{"_id":"6aac27899eae3cbc4d063cef","slug":"prayers-offered-for-the-safety-of-livestock-and-a-bountiful-harvest-by-burning-the-khatarva-effigy-pithoragarh-news-c-230-1-pth1022-146886-2026-09-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pithoragarh News: खतड़वा जलाकर की पशुधन की सुरक्षा और अच्छी फसल की कामना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pithoragarh News: खतड़वा जलाकर की पशुधन की सुरक्षा और अच्छी फसल की कामना
Thu, 17 Sep 2026 11:16 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 17 Sep 2026 11:16 PM IST
विज्ञापन
पिथौरागढ़। कुमाऊं का पारंपरिक लोक पर्व खतड़वा जिले भर में उत्साह के साथ मनाया गया। इस दौरान खतड़वा जलाकर लोगों ने पशुधन की सुरक्षा और अच्छी फसल की कामना की। इस दौरान परंपरा के अनुसार ककड़ी का प्रसाद वितरण किया गया।
बृहस्पतिवार को सुबह से ही खतड़वा पर्व पर लोगों खासकर बच्चों में खासा उत्साह नजर आया। सुबह से ही बच्चे खतड़वा जलाने के लिए घास-फूस आदि का प्रबंधन करने में जुटे रहे। शाम को बच्चों ने इस पर्व की पहचान बूढ़ी को चीड़ के जलते छिलकों के साथ गोशाला में घुमाया। इसके बाद खतड़वा के साथ बूढ़ी को जलाकर लोगों ने पशुधन के उत्तम स्वास्थ्य, उनकी सभी व्याधियों को दूर करने और अच्छी फसल की कामना की। परंपरा के अनुसार बच्चों और युवकों ने खतड़वा जलाकर उसके ऊपर से छलांग लगाई। पर्वतीय क्षेत्रों में खासकर गांवों में पशुपालन ही ग्रामीणों की आजीविका का साधन है। ऐसे में इस दिन खतड़वा जलाकर उत्तम कृषि और पशुधन की कामना की जाती है। खतड़वा जलाकर ककड़ी का प्रसाद वितरण किया गया और वर्षा ऋतु को विदाई देते हुए शरद ऋतु का स्वागत किया।
-- -- -- -- --
मशाल जलाकर की मवेशियों की पूजा
खतडवा पर्व पर लोगों ने गोशाला और मवेशियों के बाड़े में मशाल जलाकर पशुओं के बीमारियों से दूर रहने की कामना की। पशुपालकों ने पशुओं की पूजा भी की और मवेशियों की साफ-सफाई के अलावा उनके गौशालाओं को भी साफ किया। परंपरा के अनुसार, खतड़वा पर्व पर पशुओं को उनके मन मुताबिक घास भी खिलाई गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
बृहस्पतिवार को सुबह से ही खतड़वा पर्व पर लोगों खासकर बच्चों में खासा उत्साह नजर आया। सुबह से ही बच्चे खतड़वा जलाने के लिए घास-फूस आदि का प्रबंधन करने में जुटे रहे। शाम को बच्चों ने इस पर्व की पहचान बूढ़ी को चीड़ के जलते छिलकों के साथ गोशाला में घुमाया। इसके बाद खतड़वा के साथ बूढ़ी को जलाकर लोगों ने पशुधन के उत्तम स्वास्थ्य, उनकी सभी व्याधियों को दूर करने और अच्छी फसल की कामना की। परंपरा के अनुसार बच्चों और युवकों ने खतड़वा जलाकर उसके ऊपर से छलांग लगाई। पर्वतीय क्षेत्रों में खासकर गांवों में पशुपालन ही ग्रामीणों की आजीविका का साधन है। ऐसे में इस दिन खतड़वा जलाकर उत्तम कृषि और पशुधन की कामना की जाती है। खतड़वा जलाकर ककड़ी का प्रसाद वितरण किया गया और वर्षा ऋतु को विदाई देते हुए शरद ऋतु का स्वागत किया।
विज्ञापन
मशाल जलाकर की मवेशियों की पूजा
खतडवा पर्व पर लोगों ने गोशाला और मवेशियों के बाड़े में मशाल जलाकर पशुओं के बीमारियों से दूर रहने की कामना की। पशुपालकों ने पशुओं की पूजा भी की और मवेशियों की साफ-सफाई के अलावा उनके गौशालाओं को भी साफ किया। परंपरा के अनुसार, खतड़वा पर्व पर पशुओं को उनके मन मुताबिक घास भी खिलाई गई।
विज्ञापन