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नेपाल सीमा से लगा भटेड़ी गांव बना स्वरोजगार का आदर्श मॉडल
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पिथौरागढ़। नेपाल सीमा से लगे भटेड़ी गांव ने ग्रामीणों ने स्वरोजगार के मामले में अपनी अलग पहचान बनाई है। यहां के ग्रामीणों ने कुक्कुट, मत्स्य पालन और जैविक खेती के जरिये स्वावलंबन का जो संदेश दिया है वह प्रेरणास्पद है। इस गांव के अधिकतर लोग स्वरोजगार कर रहे हैं।
झूलाघाट के भटेड़ी गांव में करीब चार साल पहले सबसे पहले ललित सिंह और उनकी पत्नी भावना देवी ने कुक्कुट पालन शुरू किया था। इसके बाद धीरे-धीरे ग्रामीणों का इस ओर रुझान बढ़ता गया। उनसे सीख लेकर अन्य ग्रामीणों ने भी गांव में स्वरोजगार शुरू किया। 10 लोग मत्स्य पालन और 30 परिवार कुक्कुट पालन कर रहे हैं।
गांव में रहने वाले सभी 250 परिवार जैविक खेती कर रहे हैं। ग्रामीणों के कार्यों को देखने के लिए कई गांवों के लोग भटेड़ी आते हैं। शासन-प्रशासन भी स्वरोजगार का प्रशिक्षण देने के लिए जिले की महिलाओं और युवकों को भटेड़ी गांव ले जा रहा है। इन गतिविधियों से गांव में पर्यटन भी बढ़ा है। ग्रामीणों के प्रयासों की लोगों ने सराहना की है।
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छह हजार रुपये की नौकरी छोड़ शुरू किया स्वरोजगार
पिथौरागढ़। भटेड़ी गांव के लाल सिंह गोबाड़ी दिल्ली में नौकरी करते थे। वहां उन्हें छह हजार रुपये मासिक मिलते थे। कुछ समय पूर्व वह नौकरी छोड़कर गांव आ गए और उन्होंने स्वरोजगार शुरू किया। अब वह सालाना तीन से चार लाख रुपये तक कमा रहे हैं। उनका कहना है कि मेहनत के बल पर कुछ भी पाना संभव है।
कोरोना काल और बर्ड फ्लू के समय में हुई दिक्कत
पिथौरागढ़। भटेड़ी गांव के किसानों को कोरोना काल और बर्डफ्लू के समय में काफी नुकसान झेलना पड़ा। सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र गोबाड़ी ने कहा कि कोरोना काल में उत्पादों को बाजार न मिलने और मूल्य कम होने से नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि बर्ड फ्लू के समय में मुर्गियों की बिक्री कम हो गई थी। इसके बाद भी ग्रामीणों ने हार नहीं मानी और मेहनत करते गए।
मेहनत की बदौलत गांव आज इस मुकाम पर पहुंचा है। स्वरोजगार अपनाकर लोग अपनी आजीविका में सुधार कर सकते हैं। ग्रामीणों को अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि ग्रामीणों का उत्साहवर्धन हो और वह बेहतर काम कर सकें।
- मीनू देवी, ग्राम प्रधान भटेड़ी।
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झूलाघाट के भटेड़ी गांव में करीब चार साल पहले सबसे पहले ललित सिंह और उनकी पत्नी भावना देवी ने कुक्कुट पालन शुरू किया था। इसके बाद धीरे-धीरे ग्रामीणों का इस ओर रुझान बढ़ता गया। उनसे सीख लेकर अन्य ग्रामीणों ने भी गांव में स्वरोजगार शुरू किया। 10 लोग मत्स्य पालन और 30 परिवार कुक्कुट पालन कर रहे हैं।
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गांव में रहने वाले सभी 250 परिवार जैविक खेती कर रहे हैं। ग्रामीणों के कार्यों को देखने के लिए कई गांवों के लोग भटेड़ी आते हैं। शासन-प्रशासन भी स्वरोजगार का प्रशिक्षण देने के लिए जिले की महिलाओं और युवकों को भटेड़ी गांव ले जा रहा है। इन गतिविधियों से गांव में पर्यटन भी बढ़ा है। ग्रामीणों के प्रयासों की लोगों ने सराहना की है।
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छह हजार रुपये की नौकरी छोड़ शुरू किया स्वरोजगार
पिथौरागढ़। भटेड़ी गांव के लाल सिंह गोबाड़ी दिल्ली में नौकरी करते थे। वहां उन्हें छह हजार रुपये मासिक मिलते थे। कुछ समय पूर्व वह नौकरी छोड़कर गांव आ गए और उन्होंने स्वरोजगार शुरू किया। अब वह सालाना तीन से चार लाख रुपये तक कमा रहे हैं। उनका कहना है कि मेहनत के बल पर कुछ भी पाना संभव है।
कोरोना काल और बर्ड फ्लू के समय में हुई दिक्कत
पिथौरागढ़। भटेड़ी गांव के किसानों को कोरोना काल और बर्डफ्लू के समय में काफी नुकसान झेलना पड़ा। सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र गोबाड़ी ने कहा कि कोरोना काल में उत्पादों को बाजार न मिलने और मूल्य कम होने से नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि बर्ड फ्लू के समय में मुर्गियों की बिक्री कम हो गई थी। इसके बाद भी ग्रामीणों ने हार नहीं मानी और मेहनत करते गए।
मेहनत की बदौलत गांव आज इस मुकाम पर पहुंचा है। स्वरोजगार अपनाकर लोग अपनी आजीविका में सुधार कर सकते हैं। ग्रामीणों को अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि ग्रामीणों का उत्साहवर्धन हो और वह बेहतर काम कर सकें।
- मीनू देवी, ग्राम प्रधान भटेड़ी।