनाथ को अर्पित किया। हालांकि ऑक्सीजन और वायुदाब की कमी के चलते काफी परेशानी हुई।
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पैदल रास्ते पर हुई टॉयलेट की दिक्कत
दीपा ने बताया कि भारतीय क्षेत्र के पैदल रास्तों पर टॉयलेट की काफी समस्या है। गुंजी से कालापानी, नाभीढांग, लिपुपास पहुंचने तक महिला यात्रियों की दिक्कतों को देखते हुए रास्तों पर टॉयलेट का निर्माण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी हम चीन के सामने विकास में काफी पिछड़े हैं।